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चीन के सिचुआन प्रांत के चेंगडू के पास संक्सिंगडुई खुदाई में मजदूरों को एक ऐसी चीज मिली, जिसने इतिहास ही बदल दिया. अचानक ही एक ऐसी सभ्यता सामने आ गई, जो हजारों सालों से दुनिया की नजर से दूर थी.
ऐसी सभ्यता जो किताबों से रही गायब (इमेज- फाइल फोटो) चीन का सिचुआन प्रांत अपने हरे-भरे पहाड़ों और नदियों के कारण जाना जाता है. चेंगडू शहर में सबकुछ सामान्य था. लेकिन 1986 में कुछ ऐसा हुआ, जिसने सबकुछ बदल दिया. यहां मजदूर नदी किनारे खुदाई कर रहे थे. अचानक मिट्टी से टन की आवाज आई, जैसे कोई धातु से कुल्हाड़ी टकरा रहा हो. उत्सुक होकर जब मिट्टी हटाई गई तो सबका कलेजा धक से रह गया.
खुदाई में बाहर निकला कांस्य का मास्क. इस मास्क की बड़ी-बड़ी उभरी हुई आंखें थी. नुकीले कान थे और चौड़ा मुंह था. ऐसा लग रहा था मानो एलियन की आंख झांक रही हो. मजदूरों ने भागकर आर्कियोलॉजिस्ट्स को बुलाया. आसपास कप इलाके की जब खुदाई शुरू हुई तो जो मिला उसने इतिहास ही बदल दिया. ये जगह थी संक्सिंगडुई (Three Star Mound) यानी प्राचीन शू किंगडम की राजधानी.
छिपी थी प्राचीन सभ्यता
इस खुदाई में 200 से ज्यादा जेड हथियार, 60 से ज्यादा हाथी के दांत, जलाए हुए जानवरों की हड्डियां और सबसे सनसनीखेज– दर्जनों बड़े ब्रॉन्ज मास्क और हेड्स मिले. ये मास्क इतने अजीब थे कि स्कॉलर्स ने इन्हें “दुनिया का नौवां अजूबा” कह डाला. इसमें सबसे बड़ा मास्क 1.32 मीटर चौड़ा और 0.72 मीटर ऊंचा था. इस मास्क को इंसान पहन ही नहीं सकता था. इसमें उभरी हुई आंखें (protruding eyes) 16.5 सेंटीमीटर बाहर, त्रिकोणाकार पुतलियां और पंख जैसे कान थे. ये मास्क एलियन या सुपरनैचुरल लगते थे, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर मीम्स वायरल हुए – “क्या एलियंस यहां उतरे थे?” लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं, ये प्राचीन शू लोगों के धार्मिक प्रतीक थे. मास्कों को लकड़ी के टोटेम पर चढ़ाया जाता था, शायद मृतकों या देवताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए. कुछ पर गोल्ड फॉयल चढ़ा था जो 84% सोने से बना था. इसका वजन 280 ग्राम था. कुल मिलाकर, आठ गड्ढों से 13,000 से ज्यादा आर्टिफैक्ट्स निकले थे.
रहस्यमई बन गई खोज
इस खुदाई में ब्रॉन्ज ट्री ऑफ लाइफ (4 मीटर ऊंचा), सांप-ड्रैगन आकृतियां, जेड ब्लेड्स, और सिल्क के निशान मिले. सब कुछ टूटा-फूटा और जला हुआ था मानो रस्म के तौर पर इसकी बलि दी गई हो. कार्बन डेटिंग से पता चला कि ये 1600-1046 ईसा पूर्व के हैं, यानी 3,000-3,600 साल पुराने. शू किंगडम येलो रिवर वैली (चाइनीज सिविलाइजेशन का क्रेडल) से अलग था. इसका कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं था लेकिन ब्रॉन्ज कास्टिंग टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस थी कि शियान की टेराकोटा आर्मी से बेहतर थी. 2020-2022 में नई खुदाई से छह और गड्ढे मिले जिसमें 500+ रेलिक्स मिले. गोल्ड मास्क के टुकड़े, आइवरी कार्विंग्स, ब्रॉन्ज एनिमल्स ने सबको हैरान कर दिया. एक हाइब्रिड टाइगर-ड्रैगन फिगर मिला जिसके ऊपर काला पेंट था. लेकिन रहस्य बरकरार रहा कि शू किंगडम अचानक गायब क्यों हो गया? 800 ईसा पूर्व तक ये शहर फला-फूला, फिर जिंशा साइट (चेंगडू में) शिफ्ट हो गया. वजह शायद बाढ़ या युद्ध रही होगी. इस खोज ने चाइनीज हिस्ट्री री-राइट कर दी. पहले लगता था सिविलाइजेशन सिर्फ येलो रिवर पर था, लेकिन संक्सिंगडुई ने दिखाया कि यांगत्ज़े वैली भी बराबर एडवांस थी. अब ये जगह यूनेस्को टेंटेटिव लिस्ट में है. सारे खोज को म्यूजियम में रखा गया है जहां लाखों विजिटर्स आते हैं.
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