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पक्षियों की चहचहाहट और 10 हजार पौधे…किसी जंगल में नहीं, ये एक घर के अंदर है

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Agency:Local18

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Jungle House: पेद्दापल्ली के सैयद आतिफ ने अपने 200 गज के घर को छोटे जंगल में बदल दिया. 10 हजार पौधों से भरे इस घर में पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है. आतिफ खुद जैविक खाद बनाते हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरू…और पढ़ें

पक्षियों की चहचहाहट और 10 हजार पौधे...किसी जंगल में नहीं, ये एक घर के अंदर है

घर के अंदर लगे हैं 10 हजार पौधे

पेद्दापल्ली जिले के अमेरिकन स्ट्रीट में रहने वाले सैयद आतिफ को पेड़-पौधों से बेहद लगाव है. उनका मानना है कि प्रकृति के करीब रहकर ही एक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने 200 गज के घर को एक छोटे जंगल में बदल दिया. बाहर से देखने में उनका घर भले ही आम लगे, लेकिन अंदर कदम रखते ही हरियाली का अनोखा नजारा देखने को मिलता है. छत से लेकर आंगन तक, हर जगह हरियाली ही हरियाली नजर आती है.

10 हजार पौधों से भर गया पूरा घर
आतिफ के घर में लगभग 10 हजार पौधे हैं, जिनमें ऑक्सीजन देने वाले पौधों के अलावा आयुर्वेदिक और औषधीय पौधे भी शामिल हैं. घर के हर कोने में कोई न कोई पौधा लगा हुआ है, जिससे घर एक प्राकृतिक जंगल जैसा महसूस होता है. इतना ही नहीं, आतिफ ने अपने घर में फलों और सब्जियों के पौधे भी लगाए हैं, जिनकी ताज़ी फसल वे खुद अपने खाने में इस्तेमाल करते हैं. यह सब उनके स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है.

पक्षियों की चहचहाहट के बीच सुकून भरी ज़िंदगी
आतिफ के घर में सिर्फ पेड़-पौधे ही नहीं, बल्कि कई तरह के पक्षी भी रहते हैं. हर सुबह पक्षियों की चहचहाहट से घर की फिज़ा और भी खुशनुमा हो जाती है. प्रकृति के इतने करीब होने की वजह से आतिफ और उनका परिवार एक शांत और सुकून भरा जीवन जी रहा है. उनका मानना है कि पेड़-पौधे सिर्फ पर्यावरण को साफ नहीं रखते, बल्कि मानसिक शांति भी देते हैं.

खुद बनाते हैं जैविक खाद
आतिफ ने घर के कचरे को बेकार फेंकने की बजाय उससे जैविक खाद बनाने का अनोखा तरीका अपनाया है. किचन वेस्ट और पौधों से निकले सूखे पत्तों को मिलाकर वे खुद ही घर में खाद तैयार करते हैं, जिससे उनके पौधे और भी ज्यादा हरे-भरे बने रहते हैं. इससे न सिर्फ कचरे की समस्या हल होती है, बल्कि मिट्टी भी उपजाऊ बनी रहती है.

चार घंटे रोज़ाना पौधों की देखभाल
आतिफ पेशे से एक व्यापारी हैं, लेकिन अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वे हर दिन करीब चार घंटे अपने पौधों की देखभाल में बिताते हैं. उनका कहना है कि यह काम उन्हें खुशी और मानसिक शांति देता है. उनका सपना है कि हर घर में ऐसे ही छोटे जंगल बने, जिससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिल सके.

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