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पलक पर अश्क जो ठहरे हुए हैं, किसी सैलाब को रोके हुए हैं…घर के हालात ने बनाया टेलर!

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Agency:News18 Madhya Pradesh

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Ajab Gajab: छतरपुर जिले के लवकुश नगर के रहने वाले कवि और शायर मोहम्मद मकसूद शाद जिन्हें बचपन से ही शायरी से लगाव हो गया था. शायरी की व्याकरण भी सीखी, अपनी शायरी सुनाने बड़े-बड़े शहरों में भी गए. छतरपुर आकाशवाणी…और पढ़ें

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टेलरिंग

टेलरिंग का काम करते लवकुश नगर निवासी मोहम्मद मकसूद शाद 

हाइलाइट्स

  • मोहम्मद मकसूद शाद को बचपन से शायरी का शौक था.
  • घर के हालातों ने मकसूद शाद को टेलर बना दिया.
  • आज भी मकसूद शाद की शायरी बड़े कार्यक्रमों में सुनी जाती है.

छतरपुर. जिले के लवकुश नगर के रहने वाले मोहम्मद मकसूद शाद जिन्हें बचपन से ही शायरी से लगाव हो गया था. शायरी की व्याकरण भी सीखी, अपनी शायरी सुनाने बड़े-बड़े शहरों में भी गए. छतरपुर आकाशवाणी से लेकर ग़ज़ल कुंभ में भी इनकी शायरी की गूंज सुनाई दी. लेकिन घर के हालातों ने इनको टेलर बना दिया. हालांकि,आज भी इनकी शायरी सुनने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रमों इनको बुलाया जाता है.

लवकुश नगर के निवासी मोहम्मद मकसूद शाद लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि पिताजी टेलरिंग का काम करते थे. उस वक्त मेरी उम्र तकरीबन 15 साल थी. मैं भी दुकान में आकर काम करता था. काम करने के दौरान पिताजी से छुपकर रेडियो में मोहम्मद रफ़ी साब के गाने बहुत सुना करता था. ग़ज़लें भी सुना करता था, जो सुनने में बहुत अच्छी लगती थीं. धीरे-धीरे संगीत की तरफ़ रुझान बढ़ने लगा.

एक बार कब्बाली के कार्यक्रम में गया, इस कार्यक्रम में शायरी की डिबेट हुई. ये सब देखकर बहुत अच्छा लगा. मुझे लगा मैं अपनी बात किसी से नहीं कर पाता तो शायरी में ही अपनी व्यथा व्यक्त करूं.

ऐसी सीखी शायरी
मकसूद शाद बताते हैं कि दूसरों के गानों को सुनकर श़ेर कहने लगा. ग़ज़ल कैसे लिखते हैं, गुनगुनाते हुए लिखा करता था. उर्दू भी सीखी, इसका व्याकरण भी सीखा.

इन मंचों पर दी है प्रस्तुति 
मकसूद शाद बताते हैं कि पहले आसपास के ही कवि सम्मेलन में जाने का मौका मिला. इसके बाद आकाशवाणी छतरपुर में कई बार मुशायरा पढ़ने का मौका मिला. अभी भी कई साल से पढ़ रहा हूं. दिल्ली के ग़ज़ल कुंभ में भी अपनी लिखी शायरी पढ़ने का मौका मिला है. इस ग़ज़ल कुंभ में भारत के बाहर से भी शायरों को बुलाते हैं. यहां नए शायरों को मौका दिया जाता है. मैं 2 साल अपनी शायरी पढ़ने गया हूं. एक बार इस कार्यक्रम की मुरारी बापू ने अध्यक्षता की थी.

मोहब्बत पर लिखते हैं शायरी 
मकसद शाद बताते हैं कि शुरुआत में मोहब्बत पर शायरी करता था. मेरी ये ग़ज़ल बहुत मशहूर हुई है. जहां भी जाता हूं, वहां ये ग़ज़ल जरूर लोग सुनते हैं.

”मोहब्बत है अगर दिल में, तो फिर समझो खुदा भी है
मोहब्बत है अगर दिल में, तो समझो खुदा भी है
खुदा रहता नहीं नफ़रत भरे काले मकानों में”

”उम्र भर का ग़म मोहब्बत की निशानी दे गया
उम्र भर का ग़म मोहब्बत की निशानी दे गया

जाते-जाते वो मेरी, आंखों में पानी दे गया
जाते-जाते वो मेरी, आंखों में पानी दे गया

आंसुओ ने लिखी है एक खूबसूरत सी ग़ज़ल
वो मेरे अश़्कों को रंगे जाफ़रानी दे गया

उम्र भर का ग़म मोहब्बत की निशानी दे गया”

”पलक पर अश़्क जो ठहरे हुए हैं
पलक पर अश़्क जो ठहरे हुए हैं

किसी शैलाब को रोके हुए हैं
किसी शैलाब को रोके हुए हैं

रुखे ग़म पर ख़ुशी का करके मेकअप
तेरी शादी में हम आए हुए हैं
तेरी शादी में हम आए हुए हैं ”

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पलक पर अश्क जो ठहरे हुए हैं, किसी सैलाब को रोके हुए हैं…हालात ने बनाया टेलर!

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