Headlines

किसान के पास थी खुद की ट्रेन, कोर्ट ने बनवाया मालिक, रेलवे की एक गलती से हुआ कांड, 5 मिनट में मचा तहलका!

[ad_1]

Last Updated:

ये कोई मज़ाक की बात नहीं है, बल्कि बिल्कुल सच है. लुधियाना के रहने वाले संपूर्ण सिंह देश के इकलौते ऐसे नागरिक और किसान हैं, जो पूरी एक ट्रेन के मालिक बन गए. ट्रेन भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि दिल्ली से अमृतसर तक …और पढ़ें

किसान के पास थी खुद की ट्रेन, रेलवे की एक गलती से हुआ कांड, मचा तहलका!

किसान बना ट्रेन का मालिक.

वक्त बदलता रहता है. आजकल जहां लोग किसी लग्ज़री कार का मालिक होना बड़ी बात समझते हैं, वहीं एक ज़माना वो भी होता था, जिसमें राजा-महाराजा बड़े-बड़े हाथी-घोड़ों के मालिक हुआ करते थे. परिस्थितियां बदलीं और पूंजीवाद के आने के बाद लोग प्राइवेट जेट या करोड़ों की कारें खरीदने लगे. हालांकि आज तक आपने किसी को ट्रेन खरीदते हुए नहीं सुना होगा. कोई खरीदेगा भी कैसे? ये तो भारतीय सरकार के अधीन होती है.

हालांकि आज हम आपको जो बताने जा रहे हैं, ये कोई मज़ाक की बात नहीं है, बल्कि बिल्कुल सच है. लुधियाना के रहने वाले संपूर्ण सिंह देश के इकलौते ऐसे नागरिक और किसान हैं, जो पूरी एक ट्रेन के मालिक बन गए. ट्रेन भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि दिल्ली से अमृतसर तक जाने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (Delhi-Amritsar Swarna Shatabdi Express). आप भी सोच रहे होंगे कि ये चमत्कार हुआ कैसे? तो चलिए बताते हैं इसके बारे में.

रेलवे की एक गलती से ट्रेन का मालिक बना किसान
लुधियाने के कटाणा गांव में रहने वाले संपूर्ण सिंह दिल्ली से अमृतसर जाने वाली ट्रेन, स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (Delhi-Amritsar Swarna Shatabdi Express) के मालिक बनने के बाद सुर्खियों में आ गए थे. इसका किस्सा बेहद दिलचस्प है. दरअसल साल 2007 में रेलवे ने किसानों की जमीन को 25 लाख रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहीत किया था. मामला तब उलझ गया, जब पास के ही गांव में इतनी ही ज़मीन 71 लाख रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहीत की गई थी. अब संपूर्ण सिंह के गले से ये मामला नहीं उतरा और वे कोर्ट पहुंच गए. कोर्ट ने अपने पहले आदेश में मुआवज़े की रकम 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख कर दी और फिर उसे भी बढ़ाकर 1.47 करोड़ बना दी.

संपूर्ण सिंह को मिला ट्रेन का मालिकाना हक
साल 2012 में दायर याचिका के निर्णय में साल 2015 तक रेलवे को भुगतान का आदेश दिया गया था. जब रेलवे ने 42 लाख रुपये देने के बाद 1.05 करोड़ रुपये नहीं चुकाए, तो साल 2017 में जिला और सत्र न्यायाधीश जसपाल वर्मा ने लुधियाना स्टेशन पर ट्रेन को कुर्क करने का आदेश दे दिया. वकीलों के साथ संपूर्ण सिंह स्टेशन पर पहुंचे और ट्रेन की कुर्की के बाद वे उसके मालिक बन चुके थे. ये इतिहास में पहली बार था, जब कोई ट्रेन का मालिक बन गया हो. हालांकि 5 मिनट के भीतर ही सेक्शन इंजीनियर ने कोर्ट के अधिकारी के ज़रिये ट्रेन को मुक्त करा लिया क्योंकि इससे यात्रियों को परेशानी हो जाती. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये मामला आज तक कोर्ट में विचाराधीन है और किसान को ट्रेन से होने वाली कमाई मिलती है.

homeajab-gajab

किसान के पास थी खुद की ट्रेन, रेलवे की एक गलती से हुआ कांड, मचा तहलका!

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *