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अमरावती के देवुरवाडा गांव में खपरैल का उपयोग क्यों नहीं होता?

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Agency:Local18

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Amravati Devurwada Village: अमरावती जिले के चांदुर बाजार तालुका का देवुरवाडा गांव देव का वाडा के नाम से भी जाना जाता है. इस गांव में खपरैल का इस्तेमाल कभी नहीं होता.

इस गांव में आज तक किसी ने नहीं बनाया खपरैल का घर! भगवान नृसिंह से है कनेक्शन

हाइलाइट्स

  • अमरावती के देवुरवाडा गांव में खपरैल का घर नहीं बनता.
  • गांव में भगवान नृसिंह की स्वयंभू मूर्ति है.
  • खपरैल का आकार नृसिंह भगवान के नाखूनों जैसा होता है.

प्रगति बहुरूपी/अमरावती: पुराने समय में ग्रामीण इलाकों में घरों की छत पर खपरैल का इस्तेमाल होता था. अधिकतर घर खपरैल से बनाए जाते थे. आज भी कई जगहों पर खपरैल के घर देखे जा सकते हैं, लेकिन अमरावती जिले का एक गांव ऐसा है जहां कभी भी खपरैल का इस्तेमाल नहीं हुआ. आज भी वहां कहीं भी खपरैल नहीं दिखते. अमरावती जिले के चांदुर बाजार तालुका का देवुरवाडा गांव देव का वाडा के नाम से भी जाना जाता है. इस गांव में खपरैल का इस्तेमाल कभी नहीं होता. जब घर बनाने के लिए कुछ भी नहीं मिलता था, तब वहां के लोगों ने घास और लकड़ी का इस्तेमाल कर छत बनाई, लेकिन कभी भी खपरैल का घर नहीं बनाया.

खपरैल के घर क्यों नहीं?
बता दें कि देवुरवाडा गांव में खपरैल के घर क्यों नहीं दिखते? इस बारे में वहां के ग्रामीणों से लोकल 18 ने बात की. उन्होंने बताया कि इसके पीछे एक बड़ी कहानी है. हमारे गांव में भगवान नृसिंह की स्वयंभू मूर्ति है. साथ ही गांव से बहने वाली पयोष्णी नदी भी इस कहानी का हिस्सा है. भगवान विष्णु के अवतार हैं मच्छ, कच्छ, वराह और नृसिंह. यानी विष्णु का चौथा अवतार नृसिंह भगवान हैं.

आगे उन्होंने बताया कि नृसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध अपने नाखूनों से किया था. इसके बाद उनके नखों में जलन हो गई थी. उस जलन को शांत करने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए. फिर वे पयोष्णी नदी के किनारे आए. वहां के करशुद्धीतीर्थ पर उन्होंने अपने नाखूनों को पानी में डुबोया, जिससे उनकी जलन शांत हो गई. तब से नृसिंह भगवान वहां स्थायी रूप से बस गए. देवुरवाडा गांव में नृसिंह भगवान की स्वयंभू मूर्ति है.

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देवुरवाडा गांव में खपरैल के घर क्यों नहीं हैं?
कृष्ण गायगोले ने जानकारी दी कि हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद नृसिंह भगवान देवुरवाडा गांव में स्थायी रूप से बस गए. लोगों की उन पर अपार श्रद्धा हो गई. इस गांव के सभी धर्मों के लोग नृसिंह भगवान को मानते हैं. इसलिए नृसिंह भगवान से संबंधित किसी भी बात को बड़ी श्रद्धा से मानते हैं. खपरैल का आकार नृसिंह भगवान के नाखूनों जैसा होता है, इसलिए इस गांव में कोई भी खपरैल का इस्तेमाल नहीं करता. कुछ लोगों ने इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, तब उन्हें चमत्कारिक घटनाएं हुईं. इसके बाद से किसी ने भी गांव में खपरैल का घर नहीं बनाया.

(यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था पर आधारित है. इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. न्यूज18 हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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