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उंगलियां चटकाने की आवाज का रहस्य: जब नई रिसर्च को मिले पुरानी स्टडी के बिलकुल उलट नतीजे!

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उंगलियों के चटकने पर जो आवाज निकलती है, वह क्या होती है या कैसे निकलती है. इसको लेकर पहले साइंटिस्ट बहुत ही अलग सोचते थे. उनका मानना था कि इस प्रक्रिया में एक गैस का बुलबुला फूटता है. लेकिन 2015 की स्टडी में शो…और पढ़ें

उंगलियां चटकाने की आवाज: जब नई रिसर्च को मिले पुरानी स्टडी के उलट नतीजे!

उंगलियां का चटकना किसी तरह की समस्या पैदा नहीं करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • उंगलियां चटकाने से गैस का बुलबुला बनता है, फूटता नहीं है.
  • 2015 की स्टडी ने पुराने नतीजों को गलत साबित किया.
  • उंगलियां चटकाने से जोड़ों में कोई नुकसान नहीं होता.

क्या आपने कभी गौर किया है कि आप जो कभी कभी या अक्सर भी अपने हाथ की ऊंगलियां चटकाते हैं, तो ऐसा क्यों होता है? हो सकता है कि इस विषय पर सेहत को लेकर आपको अलग अलग राय मिली हो. इसकी सबसे दिसचस्प बात यही है कि वैज्ञानिक सालों से जो इसकी वजह सोचा करते थे, करीब दस साल पहले पता चला कि असल बात तो ठीक उसके उलट ही है. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और अब साइंटिस्ट्स इसकी कैसे व्याख्या करते हैं?

कैसी होती है आवाज
ऊंगलियों का चटकना वह क्रिया है जिसमें उंगलियां थोड़े सी, खास अंदाज में मुड़ने के बाद चटकने की आवाज निकालती हैं. यह आवाज हलकी नहीं होती है. कई बार तो इतनी ज्यादा होती है कि शांत लाइब्रेरी तक में गूंज जाए. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये आवाज बनती कैसे है?

पुराने अध्ययन के नतीजे
2015 में वैज्ञानिकों ने एक शख्स की ऊंगली चटकाने की प्रक्रिया का अवलोकन एमआरआई मशीन से किया. लेकिन उससे पहले जो वैज्ञानिक समझते थे, यह जानना जरूरी है. लंबे समय से  माना जाता था कि उंगलियों के जोड़ के बीच में जो सिनोवाइल तरल होता है, उसमें एक गैस का छोटा से गोला होता था, वह खत्म हो जाता है जिससे चटकने की आवाज पैदा होती है. लेकिन 2015 की स्टडी ने कहा ऐसा नहीं है.

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वैज्ञानिकों का कहना है कि उंगलियां चटकाने से हड्डियों के जोड़ के बीच बुलबुला बनता है, फूटता नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)

असल में क्या होता है?
वैज्ञानिकों ने पाया कि असल में तो उल्टा ही होता है. उंगली के चटकने के बाद को गैस का बुलबुला बन जाता है, जो पहले नहीं हुआ करता था. वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को ट्राइबोन्यूक्लिएशन कहते हैं. इसमें जोड़ों की सतह उन्होंने अलग करने की कोशिश करने वाले बल का प्रतिरोध करता है. उसी बल के कारण अचानक ही निर्वात बनता है जिसमें गैस भर जाती है और हमें कड़कने या चटकने की आवाज सुनाई देती है.

बुलबुला बना या फूटा?
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड तकनीक से भी जांचा, जिसमें उन्हें एक बम फूटने जैसी चमक दिखाई दी. इससे वे इस नतीजे पर पहुंचे कि इसके जोड़ों में बनने वाले गैसे के बुलबुले से गहरा संबंध है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रेडियोलॉजी की प्रोफेसर रॉबर्ट डी बाउटिन का कहना है कि चमक केवल चटकने के बाद ही दिखी, जो बुलबुला बनने की संकेत ज्यादा लगता है, ना की बुलबुला फूटने का!

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एमआरआई वाली स्टडी में पाया गया था कि बुलबुला आवाज बनने के बाद भी बना रहता है और धीरे धीरे गायब हो जाता है. इससे जोड़ों में किसी तरह का नुकसान होता नहीं दिखा.  वहीं जॉन हॉपकिन्स का भी यही कहना है कि इसका आर्थराइटिस जैसे रोग से कोई लेना देना नहीं है. हां लेकिन अगर इससे किसी तरह की परेशानी या दर्द होता है तो जरूर डॉक्टर की जरूरत हो सकती है.

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