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थम गईं सांसें, धड़कने लगे दिल! जल्लीकट्टू में इस ‘बाहुबली’ ने दिखाया ऐसा दम कि हिल गया मैदान!

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Agency:Local18

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Alanganallur Jallikattu: मदुरै में हुए अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में सेलम जिले के बाहुबली कलाई ने पहला स्थान जीता. इस जीत के पीछे की मेहनत के बारे में कलाईयर मोहन ने बताया.

थम गईं सांसें, धड़कने लगे दिल! इस 'बाहुबली' ने दिखाया ऐसा दम कि हिल गया मैदान!

बाहुबली कलाई ने अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू में पहला स्थान जीता

हाइलाइट्स

  • बाहुबली कलाई ने अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू में पहला स्थान जीता.
  • कलाई को पुरस्कार में ट्रैक्टर मिला.
  • जीत के बाद बाहुबली कलाई का गांव में धूमधाम से स्वागत हुआ.

अलंगानल्लूर: तमिलनाडु के सूरज की किरणें जैसे ही अलंगानल्लूर की मिट्टी पर पड़ीं, माहौल में एक अजीब सी सनसनी दौड़ गई. हजारों लोगों की भीड़, ढोल-नगाड़ों की गूंज, और रोमांच से धड़कते दिल. तभी वाडिवासल के दरवाजे खुले और… धड़ाम. बाहुबली कलाई ने ऐसी छलांग मारी कि सभी की रगों में डर दौड़ गया.

हर कोई सांस थामे देख रहा था—कलाई की ताकत, उसकी भव्यता, उसकी रफ्तार! जैसे ही वह दौड़ा, दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई और आखिरकार, जब परिणाम घोषित हुए, तो बाहुबली कलाई ने पहला स्थान जीत लिया. हां जी, तमिलनाडु के उत्तर में पहली बार हमारे कलाई ने जल्लीकट्टू का ताज अपने सींगों पर सजाया और इनाम? एक शानदार ट्रैक्टर!

बाहुबली कलाई को पहला स्थान दिया गया
बता दें कि इस प्रदर्शन के कारण सेलम के बाहुबली कलाई को पहला स्थान दिया गया. कलाईयर को ट्रैक्टर गिप्ट में दिया गया. जीतने वाले कलाई बाहुबली को उसके गांव में धूमधाम से स्वागत किया गया. बाहुबली कलाईयर ने भावुक होकर कहा, “विश्व प्रसिद्ध अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में मेरे बाहुबली कलाई की जीत से बहुत खुशी हुई. उत्तर तमिलनाडु में पहली बार अलंगानल्लूर जल्लीकट्टू का पुरस्कार जीतने वाला कलाई हमारा बाहुबली है. इसका श्रेय उसकी भव्यता, ताकत और सुंदरता को जाता है. तमिलनाडु में सबसे बेहतरीन शरीर संरचना वाला कलाई हमारा बाहुबली ही है.

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उन्होंने भावुक होकर कहा कि दुनिया भर के जल्लीकट्टू प्रशंसकों ने बाहुबली कलाई की प्रशंसा की. यह हमारी मेहनत का फल है. हर कलाईयर के पीछे कड़ी मेहनत छिपी होती है. जल्लीकट्टू के लिए कलाई को कई तरह की ट्रेनिंग दी जाती है. कलाई स्वाभाविक रूप से जिद्दी होते हैं. जल्लीकट्टू के लिए ट्रेनिंग देने पर उनकी ताकत और बढ़ जाती है. मैंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यहां वाडिवासल जैसे मैदान बनाकर बेहतरीन ट्रेनिंग दी. इस मेहनत का फल ही यह नाम और प्रसिद्धि है.”

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