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अस्पताल थी ये इमारत, फिर बनी मुर्दाघर, जब गिराई जाने लगी, तब उसकी तस्वीरों ने मचाई हलचल!

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एक पुरानी जर्जर इमारत को सरकार ने खत्म करने का फैसला लिया था. लेकिन जब एक खोजकर्ता ने उसके ध्वस्त होने से पहले उसका जायजा लिया तो उसके एक इतिहास की कहानी सामने आती चली गई. लंबे समय तक अस्पताल रही इमारत पहले मान…और पढ़ें

अस्पताल से मुर्दाघर बनी इमारत, गिराई जाने लगी, तब उसकी तस्वीरों ने मचाई हलचल!

कुछ साल पहले ही इस इमारत को सरंक्षित कराने के प्रयास हो रहे थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • पुरानी इमारत को गिराने का फैसला लिया गया
  • इमारत पहले अस्पताल, फिर मानसिक चिकित्सालय और मुर्दाघर बनी
  • एक्सप्लोरर ने इमारत की तस्वीरें साझा कीं

पुरानी इमारतों के साथ अक्सर खौफानाक, भूतहा, या फिर डरावनी जगह का टैग लग जाता है. ऐसे में अगर इमारत का इस्तेमाल ही होना बंद हो गया हो यह सब स्वाभाविक है. एक इमारत के साथ ऐसी ही कहानियां बनने लगी थीं. तभी सरकार ने इसे गिराने का फैसला कर लिया. पर जब एक एक्सप्लोरर ने इसे देखा और तस्वीरें शेयर की तो कभी मुर्दाघर रही इस इमारत की एक अलग ही कहानी लोगों के सामने आ गई.

एक अस्पताल का हिस्सा थी इमारत
वेस्ट यॉर्कशायर के ब्रैडफोर्ड में सेंट ल्यूक अस्पताल के बगल में एक सुनसान छोड़ा हुआ भवन 2010 में बंद हो गया था. 1870 के दशक में इसे नए ब्रैडफोर्ड यूनियन वर्कहाउस के रूप में खोला गया, जिसमें 350 गरीब लोग रहते थे और उस समय के सीमित चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित एक बड़ा सा अस्पताल था. पर किसे पता था जल्दी ही इसकी किस्मत में एक डरावनी इमारत का तमगा लगने वाला है.

ऐतिहासिक इमारत बनाने के प्रयास नाकाम
1898 में, यह स्थल क्लीवलैंड असाइलम यानी एक मानसिक संस्थान के रूप में फिर से खुला.  बाद में यह संस्थान तो बंद हो गया पर इमारत अकेली जर्जर होती रह गई जिसकी किसी ने सुध नहीं ली. इतिहास में डूबा होने के बावजूद, 1995 और 2009 में इमारत को सूचीबद्ध करने के प्रयास भी हुए पर वे सारे विफल रहे. 2010 के बाद से यह खाली सुनसान पड़ी रही.

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इमारत को साल 2010 में नष्ट कर दिया गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

इमारत को खत्म करने के फैसला
आलम ये हो गया कि इस इमारत को लेकर चोरी, बर्बरता, आगजनी जैसी शिकायतें आने लगीं. जल्दी ही स्थानीय परिषद ने इस इमारत को ही खत्म करने की योजना बना डाली. लेकिन इससे पहले कि इमारत पर बुल्डोजर चढ़ता, एक्सप्लोरर बेन जेम्स ने इमारत का दौर कर उसके अंदर की तस्वीरें  ली. इसके बाद उन्होंने जगह और इमारत के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि ये जगहें डरावनी नहीं लगतीं, बस कुछ ज्यादा ही शांत हैं.

बुरा हो गया था हाल
खत्म होने की खबर जानने के बाद जेम्स ने वहां एक बार जाने के बारे में सोचा. लोग मानने लगे थे कि यह जगह भूतहा है पर वे यह भूल जाते हैं कि यहां आने वाले लोग पहले ही मर चुके थे. मुर्दाघर 1970 से इस्तेमाल हो रहा था और  2010 के आसपास बंद हो गया था. तस्वीरों मे कई मृत्यु प्रमाण पत्र और मुर्दाघर के कार्ड के अलावा गलियारे भी कूड़े से भरे पड़े थे. साफ था इमारत के साथ अंदरूनी हिस्से भी जर्जर हो चुके थे.

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1915 से, सेंट ल्यूक अस्पताल युद्ध कार्यालय के नियंत्रण में आ गया और प्रथम विश्व युद्ध के अंत में, सेंट ल्यूक के पास 1,700 बिस्तर थे. द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के साथ ही अस्पताल 1939 में आपातकालीन चिकित्सा सेवा में शामिल हो गया. लगभग 192 गंभीर रूप से घायल सैनिकों को डनकर्क के समुद्र तटों से सीधे अस्पताल लाया गया था. लेकिन धीरे धीरे यह कहानी भी गुम ही हो गई.

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