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जॉय मुखर्जी: बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो की कहानी

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Agency:News18India.com

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जॉय मुखर्जी ने 1960 में ‘लव इन शिमला’ से डेब्यू किया, लेकिन फिल्म फ्लॉप रही. 1963 में ‘फिर वोही दिल लाया हूं’ सुपरहिट हुई. प्रोड्यूसर बनने के बाद आर्थिक समस्याएं आईं. 1960 के दशक के शुरुआत साल में उन्होंने शम्म…और पढ़ें

बनना चाहता था रेसलर, पॉकेट मनी डबल के लालच में बॉलीवुड का टॉप एक्टर

(शम्मी कपूर को टक्कर देने वाला स्टार.)

मुंबई. बॉलीवुड में कई ऐसे हैंडसम और स्मार्ट एक्टर हुए, जो एक-दो फिल्मों तक सीमित हो गए. उनकी पहली-दूसरी ही फिल्में चलीं और फ्लॉप हुए, तो प्रोडक्शन या किसी अन्य काम में लग गए. यहां हम आपको एक हीरो के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने शशि कपूर, शम्मी कपूर और सुनीत दत्त जैसे टॉप कलाकारों को पछाड़ दिया था. बॉलीवुड के सबसे हैंडसम और चॉकलेटी हीरो के रूप में उनकी इमेज बनी. आज उनके बर्थ एनिवर्सरी है. अगर सबकु ठीक रहता, तो जॉय मुखर्जी बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार भी होते.

जॉय मुखर्जी ने साल 1960 में बॉलीवुड फिल्म ‘लव इन शिमला’ से डेब्यू किया. फिल्म फ्लॉप हुई, लेकिन उनकी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस को देख कई लोगों ने उनकी सराहना की. डीडी रंगोली के मुताबिक, जॉय स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही खेलकूद में अव्वल थे. पढ़ने पर ज्यादा जोर नहीं था. कॉलेज के दिनों से ही वह रेसलर यानी पहलवान बनना चाहते थे.

जॉय मुखर्जी की हाइट 6.2 थी

जॉय मुखर्जी 6.2 फुट के थे. कुल मिलाकर उनकी कद-काठी सब अच्छा था. वहीं, उनके पिता सशाधर मुखर्जी अपनी फिल्म के लिए शम्मी कपूर जैसे बड़े हीरो को कास्ट करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. फिर उन्होंने बेटे यानी जॉय से उस फिल्म में काम करने के लिए कहा. लेकिन जॉय ने उन्हें मना कर दिया. फिर पिता ने जॉय को पॉकेट मनी डबल करने का लालच दिया. जॉय ने खुशी-खुशी ये काम कर लिया.

‘हमसाया’ से बुरी तरह डूबा करियर-पैसा

जॉय मुखर्जी ने ‘लव इन शिमला’ से डेब्यू किया. उनके अपॉजिट साधना थीं. फिल्म फ्लॉप हुई. लेकिन जॉय को सराहा गया, तो उन्होंने और फिल्में कीं. साल 1963 में आई ‘फिर वोही दिल लाया हूं’ सुपरहिट हुई. इसके बाद आई उकी तीन और फिल्में फ्लॉप हुईं. ‘लव इन टोक्यो’ हिट हुई. साल 1968 में उन्होंने ‘हमसाया’ से बतौर प्रोड्यूसर काम करना शुरू किया. यह फिल्म फ्लॉप हुई, तो वह आर्थिक तौर पर कमजोर हो गए.

फिल्म के चक्कर में सबकुछ बेचा

जॉय मुखर्जी फिर हीरो के तौर पर ही काम करना जारी रखा. लेकिन फिल्म नहीं चल सकीं. जॉय ने फिर ‘लव इन बॉम्बे’ को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया. इसके लिए उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी तक गिरवी रख दी. लेकिन फिल्म रिलीज नहीं हो सकी. साल 1977 में आई फिल्म छैला बाबू ने उन्होंने विलेन का रोल निभाया. यह फिल्म हिट हुई. इसे उन्होंने डायरेक्ट भी किया था. इसके बाद उन्होंने 1985 में आई फिल्म इंसाफ मैं करूंगा में भी विलेन का रोल निभाय. फिल्म फ्लॉप रही. इसके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली. 9 मार्च 2012 में उनका निधन हुआ था.

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