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मामूली संक्रमण लेकर अस्पताल में भरती हुआ था शख्स, डॉक्टर मां मांगती रह गई खास दवाएं, 12 घंटे में हुई मौत

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एक बहुत ही दुर्लभ मामले में एक 22 साल के शख्स की मामूली संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती होने के 12 घंटे के अंदर ही मौत हो गई. शख्स की डॉक्टर मां अस्पताल के स्टाफ और ड़ॉक्टरों से कहती रही की उसे तुरंत एंटिबा…और पढ़ें

संक्रमण लेकर अस्पताल में भरती हुआ था शख्स, मां मांगती रही दवाएं, हुई मौत!

पूरा मामला अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही का लग रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • मामूली संक्रमण से 12 घंटे में युवक की मौत
  • डॉक्टर मां ने मांगी एंटीबायोटिक, नहीं मिली
  • मामला अदालत में, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

एक सरल सा लगने वाला मेडिकल केस किसी के लिए जानलेवा भी हो सकता है.  इस तरह की कई घटनाएं दुनिया में होती हैं और फिर मामला अदालत में चला जाता है. लंदन में 22 साल के विलियम ह्यूस के साथ ऐसा ही कुछ हुआ था. होमर्टन यूनिवर्सिटी अस्पताल में वे एक मामूली से संक्रमण की वजह से भरती हुआ था. लेकिन उसकी हालत ऐसी बिगड़ती गई कि डॉक्टर उलझते चले गए, मां एंटीबायोटिक जैसी दवाओं के लिए मिन्नतें करती रह गई, लेकिन उसके बेटे की 12 घंटे में ही मौत हो गई. इसमें अफसोस की बात यह रही की मां खुद एक डॉक्टर थीं.

सेहतमंद था लड़का
छात्र विलियम के बारे में बताया जाता है कि भर्ती होने से पहले पूरी तरह से फिट और हेल्दी था. लेकिन अचानक उसे मेनिनगोकोकल संक्रमण हुआ जिससे उसे मेनिनजाइटिस  का रोग हो गया और आखिर में सेप्सिस में विकसित होकर उसकी मौत हो गई.  यह सब कुछ केवल 12 घंटे की अवधि में हो गया था.

मां करती रही मिन्नतें
मामला बो कॉर्नर्स के कोर्ट में चल रहा है,परिवार के वकीलों का कहना है कि अस्पताल यह सुनिश्चित करने में नाकाम रहा कि नियम के अनुसार विलियम को भर्ती होने के एक ही घटे के भीतर एंटीबायोटिक जल्द से जल्द दी जा सकें. उनका कहना है कि विलियम की मां डॉ बर्न्स बार बार यह कहती रहीं कि विलियम को उन दवाओं की तुरंत जरूरत है, लेकिन उसे वो दवाएं नहीं दी गईं.

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युवक की हालात खराब होते होते कुछ ही घंटों में सेप्सिस तक पहुंच गई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)

स्टाफ का रवैया
इस पूरे मामले में डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ सभी के बयान स्पष्ट नहीं हैं. लग रहा है कि किसी को जैसे ठीक से पता हीं नहीं था कि करना क्या है.  चाहे इमेरजेंसी विभाग की रजिस्ट्रार डॉ रेबेका मैक्मिलन हों या नर्सिंग स्टाफ कोई सुनिश्चित नहीं कर सका कि विलियम क एंटीबायोटिक दी जाएं.

मौत का हो गया था शक
रजिस्ट्रार मैकमिलन ने भावुक होते हुए कोर्ट को बताया कि शायद वह कुछ अलग कर सकती थी. लेकिन उसे विलियम को देखते ही यह भी लग गया था कि विलियम किसी भी समय मर सकता था. लेकिन उन्होंने यह भी माना का वह स्पष्ट रूप से किसी को निर्देश नहीं दे सकी.

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नर्सिंग स्टाफ ने भी स्पष्ट बयान नहीं दिए. किसी के दिमाग से एंटीबायोटिक देने की बात छूट गई तो किसी के कहा कि उसे तो ऐसे कोई निर्देश ही नहीं दिए गये थे. वहीं मेडिकल रजिस्ट्रार ने कहा कि उसे तो चार्ट में दवाओं का जिक्र भी नहीं मिला. इसी तरह के शाम की पाली के स्टाफ भी कुछ गोलमोल से जवाब दे रहा है. सुनवाई अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन एक डॉक्टर मां के लिए यह हासदा एक नासूर बन कर रह गया.

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