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खाना बनाना, घर का काम करना, लेकिन हर महीने कमाई हजारों में…ये महिलाएं मिसाल हैं!

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Women success tales: मुर्शिदाबाद के एक छोटे से गांव की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बना रही हैं. उनके संघर्ष और सफलता की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करने वाली है.

खाना बनाना, घर का काम करना, साथ ही कमाई हजारों में...ये महिलाएं मिसाल हैं!

मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर ब्लॉक के सिज़ग्राम पंचायत के पल्लीश्री गांव की महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. यहां की करीब 95% महिलाएं घर के कामकाज संभालने के साथ-साथ हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं. उनकी मेहनत ने न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया है, बल्कि समाज में भी एक मिसाल कायम की है.

सर्दियों के कपड़े बनाकर बनाई पहचान
पल्लीश्री गांव की महिलाएं साल भर बालापोश नामक सर्दियों के कपड़े बनाती हैं. ये कोट न केवल स्थानीय गांवों बल्कि शहरों तक पहुंचते हैं. सर्दियों के चार महीनों में तो इन महिलाओं को सांस लेने तक का वक्त नहीं मिलता. उनके बनाए कपड़े बीरभूम और मालदह जैसे इलाकों में भी निर्यात किए जाते हैं. बालापोश बनाना अब गांव का कुटीर उद्योग बन गया है.

मेहनत से बदलती तकदीर
गांव की अनिमा सरकार बताती हैं कि वह पिछले 12-13 साल से बालापोश बना रही हैं. पहले उन्हें प्रति बालापोश 40-50 रुपये मिलते थे, जो अब बढ़कर 80 रुपये हो गए हैं. अनिमा रोज़ाना तीन बालापोश बनाती हैं और कुछ पैसे बचाकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का सपना देख रही हैं. इसी तरह, गांव की अन्य महिलाओं की भी यही कहानी है, जो छोटे-छोटे कदमों से बड़े सपने देख रही हैं.

आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ते कदम
गांव के करीब 700 में से 650 महिलाएं बालापोश बनाने के काम में लगी हैं. एक महिला महीने में 7000 रुपये तक कमा रही है. बिजनेसमैन श्रीवास सरकार ने बताया कि हर बालापोश 300 से 600 रुपये में बिकता है. इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी इज़ाफा हुआ है.

बालापोश: पुराने साड़ियों का नया रूप
बालापोश दो पुरानी रेशम साड़ियों को जोड़कर बनाया जाता है. इसमें अंदर रेशमी रुई डाली जाती है और ऊपर से कंथा की तरह सिलाई की जाती है. यह प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार का एक स्थायी स्रोत भी बन गई है.

पंचायत का समर्थन और गर्व
सिज़ग्राम पंचायत की मुखिया रसमीना बेगम ने इन महिलाओं की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना की. उन्होंने कहा, “पल्लीश्री की महिलाएं अपनी मेहनत से कमाई के नए रास्ते दिखा रही हैं. उनकी यह पहल दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा बन सकती है.”

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