Headlines

ना हनी ना मून, फिर क्यों कहलाता है हनीमून? हजारों साल पहले शादी के बाद होती थी खास रस्म!

[ad_1]

Last Updated:

इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है. अब शादी के बाद कपल कुछ दिनों के लिए हनीमून पर चले जाते हैं. लेकिन आपने क्या कभी ये सोचा है कि जब इस दौरान ना शहद का इस्तेमाल होता है ना चांद का, फिर क्यों इसे हनीमून कहा जाता है.

ना हनी ना मून, फिर क्यों कहलाता है हनीमून? हजारों साल पहले होती थी खास रस्म!हनीमून के नाम का इतिहास है बेहद दिलचस्प (इमेज- फाइल फोटो)

हनीमून एक कपल के लिए बेहतरीन फेज होता है. इस दौरान कपल एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझने की कोशिश करता है. घरवालों से दूर और किसी तरह की रिस्पॉन्सिब्लिटी से दूर, कपल एक साथ समय बिताता है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि जब इस दौरान ना तो शहद का इस्तेमाल करने की रस्म है और ना ही इसका चांद से कोई कनेक्शन है, फिर क्यों इस फेज को हनीमून कहा जाता है?

शादियों का सीजन चल रहा है. हर तरफ बैंड-बाजा और बारातियों की चमक-धमक नजर आ रही है. शादी के कुछ दिन बाद नया-नवेला जोड़ा किसी हिल स्टेशन, गोवा या मालदीव की फ्लाइट पकड़ लेता है और चला जाता है “हनीमून” मनाने. लेकिन एक सवाल तो बनता है– हनीमून में हनी (शहद) कहां है? चांद (मून) तो दूर, रात में भी ज्यादातर कपल होटल की लाइट्स बंद करके सो जाते हैं. फिर भी दुनिया भर में इसे हनीमून ही क्यों कहा जाता है?

हजारों साल पुरानी है परंपरा
इसका जवाब बेहद पुराना और थोड़ा डरावना भी है. 5000 साल पहले उत्तरी यूरोप के जनजातीय इलाकों (जैसे जर्मनी, स्कैंडिनेविया) में एक क्रूर रिवाज था – “Bride Kidnapping” यानी दुल्हन को उठा ले जाना. अगर लड़के को लड़की पसंद आ जाती थी और लड़की के घरवाले राजी नहीं होते थे, तो लड़का अपने दोस्तों के साथ दुल्हन को जबरन उठा लेता था. फिर उसे जंगल के किसी गुप्त ठिकाने पर छिपाकर रखा जाता था. शादी की रस्म पूरी होने के बाद असली खेल शुरू होता था. दुल्हन को पूरे एक महीने तक बाहर नहीं निकलने दिया जाता था ताकि उसके घरवाले ढूंढ़ ना पाएं. और इस पूरे महीने में उसे हर रात एक खास ड्रिंक पिलाई जाती थी– शहद से बनी हुई शराब (Honey Mead). मान्यता थी कि शहद में प्रजनन शक्ति बढ़ाने के अफरोडिसिएक गुण होते हैं. जितना ज्यादा शहद मिलाकर शराब पिलाई जाएगी, उतनी जल्दी दुल्हन गर्भवती हो जाएगी और समाज में शादी को मान्यता मिल जाएगी.

फुल मून से जुड़ा है कांसेप्ट
ये एक महीना ठीक वही समय होता था जब एक पूर्णिमा से दूसरी पूर्णिमा तक का चक्र पूरा होता था– यानी एक “मून” (चंद्र मास). इसीलिए इस पूरे पीरियड को “Honey Moon” कहा जाने लगा– शहद वाली शराब + एक पूरा चांद. धीरे-धीरे सभ्यता बढ़ी, दुल्हन उठाने का रिवाज बंद हुआ, लेकिन नाम वही का वही रह गया– हनीमून! एक दूसरी थ्योरी बेबीलोनिया (आज का इराक) से भी आती है. वहां शादी के बाद दुल्हन के पिता पूरे एक चंद्र मास तक दामाद को शहद से बनी शराब मुफ्त में पिलाते थे ताकि दामाद खुश रहे और नई जोड़ी में मिठास बनी रहे. 16वीं सदी तक इंग्लैंड में भी नई शादीशुदा जोड़ियों को “Honey Moon” पीरियड में शहद वाली वाइन गिफ्ट की जाती थी.

About the Author

Sandhya Kumari

न्यूज 18 में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. रीजनल सेक्शन के तहत राज्यों में हो रही उन घटनाओं से आपको रूबरू करवाना मकसद है, जिसे सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि कोई वायरल कंटेंट आपसे छूट ना जाए.

homeajab-gajab

ना हनी ना मून, फिर क्यों कहलाता है हनीमून? हजारों साल पहले होती थी खास रस्म!

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *