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एक एनेस्थीसिया एक्सर्ट ने एक वैज्ञानिक प्रयोग का हवाला देकर समझाया है कि आत्मा से शरीर कैसे निकलती है. डॉ स्टुअर्ट हैमरऑफ का दावा है कि इंसान की मौत के बाद ऊर्जा विस्फोट होता है, जो आत्मा के शरीर से निकलने के क…और पढ़ें
एक्सपर्ट का कहना है कि मौत के बाद इंसान के दिमाग में ऊर्जा के विस्फोट जैसी घटना आत्मा निकलने का संकेत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एक एक्सपर्ट का दावा है कि इंसान की मौत के बाद एक रहस्यमयी किस्म का ऊर्जा विस्फोट होता है जो असल में शरीर से आत्मा निकलने की वजह से होता है. एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ स्टुअर्ट हैमरऑफ का का कहना है कि उनके इस दावे की पुष्टि एक खास प्रयोग से हुई है जिसमें चिकित्सकीय तौर पर मृत घोषित किए गए मरीजों की दिमागी गतिविधि को पकड़ा था.
मरीजों की मौत के ठीक बाद में
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना के प्रोफेसर डॉ हैमरॉफ ने यह दावा हाल ही में प्रोजेक्ट यूनिटी पोस्डकास्ट के एक इंटरव्यू के दौरान किया. उन्होंने बताया कि कैसे उस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सात गंभीर मरीजों से लाइफ सपोर्ट हटाने के पहले के दिमाग के पास सेंसर्स लगाए थे. इससे उन्हें हर मरीजे के ब्लड प्रैशर और दिल की धड़कन खत्म होने के बाद दिमागी गतिविधियों को पकड़ने का मौका मिला.
एक खास किस्म के ऊर्जा ‘विस्फोट’
डॉ हैमरॉफ ने बताया क करीब 30 से 90 सेकेंड के इस ऊर्जा “विस्फोट” या “प्रस्फोट” को गामा सिंक्रोनी कहते हैं. इसे चेतना और समझ से जुड़ा माना जाता है जो हमारे सोचने और जानकारी को प्रोसेस करने की प्रक्रिया से जुड़ी होती है. करीब एक दशक पहले किए गए इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने कहा था कि इसका संभावित कारण ये था कि जब दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होती है, तब ये “प्रस्फोट” होता है.
प्रयोग में मरने की कगार पर आ चुके मरीजों के दिमाग में सेंसर लगाकर उनकी मौत के बात का हाल देखा गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)
चेतना, जागरूकता या कुछ और?
लेकिन डॉ हैमरॉफ का सुझाव है कि यह चेतना हो सकती है. यानी यह हमारे अंदर और बाहरी अस्तित्व के शरीर को छोड़ने की जागरूकता हो सकती है. उनके मुताबिक चेतना गहरे स्तर पर होती है जिसे बहुत कम ऊर्जा की जरूरत होती है और यह सबसे आखिरी में जाती है. असल में ये बहुत ही कम ऊर्जा की प्रक्रिया होती है.
कैसे काम करती है ‘चेतना’
डॉ हैमरॉफ का मानना है कि यह प्रयोग बताता है कि चेतना बहुत ही गहरे, लगभग माइक्रोस्कोपिक स्तर पर काम करती है. या उनके मुताबिक यह क्वांटम स्तर पर काम करती है. और यह मौत के ठीक पहले दिमाग में होने वाले उस “प्रस्फोट” की व्याख्या कर सकती है.
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क्वांटम ब्रेन का विचार सुझाव देता है कि कुछ दिमागी कार्यो बहुत ही महीन स्तर पर, यानी उप परमाणु स्तर पर दिमागी कोशिकाओं में होते हैं. यह उन दिमागी विद्युत संकेतों से भी हट कर होते हैं जिन्हें हम जानते हैं. वहीं यह फिलहाल वैज्ञानिक पड़ताल का ही विषय है कि क्या दिमाग क्वांटम मैकैनिक्स या यात्रिकी का इस्तेमाल करता है? यानी क्या हमारे विचार और चेतना किसी महीन ऊर्जा तरंगों से निकल सकते हैं?
February 23, 2025, 19:05 IST
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