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Bollywood Superhit Movies : बॉलीवुड में एक साल में कई फिल्में बनती हैं. कुछ पूरी होने से पहले ही बंद हो जाती हैं. कुछ सेंसर बोर्ड में अटक जाती हैं तो कुछ 90 फीसदी बनने के बाद भी डिब्बे में चली जाती हैं. क्या किसी बंद फिल्म से दो हिट मूवी निकल सकती हैं? बॉलीवुड में यह कारनामा हो चुका है. अमिताभ बच्चन की एक अटकी हुई फिल्म ने रजनीकांत का हिंदी सिनेमा में भाग्य चमकाया. इस बंद फिल्म से दो हिट फिल्में निकलीं. इन दोनों में से एक मूवी में अमिताभ बच्चन-श्रीदेवी-जया प्रदा ने फ्री में काम किया. ये फिल्म कौन सी थी, ऐसा क्या हुआ कि अमिताभ को फ्री में काम करना पड़ा, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा……

बात 70 के दशक के शुरुआती वर्षों की है. अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए स्ट्रगल ही कर रहे थे. प्रोड्यूसर कैलाश कपूर अमिताभ बच्चन को लेकर एक फिल्म बना रहे थे. नाम था : एक था चंदर, एक थी सुधा. इस फिल्म में काम करने के लिए पहले रेखा को संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. फिर जया भादुड़ी ने अमिताभ के साथ काम करने की हामी भरी. फिर भी यह फिल्म बन नहीं पाई. यह बात 1973 से पहले की है. जंजीर तब रिलीज नहीं हुई थी. अमिताभ ने प्रोड्यूसर कैलाश कपूर के साथ जो कॉन्ट्रैक्ट किया था, उसे प्रोड्यूसार ए. पूर्ण चंदराव ने खरीद लिया. उन्होंने ‘एक था चंदर, एक थी सुधा’ के प्रोड्यूसर कैलाश कपूर को उनकी फिल्म की लागत के पैसे भी दे दिए. अब अमिताभ का कॉन्ट्रैक्ट ए. पूर्ण चंदराव के पास आ गया. ए. पूर्ण चंद्रराव ने ऐसी दो फिल्में बनाईं जो मैसिव हिट साबित हुईं. ये फिल्में थीं : अंधा कानून और आखिरी रास्ता. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…

बहुत साल बाद प्रोड्यूसर ए. पूर्णाचंद राव ने अमिताभ से कहा कि उनकी एक फिल्म ‘अंधा कानून’ बन रही है . रजनीकांत-हेमा मालिनी फाइनल हो चुके हैं. एक छोटा सा गेस्ट रोल आपको करना है. अमिताभ ने गेस्ट रोल के हिसाब से सिर्फ 5 दिन काम किया. कम समय में ऐसा रोल करवाया कि पूरी फिल्म में छा गया. अमिताभ बच्चन का रोल 35 मिनट फिल्म निकलने के बाद शुरू होता है. अमिताभ बच्चन का पोर्शन पूरी फिल्म पर हावी हो जाता है. मेन कहानी हेमा मालिनी और उनके भाई रजनीकांत के साथ हुए जुल्म पर चलती है लेकिन अमिताभ की छोटी सी साइड स्टोरी फिल्म में बड़ा इंपैक्ट छोड़ती है.

अंधा कानून फिल्म एक तमिल फिल्म का रीमेक थी. यह फिल्म 8 अप्रैल 1983 को रिलीज हुई थी. फिल्म में रजनीकांत, हेमा मालिनी, रीना रॉय, अमिताभ बच्चन, माधवी, डैनी डेंजोंगप्पा, प्रेम चोपड़ा, प्राण, मदन पुरी और अमरीश पुरी में नजर आए थे. फिल्म को टी. रामाराव ने डायरेक्ट किया था. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म के सभी गाने सुपरहिट साबित हुए थे. टाइटल सॉन्ग ‘ये अंधा कानून है’ और ‘रोते-रोते हंसना सीखो, हंसते-हंसते रोना’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. फिल्म में अमिताभ का नाम जां निसार अख्तर था. जां निसार अख्तर गीतकार जावेद अख्तर के पिता थे. प्रोड्यूसर-डायरेक्टर को वह बहुत पसंद थे. फिल्म से जुड़ा रोचक किस्सा यह भी है कि ‘रोते-रोते हंसना सीखो, हंसते-हंसते रोना, जितनी चाभी भरी राम ने, उतना चले खिलौना’ अमिताभ स्क्रीन पर गाते हुए नजर आते हैं जबकि उनका किरदार मुस्लिम शख्स का था.
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अमिताभ बच्चन भरी अदालत में अमरीश पुरी का मर्डर करते हैं. मर्डर के बाद अमिताभ बच्चन के डायलॉग ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया था. अमिताभ कहते हैं, ‘जज साहब! आपका कानून एक ही मर्डर के लिए दो बार सजा नहीं दे सकता. सुना आपने, दो बार सजा नहीं दे सकता. और अगर आप सजा देना ही चाहते हैं तो पहले मेरे वो साल लौटाइये जो मैंने बेगुनाही में जेल में काटे हैं. मेरी नीलो को कब्र से निकालकर कब्र में लाइये, जवाब दीजिए जज साहब! मैं आपसे सवाल कर रहा हूं.’ 1960 में बीआर चोपड़ा की एक फिल्म कानून में भी ऐसा ही सीन देखने को मिला था. इस फिल्म में विलेन जीवन शुरुआत में ही एक खून करते हैं. बाद में वो अदालत में कहते हैं कि जिस आदमी का खून मैंने किया है, उसकी सजा मैं पहले ही काट चुका हूं. एक ही मर्डर के लिए कानून मुझे दो बार सजा नहीं दे सकता. ‘अंधा कानून’ फिल्म की कहानी इसी मूवी से इंस्पायर्ड थी.

