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सेबी (SEBI) साप्ताहिक एक्सपायरी को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि इस पर परामर्श पत्र जारी कर सभी की राय लेने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
सेबी जल्द ही वीकली एक्सपायरी खत्म करने पर परामर्श पत्र जारी करेगी.(Image:PTI)मुंबई. शेयर बाजार में ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियमों में बदलाव की चर्चा काफी ज्यादा दिख रही है. अब तक कई रिसर्च में साफ हो चुका है कि ज्यादातर रिटेल ट्रेडर इसमें घाटा ही उठाते हैं. इसके बाद चर्चा है कि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) साप्ताहिक एक्सपायरी को लेकर जल्द बड़ा फैसला कर सकता है. इसके बारे में चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि इस पर विस्तृत परामर्श पत्र जारी किया जाएगा और सभी भागीदारों से राय लेने के बाद ही कदम उठाया जाएगा.
वीकली एक्सपायरी पर परामर्श की तैयारी
सेबी चेयरमैन ने बोर्ड मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वीकली एक्सपायरी को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन किसी भी बदलाव से पहले सेबी एक कंसल्टेशन पेपर लाएगा और सभी मार्केट पार्टिसिपेंट्स को इसमें शामिल किया जाएगा. पांडे ने साफ किया कि पारदर्शिता के साथ सभी को जानकारी दी जाएगी और नियामक सिर्फ प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही नया नियम बनाएगा.
खुदरा निवेशकों के नुकसान से सबक
पिछले एक साल में सेबी लगातार ऑप्शंस मार्केट पर सख्ती कर रहा है. सर्वे में सामने आया कि पिछले तीन सालों में रिटेल ट्रेडर्स ने वीकली एक्सपायरी जैसे हाई-रिस्क ट्रेड्स में लगभग ₹1.8 लाख करोड़ गंवा दिए. इसी के बाद नियामक ने विकल्प कॉन्ट्रैक्ट का आकार बढ़ाने से लेकर प्रति एक्सचेंज केवल एक ही वीकली एक्सपायरी की सीमा तय करने जैसे कदम उठाए. इस साल सितंबर से NSE और BSE ने एक्सपायरी स्वैप भी किया, जिससे बीएसई को थोड़ी बढ़त और टर्नओवर में 19 फीसदी की उछाल देखने को मिली.
नए नियमों से घटेगी अस्थिरता
सेबी पहले ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मैच्योरिटी बढ़ाने और डेल्टा-बेस्ड ओपन इंटरेस्ट कैलकुलेशन जैसे सुधार लागू कर चुका है. इसके अलावा मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट्स (MWPL), प्री-ओपन और पोस्ट-मार्केट सेशन और नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स पर डेरिवेटिव्स की पात्रता के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर रोक लगेगी और लंबी अवधि में स्थिरता आएगी. हालांकि, सेबी के कदमों से शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को दिक्कत हो सकती है, लेकिन पारदर्शी और परामर्श आधारित प्रक्रिया निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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