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तेंदुआ या बाघ नहीं, इस जानवर से परेशान हैं खंडवा के लोग; हर महीने 30 से ज्यादा लोग हो रहे हैं घायल!

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Khandwa News : खंडवा में कुछ आवारा जानवरों के हमले ने लोगों को परेशान कर दिया है. हर महीने 30 से 35 लोग इनके पंजों या काटने से घायल हो रहे हैं. डॉक्टरों ने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज उपलब्ध है. जानें क्या…और पढ़ें

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सांकेतिक

सांकेतिक तस्वीर

खंडवा. खंडवा में अब तक आपने शहर में आवारा कुत्तों और चौराहे पर बैठे गोवंश से होने वाली दिक्कतों के मामले ही सुने होंगे.  लेकिन इसी बीच एक और रोचक मामला सामने आया है. अब गोवंश या कुत्तों से नहीं, जनता बिल्लियों से परेशान है. कुछ जगहों पर बिल्लियों का इतना आतंक है कि लोग बिल्लियों के नाम से ही कतराने लगे हैं. दरअसल, शहर में कई लोगो पर बिल्लियों ने अपने पंजों से हमला किया है.

रात के समय में लोग डर के मारे कहीं आने-जाने से भी कतरा रहे हैं. कई लोगो ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए प्रत्यक्ष के अनुभव साझा किए हैं. लोगो का कहना है कि बिल्लियों के हमले के कारण शरीर पर कई बार गहरे घाव भी बन जाते हैं. इतना ही नहीं बच्चों को लेकर भी फिक्र होती है कि कही बिल्ली बच्चों पर हमला न कर दे.

30 से 35 लोगों को हर महीने कर रही घायल
बिल्लियों के हुए हमले को लेकर डॉक्टर योगेश शर्मा ने डेटा भी बताया है. उन्होंने कहा कि प्रतिमाह बिल्लियों के 25 से 30 बाइट के केस आते हैं. हालांकि, इसमें हरसूद के डाटा शामिल नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने बिल्ली की बाइट के बचाव का तरीका भी बताया है. उन्होंने कहा की सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला चिकित्सालय में इसका इलाज़ उपलब्ध है. इलाज़ के दौरान ARV लगाई जाती है. यह सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दिया गया है. इसके साथ ही अलग-अलग केटेगिरी के हिसाब से उपचार होता है. इसमें अगर ज़्यादा ब्लीडिंग होती है, तो यह केटेगिरी 3 बाइट की श्रेणी में आता है. इसके अंतर्गत हीमोग्लोबिनिंग देने की व्यवस्था भी हर स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध कराया जाता है.

इन परिस्थितियों में करती हैं हमला
बिल्लियाँ कभी भी आक्रामक हो सकती हैं और अपने मालिकों या अन्य लोगों पर हमला कर सकती हैं. ऐसा कई कारणों से हो सकता है. इसके साथ ही अगर बिल्ली को खतरा महसूस होता है या वह घिरी हुई है, तो भी हमला कर सकती है, क्योंकि वह खुद को बचाने की कोशिश करती है.

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