[ad_1]
देवेंद्र सेन/कोटा. बूंदी जिले के तालेड़ा क्षेत्र के बाजड़ गांव की सिमरनजीत कौर आज अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं. स्कूल के दिनों में जब उन्हें बोर्ड तक धुंधला दिखाई देता था, तभी दृष्टिबाधा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. इसी चुनौती को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और दृष्टिबाधित क्रिकेट में कदम रखकर देश-दुनिया के मंच पर अपनी पहचान बना ली.
स्कूल में पढ़ाई के दौरान जब सिमरन को बोर्ड स्पष्ट नहीं दिखता था, तो शिक्षक व CABAI के पश्चिम क्षेत्र सचिव इस्लाम अली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बी-2 कैटेगरी में क्रिकेट खेलने का सुझाव दिया. इसके बाद सिमरन ने कुछ ही महीनों में एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में खुद को साबित किया.
वर्ल्ड कप में चमकी प्रतिभा
क्रिकेट फॉर द ब्लाइंड वूमन्स टी-20 वर्ल्ड कप 2025 में सिमरन भारतीय टीम की अहम सदस्य रहीं. एक मुकाबले में उन्होंने मात्र 12 गेंदों में 31 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई. 23 नवंबर को भारत ने फाइनल जीतकर खिताब अपने नाम किया, जिसमें सिमरन का बड़ा योगदान रहा. राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें राजस्थान टीम की कप्तानी सौंपी गई. नागेश ट्रॉफी में उप-कप्तान रहते हुए उन्होंने प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड भी जीता. उनका हर प्रदर्शन यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी सीमा में नहीं बंधती.
परिवार की चिंता अब गर्व में बदली
शुरुआत में माता-पिता बेटी की दृष्टिबाधा और सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, लेकिन आज वही बेटी उनके लिए गर्व का कारण बन चुकी है. पिता गुरपाल सिंह खुद कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और कहते हैं कि बिटिया ने हमारा सिर ऊंचा कर दिया. हालांकि बोर्ड परीक्षा के चलते वे भारत-नेपाल द्विपक्षीय सीरीज में हिस्सा नहीं ले सकीं, लेकिन इससे उनका हौसला नहीं टूटा. उन्होंने अभ्यास जारी रखा और कानपुर में इंटर-स्टेट टूर्नामेंट में राजस्थान को मध्य प्रदेश पर जीत दिलाई.
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी कर चुके हैं सम्मानित
सिमरन कहती हैं कि क्रिकेट से पहले वे अपनी दृष्टिबाधा को लेकर झिझकती थीं, लेकिन खेल ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और जीवन का नया अर्थ दिया. आज वे सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि समाज के लिए बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं. सिमरनजीत कौर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे बूंदी और राजस्थान के लिए गर्व की बात है.
[ad_2]
Source link