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गुजरात के छात्रों ने बना डाला ऐसा रोबोट, सिर्फ उंगली के इशारे से चलता है! जीते 5 लाख

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Agency:Local18

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Gujarat News: अहमदाबाद साइंस सिटी में राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित रोबोटिक्स प्रतियोगिता ‘गुजरात रोबोफेस्ट’ का ग्रैंड फिनाले आयोजित हुआ. इसमें जामनगर के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों ने रोबोट…और पढ़ें

छात्रों ने बना डाला ऐसा रोबोट, सिर्फ उंगली के इशारे से चलता है! जीते 5 लाख

जामनगर के छात्रों का रोबोट, हाथ के इशारे से करेगा काम

हाइलाइट्स

  • जामनगर के छात्रों ने उंगली के इशारे से चलने वाला रोबोट बनाया.
  • गुजरात रोबोफेस्ट में रोबोट ने 5 लाख रुपये का इनाम जीता.
  • रोबोट को पाटन म्यूजियम में रखा गया है.

जामनगर: अब रोबोट को कंट्रोल करने के लिए न तो कोई कॉम्प्लेक्स कोड चाहिए, न ही हाई-फाई तकनीक… बस अपनी उंगली हिलाइए और काम हो जाएगा. जी हां, जामनगर के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के कुछ होनहार छात्रों ने ऐसा ही रोबोट तैयार किया है. इस रोबोट को सिर्फ हाथ के इशारे से चलाया जा सकता है और इस अनोखी खोज के लिए इन छात्रों ने गुजरात रोबोफेस्ट में धमाल मचाते हुए 5 लाख रुपये का इनाम भी जीत लिया.

दअरसल, जामनगर के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों ने एक और अनोखी उपलब्धि हासिल की है. कॉलेज के छात्रों ने एक उंगली के इशारे से नाचने वाला रोबोट बनाया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. 45 दिनों की इस मेहनत के बाद काम की सराहना करते हुए 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया है.

राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है
बता दें कि जामनगर के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के आशुतोष भट्ट ने बताया कि हाल ही में अहमदाबाद साइंस सिटी में राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित रोबोटिक्स प्रतियोगिता ‘गुजरात रोबोफेस्ट’ का ग्रैंड फिनाले आयोजित हुआ था. इस प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न राज्यों से 100 टीमों ने भाग लिया था. पूरे भारत की आईआईटी, नीट और अन्य इंजीनियरिंग संस्थानों की कुल 100 टीमों के छात्रों ने अपनी अनोखी कृतियों (Unique creations) को प्रस्तुत किया था. जिसमें जामनगर सरकारी पॉलिटेक्निक के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग के छह छात्रों की टीम ने ‘एप्लिकेशन बेस्ड रोबोट’ केटेगरी में अपना रोबोट प्रस्तुत किया था. जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है.

पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र जिगर भेड़ा ने बताया कि, “हमारे रोबोट को तीसरा स्थान मिला है. हमने 45 दिनों तक मकर संक्रांति और रविवार की छुट्टियों का आनंद लिए बिना लगातार मेहनत की और 45 दिनों की मेहनत के बाद रोबोट तैयार हुआ. रोबोटिक आर्म हैंड जेस्चर कंट्रोल से बनाया है, यानी हाथ की उंगली पर काम करने वाला रोबोट तैयार किया है. जो हाथ और कंधे के इशारों को समझकर काम करता है.”

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उन्होंने आगे कहा, “हमें इंडस्ट्रियल विजिट के दौरान इस प्रकार का रोबोट बनाने का विचार आया था क्योंकि इंडस्ट्रियल एरिया में रोबोट की आवश्यकता होती है. मूविंग बेस रोबोट की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का रोबोट तैयार किया गया है, जो 1.5 किमी तक की रेंज रखता है. यह रोबोट वेयरहाउस के अलावा इंडस्ट्रियल एरिया और डिफेंस में, जहां मानव के लिए जाना संवेदनशील होता है, वहां पहुंचकर व्यवस्थित काम कर सकता है. इस रोबोट को फिलहाल पाटन म्यूजियम में रखा गया है और रोबोट की उपलब्धि के लिए हमें पांच लाख रुपये का इनाम भी दिया गया है.”

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