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‘आत्माओं का शहर’ जहां जिदां इसानों से ज्यादा लाशें दफन हैं…आबादी 2000 से भी कम

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Agency:Local18

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City of Souls: कैलिफोर्निया का शहर कॉलमा ‘आत्माओं का शहर’ कहलाता है, जहां 1,800 लोग रहते हैं, लेकिन 17 कब्रिस्तानों में करीब 15 लाख लोग दफन हैं.

'आत्माओं का शहर', जहां जिदां इसानों से ज्यादा लाशें दफन हैं, आबादी 2000 से कम

प्रतीकात्मक तस्वीर

कैलिफोर्निया का एक छोटा सा शहर, कॉलमा, अपने अद्भुत और रहस्यमय इतिहास के कारण दुनिया भर में जाना जाता है. इसे अक्सर ‘आत्माओं का शहर’ कहा जाता है, लेकिन इसका असली नाम कॉलमा है. यह शहर सिर्फ 1.9 वर्ग मील में फैला हुआ है, और यहां की जनसंख्या 2,000 से भी कम है. लेकिन यहां के 17 कब्रिस्तानों में करीब 15 लाख लोग दफन हैं. इस छोटे से शहर में बड़ी-बड़ी हस्तियां जैसे डेनिम के संस्थापक लेवी स्ट्रॉस, बैंक ऑफ अमेरिका के संस्थापक ए.पी. जाननिनी और प्रसिद्ध बेसबॉल खिलाड़ी जोए डिमैगियो का भी अंतिम विश्राम स्थल है.

जनसंख्या का विस्फोट
1848 में एक दुर्घटना के दौरान कैलिफोर्निया में सोने की खोज हुई. इस खोज ने अमेरिका में तहलका मचा दिया और लोग अमीर बनने की चाह में कैलिफ़ोर्निया की ओर दौड़ पड़े. सैन फ्रांसिस्को में जनसंख्या का विस्फोट हुआ, और दो सालों में इसकी आबादी 812 से बढ़कर 25,000 हो गई. जनसंख्या बढ़ने के साथ ही सैन फ्रांसिस्को के कब्रिस्तान भी भरने लगे. ऐसे में कॉलमा में शवों को दफनाने का सिलसिला शुरू हुआ, और 1887 में यहां पहला कब्रिस्तान स्थापित किया गया.

बीमारियों का खतरा
सैन फ्रांसिस्को में धीरे-धीरे यह धारणा बन गई कि कब्रिस्तान के पास रहने से बीमारियाँ फैलती हैं. इस चिंताजनक स्थिति के मद्देनजर 1914 में शहर की अथॉरिटीज़ ने फैसला लिया कि अब और किसी को दफन नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि पुराने कब्रिस्तानों में दफन लाशों को कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए ताकि वहाँ की जमीन का इस्तेमाल अन्य कामों के लिए किया जा सके.

लाशों को कॉलमा में शिफ्ट किया गया
1914 के बाद सैन फ्रांसिस्को के अधिकारियों ने आदेश दिया कि सभी कब्रों को शहर के बाहर शिफ्ट किया जाए. उस समय सैन फ्रांसिस्को में करीब दो दर्जन कब्रिस्तान थे. इन कब्रिस्तानों से शवों को खोदकर कॉलमा में ट्रांसपोर्ट किया गया. 20वीं सदी की शुरुआत में लगभग 1.5 लाख शवों को कॉलमा में शिफ्ट किया गया. तभी से कॉलमा में लाशों की संख्या बढ़ती चली गई.

हर एक जिंदा इंसान के पीछे 833 लाशें
आज के समय में कॉलमा में सिर्फ 1,800 लोग रहते हैं, लेकिन यहां के कब्रिस्तानों में दफन लाशों की संख्या 15 लाख से भी ज्यादा है. यहां के कब्रिस्तानों में मृतकों का जिंदा लोगों से अनुपात 1:833 है. इसका मतलब है कि कॉलमा में हर एक जिंदा इंसान के पीछे 833 लाशें हैं. यही कारण है कि इस शहर को ‘आत्माओं का शहर’ कहा जाता है.

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