अमिताभ बच्चन का पोर्शन पूरी फिल्म पर हावी हो जाता है. मेन कहानी हेमा मालिनी और उनके भाई रजनीकांत के साथ हुए जुल्म पर चलती है लेकिन अमिताभ की छोटी सी साइड स्टोरी फिल्म में बड़ा इंपैक्ट छोड़ती है. यह रजनीकांत की पहली हिंदी फिल्म थी. हिंदी दर्शकों में रजनीकांत पहली ही फिल्म से पॉप्युलर हो गए थे. हेमा उस समय फीमेल स्टार थीं. हेमा मालिनी का कोई रोमांटिक रोल फिल्म में नहीं था. फिल्म बदले की कहानी थी लेकिन इंटेस इमोशन के साथ शानदार बैंकग्राउंड के साथ मसाला फिल्म बनाकर पेश किया गया.

फिल्म के टाइटल ‘अंधा कानून’ को कहानी में कई बार साबित किया गया. बैकग्राउंड में किशोर कुमार की आवाज में ‘ये अंधा कानून है’ बार-बार सुनाई देता रहता है. इधर रजनीकांत अपने परिवार के साथ हुए जुल्म का बदला तीनों विलेन को बारी-बारी से मारकर लेते हैं. तीनों विलेन का मर्डर इस तरह से होता है कि कानून सब जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाता. बचपन में विलेन उनके पिता-बहन को मारकर जैसे बेगुनाह साबित हुए थे, वैसे ही रजनीकांत आखिरी विलेन प्राण को मारकर बेगुनाह साबित होते हैं. फिल्म की कहानी में बार-बार साबित किया गया कि गवाह-सबूत पर चलने वाला कानून बहुत बार गलत फैसले कर सकता है.

आगे चलकर ‘अंधा कानून’ के डायरेक्टर टी. रामाराव ने अमिताभ बच्चन को दो फिल्मों ‘इंकलाब’ और ‘खबरदार’ के लिए साइन किया था. इंकलाब 1984 में रिलीज हुई थी. खबरदार के प्रोयूसर भी ए. पूर्णाचंद्र राव ही थे. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, कमल हासन, श्री देवी और जया प्रदा काम कर रही थीं. फिल्म का सब्जेक्ट मर्सी किलिंग पर बेस्ड था. कमल हासन मरीज थे और बिग बी डॉक्टर थे. वो कमल हासन की इच्छा के हिसाब से उन्हें जिंदगी से आजाद करना था. क्लाइमैक्स शूट करने से पहले अमिताभ अपनी इमेज को लेकर चिंतित हो गए. इसी बीच अमिताभ राजनीति में बिजी हो गए. यह फिल्म 90 फीसदी बनकर तैयार हुई थी लेकिन बंद हो गई.

प्रोड्यूसर ए. पूर्णचंद्रा राव के हर्जाने के तौर पर अमिताभ, श्री देवी और जया प्रदा ने आगे चलकर आखिरी रास्ता फिल्ल में काम किया. तीनों ने यह फिल्म फ्री में की थी. यह फिल्म 6 जून 1986 में आई थी. इसके डायरेक्टर के. भाग्यराज थे. कहानी के भाग्यराज ने ही लिखी थी. यह भी एक तमिल फिल्म का रीमेक थी. डायलॉग राही मासूम रजा ने लिखे थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. फिल्म का एक गाना ‘गोरी का साजन, साजन की गोरी’ बहुत पॉप्युलर हुआ था. आखिरी रास्ता फिल्म के समय श्री देवी हिंदी नहीं जानती है. उनकी इस फिल्म को रेखा ने डब किया था. रेखा श्रीदेवी को बहुत पसंद करती थीं. यह फिल्म अमिताभ की खास फिल्म में शामिल है. इसमें उनका डबल रोल था. यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. 1986 की यह तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. श्रीदेवी को असली स्टारडम इसी फिल्म से मिला. उनकी नगीना फिल्म भी 1986 में ही आई थी.
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