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घर से छोटा-सा काम शुरू करना हो तो अगरबत्ती बनाना सबसे आसान और फायदेमंद काम माना जाता है. इसमें न ज्यादा निवेश लगता है और न बड़ा सेटअप चाहिए. मशीन लगते ही काम शुरू हो जाता है और इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. इसलिए लोग इसे भरोसेमंद घरेलू कमाई का तरीका मानते हैं.

घर पर अगरबत्ती का बिजनेस आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसकी मशीन की कीमत ज्यादा नहीं होती, बेसिक मॉडल 10–15 हजार रुपए में मिल जाता है. इसे चलाने के लिए न ज्यादा जगह चाहिए और न ही भारी बिजली खर्च. बस दो प्लग की सपोर्ट मिल जाए तो काम आराम से चल जाता है. मशीन की सेटिंग भी आसान रहती है, बस पाउडर सही डालना होता है और स्पीड को जरूरत के हिसाब से सेट कर देना होता है.

अगर आपके पास रोज़ सिर्फ तीन से चार घंटे का समय भी है, तो यह काम आराम से किया जा सकता है. मशीन तेज़ी से चलती है, इसलिए कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन हो जाता है. सुबह या शाम, जिसके पास थोड़ा खाली समय होता है, वह इस काम को आसानी से फिट कर सकता है. यही वजह है कि कई महिलाएं और युवा इसे पार्ट-टाइम के तौर पर अपनाते हैं.

अगरबत्ती का पाउडर तैयार करना भी एकदम सीधी प्रक्रिया है. लकड़ी का बुरादा, खुशबू का मिश्रण और कोयला पाउडर बराबर मात्रा में मिलाया जाता है. फिर पानी डालकर हल्की-सी गीली मिट्टी जैसी लोई बना ली जाती है. अगर पानी ज्यादा हो जाए तो मशीन ठीक से नहीं चलती, इसलिए मिश्रण को थोड़ा सख्त रखना पड़ता है. अच्छी क्वालिटी का पाउडर अगरबत्ती को मजबूत बनाता है.
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याद रखें कि ताजा बनी अगरबत्ती को तुरंत पैक नहीं किया जाता. इन्हें 4–6 घंटे किसी खुली और सूखी जगह पर फैलाकर रखना होता है. यदि धूप बहुत तेज़ हो, तो रंग उड़ सकता है, इसलिए हल्की धूप या छांव में सुखाना बेहतर है. जो लोग तेज़ प्रोडक्शन करते हैं, वे घर में एक छोटा-सा सुखाने वाला रैक भी बना लेते हैं. अच्छी तरह सूखना जरूरी है, वरना टूटने की संभावना रहती है.

अगरबत्तियों की सुगंध ही उनकी पहचान होती है. सूखने के बाद इन्हें अलग ट्रे में रखकर खुशबू का स्प्रे किया जाता है. कुछ लोग इसमें गुलाब, चंदन, मोगरा या पारंपरिक फ्लोरल मिक्स का इस्तेमाल करते हैं. ध्यान रखें कि स्प्रे हल्का-सा हो, वरना अगरबत्तियां गीली पड़ जाती हैं. अच्छी खुशबू वाला प्रोडक्ट तुरंत ग्राहकों में लोकप्रिय बन जाता है.

अगरबत्ती की पैकिंग जितनी साफ-सुथरी होगी, उतना भरोसा बढ़ेगा। छोटे 10–20 स्टिक वाले पैक ज्यादा चलते हैं. पैकिंग के दौरान टूटे हुए टुकड़े निकाल देना चाहिए, क्योंकि खरीदार पहली नज़र में पैक देखकर ही निर्णय लेता है. लोकल प्रिंट वाली सिंपल पॉलिथीन भी ठीक चल जाती है, बस उस पर खुशबू और मात्रा जरूर लिखें. यही छोटा-सा कदम बिक्री बढ़ा देता है.

पूरे साल चलने वाली सुगंधों में चंदन, मोगरा, गुलाब और लवेंडर टॉप पर रहती हैं. त्योहारों के समय खास फ्रेगरेंस जैसे कस्तूरी और हवन-सुगंध ज्यादा चलने लगती हैं. दुकानदार अक्सर उन्हीं खुशबुओं की मांग करते हैं जिनकी बिक्री उनकी दुकानों पर तेज़ रहती है. अगर कोई नया व्यक्ति शुरुआत कर रहा है, तो इन 4–5 खुशबुओं से काम शुरू करना सबसे सुरक्षित रहता है.

अगरबत्ती के काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश बहुत कम लगता है. एक बार मशीन, पाउडर और पैकिंग का सेटअप हो जाए तो रोज़ का खर्च बहुत ही मामूली रहता है. लगातार डिमांड होने के कारण किसी भी मौसम में प्रोडक्शन बंद नहीं होता. इसी वजह से कई लोग इसे घर बैठे नियमित कमाई के तौर पर अपनाते हैं और महीने में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं.
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