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Unknown Fact : जब भी हम सड़क पर वाहन चलाते हैं, तो वहां बनी सफेद और पीली लाइनों पर हमारी नजर जरूर जाती है.ये रोड मार्किंग ड्राइवरों को सही दिशा और नियमों की जानकारी देने के लिए बनाई जाती हैं.आइए समझते हैं कि इन दोनों लाइनों का क्या मतलब होता है और इनमें क्या अंतर है.
सफेद और पीली लाइनें आधिकारिक रोड मार्किंग का हिस्सा होती हैं.इनका उद्देश्य ड्राइवरों को लेन डिसिप्लिन, ट्रैफिक की दिशा, ओवरटेकिंग के नियम और सड़क की सीमाओं के बारे में सही जानकारी देना होता है.
सफेद लाइनें आमतौर पर उन सड़कों पर बनाई जाती हैं जहां वाहन एक ही दिशा में चलते हैं, जैसे शहर की सड़कें, हाईवे और फ्लाईओवर. इनका काम लेन को अलग-अलग दिखाना और यह सुनिश्चित करना होता है कि चालक अपनी लेन में ही वाहन चलाएं.
टूटी हुई सफेद लाइन यह संकेत देती है कि जरूरत पड़ने पर लेन बदलना या सुरक्षित तरीके से ओवरटेक करना अनुमत है. वहीं, लगातार बनी सफेद लाइन पाबंदी दर्शाती है, यानी ड्राइवर को अपनी लेन में ही रहना चाहिए और ओवरटेकिंग की इजाजत नहीं होती.
सड़क के किनारे बनी लगातार सफेद लाइन को एज लाइन कहा जाता है.यह बताती है कि सड़क कहां खत्म होती है और शोल्डर कहां से शुरू होता है.
पीली लाइनें आमतौर पर दोतरफा सड़कों पर होती हैं, जहां वाहन आमने-सामने की दिशाओं में चलते हैं.इनका मुख्य उद्देश्य आमने-सामने की टक्कर को रोकना होता है.एक ठोस पीली लाइन का मतलब है कि विपरीत लेन में जाना मना है, जबकि टूटी हुई पीली लाइन यह बताती है कि सावधानी के साथ ओवरटेक किया जा सकता है.
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