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यहां सब्जी या मछली मंडी नहीं, बल्कि गधों का बाजार लगता है…वजह हैरान कर देगी

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Gujarat: पौष पूर्णिमा के अवसर पर जेजुरी में हुए ऐतिहासिक आयोजन ने परंपरा, व्यापार और सांस्कृतिक धरोहर को एक साथ जोड़ा. इस कार्यक्रम में विशेष आकर्षण ने सभी का ध्यान खींचा और कई अनोखे पहलुओं को उजागर किया.

यहां सब्जी या मछली मंडी नहीं, बल्कि गधों का बाजार लगता है...वजह हैरान कर देगी

गुजरात में गधों के बाजार का आयोजन

महाराष्ट्र के पुणे जिले के जेजुरी शहर में इस बार पौष पूर्णिमा के मौके पर ऐतिहासिक गधों के बाजार का आयोजन किया गया. यह बाजार खंडोबा देव की प्रसिद्ध यात्रा के दौरान लगता है, जिसमें राज्य और देशभर से लोग शामिल होते हैं. जेजुरी में यह बाजार न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है.

गुजरात के गधों की रही खास मांग
इस बार बाजार में गुजरात के काठियावाड़ी गधों ने सबका ध्यान खींचा. इन गधों की मजबूती और पहाड़ी इलाकों में काम करने की क्षमता के कारण इनकी भारी मांग रही. काठियावाड़ी गधों की कीमत 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक पहुंची, जबकि स्थानीय गधे 25,000 रुपये से 50,000 रुपये में बिके. दांत और उम्र के आधार पर गधों की कीमत तय की जाती है, और इस बार व्यापारियों को अच्छे दाम मिलने से बाजार की रौनक और बढ़ गई.

दांत और उम्र से तय होती है कीमत
जेजुरी के इस अनोखे बाजार में गधों की कीमत उनके दांत और उम्र पर निर्भर करती है. दो दांत वाले गधों को ‘दुवान’, चार दांत वाले को ‘चौवन’, और मजबूत दांत वाले गधों को ‘अखंड’ कहा जाता है. ‘अखंड’ गधों को विशेष रूप से ऊंचे दाम मिलते हैं. व्यापारियों का कहना है कि इस साल गधों की संख्या कम होने के कारण कीमतों में इजाफा हुआ है.

सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन
मालेगांव की श्री क्षेत्र खंडोबा यात्रा दक्षिण भारत की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है. इस यात्रा के दौरान गधों के बाजार का आयोजन 400 से 500 साल पुरानी परंपरा है. खास बात यह है कि गधों की खरीद-फरोख्त यहां कैशलेस तरीके से होती है, जिसमें व्यापारी अगले साल भुगतान करते हैं. यह परंपरा स्थानीय समुदायों और घुमंतू जातियों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है.

घुमंतू जातियों का महत्वपूर्ण योगदान
इस परंपरागत बाजार में कोल्हाटी, वैदू, बेलदार, कुम्हार, मदारी, और घिसाड़ी जैसी घुमंतू जातियों का योगदान अहम है. ये जातियां हर साल इस यात्रा में भाग लेती हैं और खंडोबा देव के दर्शन के साथ गधों का व्यापार करती हैं. इस साल भी भक्तों और व्यापारियों ने इस सांस्कृतिक आयोजन का जमकर आनंद लिया.

सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप
खंडोबा यात्रा और गधों के बाजार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि परंपरा और आधुनिकता का संगम कैसे किया जा सकता है. जेजुरी का यह ऐतिहासिक बाजार न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक सुंदर उदाहरण भी है.

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