[ad_1]
तकनीक की दुनिया पल-पल बदलती है. हर कंपनी के सामने कभी न कभी ऐसा संकट खड़ा हो जाता है कि उसे अपने काम को लेकर सोचना पड़ता है. जिसे तक तक खूब पसंद किया जा रहा था और माना जा रहा था कि वह कंपनी किंग है, उसी के काम को लेकर खतरे की घंटी बजने लगती है. गूगल के लिए भी ऐसा ही समय आया था. 2022 में एक चैटबॉट पूरी दुनिया पर छा गया, जिसका नाम था चैट जीपीटी (ChatGPT). आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ऐसा तूफ़ान आया कि गूगल पीछे छूटता दिखा. इसे कंपनी के अंदर ‘कोड रेड’ (Code Red) माना गया, यानी सबसे बड़ा खतरा.
लेकिन अगर आज की बात करें, तो कहानी बिल्कुल पलट चुकी है. महज़ तीन साल बाद, अब चैट जीपीटी को बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) घबरा रही है. उनके सीईओ, सैम ऑल्टमैन (Sam Altman), ने ख़ुद ‘कोड रेड’ जारी कर दिया है. सवाल ये है कि ऐसा क्या हुआ, और कैसे गूगल ने ओपनएआई से बाजी मार ली?
साल 2022 में ओपनएआई ने जब चैट जीपीटी लॉन्च किया था, तो उसने तहलका मचा दिया. आज 3 साल हो चुके हैं, 800 मिलियन वीकली यूज़र्स हैं और कंपनी का वैल्यूएशन लगभग आधा ट्रिलियन डॉलर है. पर जब आप टॉप पर होते हैं, तो आपको हवा का रुख़ दूसरों से पहले महसूस होने लगता है. और वो नया रुख़ आया गूगल के नए AI मॉडल जेमिनी 3 (Gemini 3) के रूप में.
ये मॉडल बहुत ताकतवर और एडवांस है. कई टेस्ट में तो इसने टॉप पोज़िशन हासिल कर ली है. यहां तक कि जो लोग ‘चैट जीपीटी’ के पक्के फैन थे, वो भी अब गूगल के पाले में आ गए हैं. इसका एक उदाहरण देखिए, सेल्सफ़ोर्स (Salesforce) के सीईओ मार्क बेनीऑफ़ (Marc Benioff) ने एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने 3 साल तक ‘चैट जीपीटी’ इस्तेमाल किया, लेकिन ‘जेमिनी 3’ पर महज़ दो घंटे बिताने के बाद अब पीछे मुड़कर नहीं देखा जा सकता.
OpenAI में कोड रेड का मेमो
ओपनएआई के अंदर ये बात का बहुत जोर से शोर हुआ. खबरें हैं कि सैम ऑल्टमैन ने तुरंत ‘कोड रेड’ का मेमो भेजा. ‘कोड रेड’ का मतलब है कि सब कुछ छोड़कर इसी काम में लग जाओ. बाकी सबकुछ इंतजार कर सकता है, अभी के अभी ‘चैट जीपीटी’ को ठीक करो.
सैम ऑल्टमैन ने अपनी टीम को साफ-साफ कहा है कि विज्ञापन, शॉपिंग और हेल्थ एजेंट जैसे सभी नए प्रोजेक्ट को अभी रोक दिया जाए. पर्सनल असिस्टेंट पर भी काम बंद कर दिया जाए. पूरा फोकस सिर्फ़ ‘चैट जीपीटी’ की स्पीड, विश्वसनीयता, पर्सनलाइज़ेशन और सवालों के जवाब देने की क्षमता पर होना चाहिए. मेमो के मुताबिक, ‘चैटबॉट’ को बेहतर बनाने वाले लोगों के साथ रोजाना कॉल होगी. सैम ऑल्टमैन ने तो टीम को बदलने (temporary transfer) तक के लिए बढ़ावा दिया, ताकि ऐप डेवलपमेंट तेज़ी से हो सके.
नंबर-1 पर रहना भी बन जाता है अभिशाप!
यहां नंबर वन होना एक अजीब-सी बात है. AI की इस रेस में आगे रहना एक तरह का अभिशाप है, जिस पर जीत का पर्दा पड़ा है. जब आप लीडर होते हैं, तो आपके हर अपडेट पर नुक्ताचीनी होती है. थोड़ी-सी रफ्तार धीमी होती है, तो सजा मिलती है. हर नए कॉम्पिटिटर की तुलना आपसे होती है, और हर कोई आपसे हमेशा आगे रहने की उम्मीद करता है.
ऐसे में, ओपनएआई की सबसे बड़ी ताक़त, यानी उसकी रफ़्तार, अचानक उसकी कमजोरी बन गई है.
ओपनएआई बहुत बड़ी कंपनी है, पर वो गूगल जितनी बड़ी नहीं है. इस साल ओपनएआई का रेवेन्यू 20 बिलियन डॉलर रहा, लेकिन इसके बावजूद कंपनी मुनाफ़े में नहीं है, बल्कि अभी दूर है. जानते हैं क्यों? क्योंकि उनका ख़र्चा बहुत ज़्यादा है. उन्होंने अगले 8 सालों में 1.4 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का वादा किया है. और ये तब एक बड़ी समस्या बन जाती है, जब आपका वैल्यूएशन $500 बिलियन हो, और दुनिया को अचानक लगने लगे कि अब आप नंबर वन नहीं रहे. तब सवाल ये आता है कि क्या इन्वेस्टर्स अगला चेक देंगे? ओपनएआई के लिए ‘कोड रेड’ सिर्फ़ AI मॉडल का नहीं है, बल्कि उनके पूरे बिज़नेस का है.
गूगल ने जेमिनी के साथ किया ‘स्ट्राइक बैक’
वहीं दूसरी ओर गूगल को देखिए. अगर ये कोई फ़िल्म होती, तो गूगल के इस हिस्से को ‘द एम्पायर स्ट्राइक्स बैक’ कहा जाता. गूगल ने जब अपना पहला AI मॉडल ‘बार्ड’ (Bard) लॉन्च किया था, तो वो बहुत खराब था, शर्मिंदा करने वाला. इसलिए कंपनी ने एक साल का समय लिया, उसे पूरी तरह से दोबारा बनाया और बार्ड ‘जेमिनी’ बनकर आया.
और जब ‘जेमिनी 3’ आया, तो वो सिर्फ़ एक मॉडल नहीं था. वो पूरे इकोसिस्टम का अपडेट था. इसमें इमेज जनरेशन थी जो ओपनएआई के ‘सोरा’ (Sora) को टक्कर देती है, वीडियो अंडरस्टैंडिंग थी, जिसने पुराने मॉडल्स को सिर झुकाने को मजबरू कर दिया, और इसे एंड्रॉयड, सर्च, जीमेल और डॉक्स के साथ जोड़ दिया गया. इसमें इमेजेज़ के लिए ‘नैनो बनाना’ था, डेवलपर्स को मुफ़्त एक्सेस, कम खर्च पर कंप्यूटिंग और लॉन्च के दिन कोई तकनीकी रुकावट नहीं आई. ये AI की दुनिया का एक परफ़ेक्ट लॉन्च था.
गूगल को फंडिंग की चिंता नहीं है. वो हर तिमाही में अरबों डॉलर कमाती है. यही वजह है कि ओपनएआई डरी हुई है. इसलिए नहीं कि गूगल बेहतर है, बल्कि इसलिए कि गूगल इंतज़ार कर सकता है और अपने हिसाब से ओपनएआई को कुचल सकता है.
[ad_2]
Source link