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दूर के एक ग्रह की स्टडी कर रहे थे साइंस्टिस्ट, ‘प्लास्टिक की बर्फ’ देखकर हुए हैरान!

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वैज्ञानिकों को हाल ही में एक स्टडी में दूर के ग्रह पर बर्फ का नया रूप मिल. इसका अध्ययन करने पर उन्होंने पाया कि यह तो बर्फ की वही खास अवस्था है जिसका उन्होंने 17 साल पहले अनुमान लगाया था. इस बर्फ को “प्लास्टिक …और पढ़ें

दूर के ग्रह में दिखी नई बर्फ, 17 साल पहले अंदाजा हो गया था ‘प्लास्टिक आइस का

वैज्ञानिकों ने 17 साल पहले ही इस तरह की बर्फ के होने के अनुमान लगा लिया था, लेकिन बना नहीं पाए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • वैज्ञानिकों ने एलियन ग्रह पर प्लास्टिक आइस 7 खोजी
  • यह बर्फ चरम हालातों में बनती है
  • 17 साल पहले ही इस बर्फ का अनुमान लगाया गया था

क्या बर्फ भी कई तरह या कई स्वरूप को हो सकती है. अगर साइंटिस्ट्स की मानें तो हां. बिलकुल! हाल ही में एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक एलियन ग्रह पर बर्फ का नया ही रूप देखा है, या कहें कि पानी का नया रूप देखा है. वे इस खोज से हैरान हैं कि दिलचस्प बात ये है कि इस तरह का रूप वे आज तक पृथ्वी पर नहीं देख सके हैं , लेकिन सैद्धांतिक तौर 17 साल पहले ही वे मान चुके थे कि ऐसा रूप हो सकता है. इस खोज को वैज्ञानिक सौरमंडल से बाहर के ग्रहों के हालात समझने के लिए बहुत ही उत्साह बढ़ाने वाली मान रहे हैं. वहीं आम लोग इस नए  स्वरूप से चकित हैं क्योंकि वैज्ञानिक इसे एक तरह की “प्लास्टिक बर्फ 7” बता रहे हैं.

3 से ज्यादा अवस्थाएं
आमतौरपर किसी भी पदार्थ के तीन मूल भौतिक स्वरूप या अवस्थाएं होती हैं. तरल, ठोस और गैसीय! लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके अलावा भी कुछ और भी अवस्थाओं की व्याख्या की है जिनमें प्लाज्मा, या बोस आइंस्टीन अवस्थाएं भी हैं. वहीं कुछ अवस्थाएं तीन मूल अवस्थाओं के बीच की भी होती हैं. इन्हीं से एक प्लास्टिक की स्थिति भी होती है. जिसे आम लोग तरल और ठोस के बीच की अवस्था होती है.

चरम हालातों में पानी
नई खोज यह बताती है कि कैसे पानी बहुत ही चरम हालातों में बर्ताव करता है. इसके अलावा यह भी कि बहुत दूर के ग्रहों और चंद्रमाओं में संरचनाएं कैसी हो सकती हैं. नेचर में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि सामान्य बर्फ के विपरीत प्लास्टिक आइस VII को बनने के लिए बहुत ही चरम तरह के हालात चाहिए होते हैं.

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वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तरह की बर्फ हमारे सौरमंडल में नेप्च्यून जैसे ग्रह पर हो सकती है. (तस्वीर: NASA)

हाइड्रोजन का बर्ताव
इस तरह के की अवस्था के लिए वैज्ञानिक पहले भी फ्रांस में प्रयोग कर चुके हैं जिसमें उन्होंने पानी को वायुमंडलीय दाब से 60 हजार गुना दबाव और 327 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक पहुंचाया था. इस अवस्था में हाइड्रोजन के बर्ताव ने वैज्ञानिकों को उलझा रखा था.

17 साल पहले लगाया था ऐसी बर्फ का अनुमान
हाइड्रोजन के इसी तरह के बर्ताव को पहचान कर वैज्ञानिक प्लास्टिक आइस VII  की मौजूदगी की जान सके. शोधकर्ताओं ने क्वासी-इलास्टिक न्यूट्रॉन स्कैटरींग (QENS) पद्धति से 17 साल पुराने उस अनुमान की पुष्टि की जिसमें वे पानी की इस अवस्था में हाइड्रोन के खास बर्ताव बताया गया था.

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वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तरह की बर्फ हमारे सौरमंडल में नेप्चयून ग्रह, बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा और अन्य बर्फिले पिंडों पर हो सकती है. इस बर्फ के बर्ताव की जानकारी इन पिडों की कई प्रक्रियाओं को समझा सकती है. यहां तक कि साइंटिस्ट अब उम्मीद कर रहे हैं कि वे बर्फ और भी कई अवस्थाओं का पता लगा सकते हैं.

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