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बाड़मेर:- एक तरफ देश का हर दूसरा विद्यार्थी मोबाइल की लत फंसा है और रियल लाइफ से ज्यादा बच्चे और युवा रील लाइफ में अटके हुए हैं. लेकिन इस दौर से परे भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बाड़मेर में एक जगह ऐसी भी है, जहां सैकड़ों विद्यार्थी अपने घर से कई किलोमीटर दूर बिना मोबाइल के रह रहे हैं. सोशल मीडिया के इस युग में विद्यार्थियों के पास डायवर्सन के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं.
आजकल स्टूडेंट का मोबाइल स्क्रीन टाइम बढ़ता ही जा रहा है. यह भी देखा जा रहा है कि मोबाइल, सोशल मीडिया, वीडियो गेम के कारण बहुत सारे इंटेलिजेंट विद्यार्थी भी समय के साथ डायवर्ट होकर पिछड़ जाते हैं. सरहदी बाड़मेर के कलाम आश्रम का प्रत्येक कैंपस मोबाइल फ्री है. कैंपस में जगह-जगह लगे टेलीफोन बूथ पर स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल कर विद्यार्थी अपने अभिभावकों से जब चाहे, तब बात कर सकते हैं.
एक छत के नीचे गुजरता है दिन-रात
अलसुबह 6 बजे से रात के 11 बजे तक बाड़मेर के कलाम आश्रम में विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई से खाने-पीने की सारी व्यवस्था एक छत के नीचे ही है. विद्यार्थियों के लिए सब सुविधाएं हैं. बस यहां का एक ध्येय वाक्य है, जिस पर पूरे कलाम आश्रम का प्रशासन और विद्यार्थी का मत है और वह है पढ़ाई, जरूरी है बस मोबाइल से दूरी. कलाम आश्रम में बॉयज हॉस्टल में 6 और गर्ल्स हॉस्टल में 4 बेसिक फोन लगे हैं. इस फोन से बच्चे सप्ताह में एक मर्तबा अपने अभिभावकों से बात करते हैं.
बच्चों के पहले से तय तीन नम्बर से ही वह बात कर सकते हैं. घरवालों को अगर कोई काम हो, तो वह खुद बच्चों से सीधे संपर्क नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इनके बेसिक फोन पर इनकमिंग की सुविधा नहीं है. कलाम आश्रम में पढ़ने वाले रीना व पंकज बताती हैं कि इससे उन्हें पढ़ाई में डिस्टर्ब नहीं होता है. उनका जब मन होता है, तब वह बात कर सकते हैं.
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रील से रीयल लाइफ
वहीं छात्र विकास के मुताबिक, मोबाइल फ्री कैम्पस होने से विद्यार्थियों में रील के बजाय रीयल लाइफ में पढ़ाई की ओर अग्रसर होने का मौका रहता है. कलाम आश्रम के सीईओ डॉ. भरत सारण के मुताबिक, उनका एक ही धेय्य वाक्य है- ‘मोबाइल से दूरी, संस्कार है जरूरी’, के तहत कैम्पस को मोबाइल फ्री रखा गया है. इससे विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति लग्न बढ़ेगी.
Tags: Ajab Gajab, Barmer news, Education news, Local18, Rajasthan news
FIRST PUBLISHED : January 9, 2025, 15:41 IST
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