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अमेरिका के ऊटाह राज्य में रहने वाली मैडलिन लॉरेंस इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. मैडलिन तीन बच्चों की मां हैं. उन्होंने अपने नवजात बच्चों के सिर के आकार को ठीक करने के लिए खास 3D-प्रिंटेड हेलमेट का सहारा लिया है.
बच्चों का सिर चपटा है, जिसे ठीक करने के लिए महिला उन्हें हेलमेट पहनाती है. (फोटो: Social Media/@mads_lawrence)एक्सिडेंट से बचने के लिए लोग हेलमेट लगाते हैं. पर क्या आपने कभी किसी को सिर का आकार ठीक करने के लिए हेलमेट का प्रयोग करते देखा है? हाल ही में एक अमेरिकी मां खूब चर्चे में है. वो इसलिए क्योंकि वो अपने बच्चों का सिर ठीक कराने के लिए हेलमेट पहनाती है. वो भी दिन में 23 घंटे. एक हेलमेट की कीमत इतनी ज्यादा होती है कि जब आप उसका रेट जानेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे!
अमेरिका के ऊटाह राज्य में रहने वाली मैडलिन लॉरेंस इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. मैडलिन तीन बच्चों की मां हैं, जिनमें हाल ही में जुड़वां बच्चे जन्मे हैं. उन्होंने अपने नवजात बच्चों के सिर के आकार को ठीक करने के लिए खास 3D-प्रिंटेड हेलमेट का सहारा लिया है. हालांकि, इस फैसले को लेकर उन्हें इंटरनेट पर काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है. 32 वर्षीय मैडलिन बताती हैं कि डॉक्टर की सलाह पर उनके दोनों बच्चे दिन में करीब 23 घंटे हेलमेट पहनते हैं. शुरुआत में बच्चों को इसकी आदत डालने के लिए उन्होंने एक घंटे हेलमेट पहना और एक घंटे उतारना शुरू किया. धीरे-धीरे समय बढ़ाया गया ताकि बच्चों को कोई परेशानी न हो. मैडलिन के अनुसार, उनकी बेटी के सिर में शुरुआत में 14 मिलीमीटर तक असमानता थी, जो छह हफ्तों में घटकर सिर्फ 3.75 मिलीमीटर रह गई.
सिर का आकार ठीक करने के लिए लगाती है हेलमेट
मैडलिन के जुड़वां बच्चे उन लाखों बच्चों में शामिल हैं, जिन्हें “प्लेजियोसेफेली” यानी फ्लैट हेड सिंड्रोम की समस्या होती हैय यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस हॉस्पिटल के आंकड़ों के अनुसार, हर आठ में से एक स्वस्थ बच्चे को यह समस्या हो सकती है. इस स्थिति में बच्चे का सिर एक तरफ से चपटा या टेढ़ा दिखने लगता है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि इसका दिमागी विकास या बुद्धि पर कोई असर नहीं पड़ता. गंभीर मामलों में सिर की यह बनावट चेहरे, गर्दन या जबड़े की बनावट को भी प्रभावित कर सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समस्या बच्चे के गर्भ में रहने के दौरान, गलत सोने की पोजिशन, पेट के बल खेलने (टमी टाइम) की कमी या जुड़वां बच्चों के जन्म की वजह से हो सकती है.
63 हजार रुपये है एक हेलमेट की कीमत
डॉक्टर इस समस्या को ठीक करने के लिए हेलमेट थेरेपी की सलाह देते हैं. यह इलाज अक्सर महंगा होता है और बिना बीमा के इसकी लागत 1,500 से 5,000 डॉलर तक हो सकती है. मैडलिन ने अपने दोनों बच्चों के लिए करीब 700 डॉलर (63 हजार रुपये) प्रति हेलमेट खर्च किए. डॉक्टरों ने चार महीने की उम्र के बाद हेलमेट पहनाने की सलाह दी, ताकि बच्चे की गर्दन इतनी मजबूत हो जाए कि वह हेलमेट का वजन संभाल सके. हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोग मैडलिन की आलोचना कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बच्चों को 23 घंटे हेलमेट पहनाना गलत बात है, तो कुछ इसे पूरी तरह गैर-जरूरी मानते हैं लेकिन मैडलिन इन नकारात्मक टिप्पणियों से परेशान नहीं होतीं. मैडलिन का कहना है कि अगर वह खुद ऐसी समस्या से जूझ रही होतीं, तो चाहतीं कि उनके माता-पिता इसका इलाज जरूर कराएं. हेलमेट बनाने की प्रक्रिया भी काफी आधुनिक है. विशेषज्ञ बच्चे के सिर की माप लेते हैं, 3D इमेजिंग करते हैं और फिर उसी के अनुसार हेलमेट प्रिंट किया जाता है. हेलमेट अंदर से फोम का होता है और बच्चे के बढ़ने के साथ उसमें बदलाव किए जाते हैं. इसका उद्देश्य यह होता है कि जैसे-जैसे सिर बढ़े, वह गोल आकार लेने लगे.
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आशुतोष अस्थाना न्यूज़18 हिन्दी वेबसाइट के ऑफबीट सेक्शन चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. यहां वो दुनिया की अजीबोगरीब खबरें, अनोखे फैक्ट्स और सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग न्यूज़ को कवर करते हैं. आशुतोष को डिजिटल मी…और पढ़ें
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