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गुजरात: मोबाइल गेमिंग की लत से मानसिक बीमार युवक का चौंकाने वाला मामला

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वेरावल रेलवे स्टेशन पर यह युवक यूं ही इधर-उधर घूमता पाया गया. उसका हाल-हुलिया भिखारियों जैसा लग रहा था. कुछ लोगों को उसे देखकर तरस आ गया. हालांकि उस युवक की सच्चाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे…

रेलवे स्टेशन पर घूमता था युवक, दिखने में लगता था भिखारी, सच जानकर लोग हैरान

रेलवे स्टेशन पर पागलों की तरह घूमते पाए गए इस शख्स की सच्चाई जानकर आप भी चौंक जाएंगे. (प्रतीकात्मक- AI)

हाइलाइट्स

  • वेरावल स्टेशन पर युवक भिखारी जैसा दिखा.
  • युवक की पहचान मोरबी जिले के निवासी के रूप में हुई.
  • लोगों को जब उसकी सच्चाई पता चली तो सब हैरान रह गए.

गुजरात के गिर सोमनाथ स्थित वेरावल रेलवे स्टेशन पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां रेलवे स्टेशन पर एक युवक यूं ही इधर उधर घूमता पाया गया. उसका हाल-हुलिया बेहद खराब और दिखने में भिखारी जैसा लग रहा था. कुछ लोगों को उसे देखकर तरस आ गया. वे उसके पास पहुंच और उसका हाल-चाल जाना. उस युवक के बारे में फिर उन्हें जो पता चला उसे जानकर हैरान रह गए.

यह युवक गुजरात के ही मोरबी जिले का रहने वाला था. वहां उसकी पत्नि और दो बच्चे भी हैं. इस शख्स को मोबाइल गेम्स खेलने की लत लग गई है. उसकी यह लत इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई कि वह मानसिक रूप से बीमार हो गया. मानसिक बीमारी से ग्रस्त यह युवक तीन महीने पहले एक ट्रेन में चढ़ गया था, जिसके बाद युवक ट्रेन के आखिरी स्टेशन गिर सोमनाथ के वेरावल जा पहुंचा.

रेलवे स्टेशन पर कई दिनों तक युवक की हरकतों को देख रहे कुछ स्थानीय लोगों ने उसे बेसहारा समझकर वहां नजदीक के एक आश्रम में भेज दिया. उधर, इस बात से अनजान युवक के परिजनों ने उसे ढूंढने का काफी प्रयास किया, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

आश्रम में कुछ दिन मोबाइल गेमिंग से दूर रहने और शांत वातावरण में रहने के कारण युवक की मानसिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा. जब आश्रम प्रबंधन ने उसकी पहचान की जांच शुरू की, तब यह सामने आया कि वह मोरबी जिले का निवासी है और दो बच्चों का पिता है. फिर आश्रम प्रशासन ने युवक के परिवार से संपर्क किया और आखिरकार लगभग 100 दिनों के बाद वह अपने परिजनों से दोबारा मिल सका.

यह मामला मोबाइल गेमिंग की लत के खतरनाक मानसिक प्रभावों को उजागर करता है. अत्यधिक गेमिंग से व्यक्ति वास्तविक दुनिया से कटकर मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकता है. इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि परिवार और समाज को सतर्क रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डिजिटल डिटॉक्स (मोबाइल से दूरी) को अपनाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.

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