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ओशो और उनकी ‘चमत्कारी कुर्सी’; हर अनुयायी को खींच लाती है जबलपुर! जानिए इसका राज…

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Agency:News18 Madhya Pradesh

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Jabalpur News : जबलपुर के महाकौशल कॉलेज में एक कुर्सी मौजूद है. इस कुर्सी को देखने भारत और विदेश से लोग आते हैं. यह यहां की लाइब्रेरी में रखी है. इस कुर्सी में ऐसा क्या खास है जो इतने दूर-दूर से लोग देखने मात्र…और पढ़ें

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आचार्य

आचार्य ओशो रजनीश जैन और चेयर.

जबलपुर. राजनीति में कुर्सी की लड़ाई आपने देखी ही होगी. लेकिन जबलपुर में एक ऐसी कुर्सी है जिसे देखने भारत से नहीं विदेश से लोग आते हैं. दरअसल, हम बात कर रहे हैं आचार्य ओशो रजनीश की कुर्सी की. आप सोच रहे हैं वही ओशो, जिनके विचारों ने देश ही नहीं बल्कि विदेश में अपना डंका बजवाया. जी हां, आचार्य ओशो रजनीश, जो जबलपुर के महाकौशल कॉलेज में फिलाॅसफी यानी कि दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर हुआ करते थे. जिस कुर्सी पर बैठकर वह स्टूडेंट्स को पढ़ाया करते थे, आज भी वह चेयर महाकौशल कॉलेज में मौजूद है.

ओशो रजनीश को जिसने भी सुना है. वह उनका मुरीद हो गया है. जिनकी व्याख्यान शैली गजब की थी. उनके जीवन का एक हिस्सा जबलपुर से भी जुड़ रहा है. जहां उनकी चेयर आज महाकौशल कॉलेज की शोभा बढ़ा रही है. इतना ही नहीं उनके लाखों संख्या में शिष्य भी हैं. जो उनकी चेयर को देखने विदेश से आते हैं.

महाकौशल कॉलेज में 1960 से 1967 तक थे
लोकल 18 की टीम जब ओशो की चेयर देखने पहुंची. तब हमारी मुलाकात हिंदी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अरुण शुक्ला से हुई. जिन्होंने बताया कि वे विगत 25 वर्षों से कॉलेज में पढ़ा रहे हैं. ओशो की चेयर महाकौशल कॉलेज की लाइब्रेरी में रखी हुई है. जिसे देखने स्टूडेंट ही नहीं उनके अनुयायियों का तांता लगता है. ओशो रजनीश इस कॉलेज में 1960 से 1967 तक थे. वह मात्र एक ऐसे प्रोफेसर थे जो कार से आया करते थे.

लाइब्रेरी में एक बार में पढ़ते थे 7 से 8 पुस्तक
हैरान करने वाली बात यह है कि आचार्य ओशो रजनीश क्लास में लेक्चर के बाद कॉलेज की लाइब्रेरी में पहुंचा करते थे. तब एक साथ सात से आठ किताब लाइब्रेरी में ही बैठकर पढ़ा करते थे. जिसका प्रमाण आज भी महाकौशल कॉलेज में मौजूद रजिस्टर में देखने को मिलता है. यहां बाकायदा उनके साइन भी हैं. इतना ही नहीं लाइब्रेरी में विजिटर रजिस्टर भी रखा हुआ है. जिसमें मलेशिया से लेकर इंडोनेशिया तक के अनुयायी कॉलेज पहुंचते हैं. जिन्होंने ओशो की चेयर पर अपने कमेंट और बकायदा हस्ताक्षर भी किया है.

नौकरी के बाद अध्यात्म से जुड़ गए
ऐसा कहा जाता जाता है जबलपुर में नौकरी करने के बाद वह सीधे अध्यात्म से जुड़ गए और दुनिया भर में भ्रमण कर अपनी अध्यात्म और शांति की शिक्षा देने लगे. इसके बाद आचार्य रजनीश जैन, ओशो के नाम से विख्यात हो गए. वहीं अब आचार्य ओशो रजनीश के तर्क को दुनिया मान रही है. जिनके तर्क ने हर व्यक्ति को सोचने में मजबूर कर दिया हैं.

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