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वैज्ञानिकों ने किया एक टेस्ट, नतीजे ने चौंकाया, मकबरा नहीं, किसी और काम के लिए बना था गीजा का पिरामिड

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गीजा का पिरामिड एक विशाल पॉवर प्लांट था, जो ऊर्जा भंडारण और उत्पादन के लिए इस्तेमाल होता था. वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों से यह रहस्य उजागर किया.

वैज्ञानिकों ने किया एक टेस्ट, नतीजे ने चौंकाया, मकबरा नहीं, किसी और काम के लिए

गीजा का पिरामिड में कई चीजों का काम कुछ और ही था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों के लिए मिस्र के गीजा सहित अन्य सभी पिरामिड बहुत रहस्यमयी रहे हैं. वे इस अनूठी संरचना के कई रहस्य समझ नहीं पाए हैं कि उन्हें आखिर बनाया क्यों गया था. वैज्ञानिकों को एक तरफ पिरामिड में अपने दौर के राजा, जिन्हें फैराओ कहा जाता था. के मकबरे संबंधी चीजें मिली हैं, वहीं कई चीजों और रहस्यों ने पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों को परेशान कर रखा था. पिछले कुछ समय से वेज्ञानिक अनुमान लगा रहे थे कि हो सकता है कि पिरामिडों का इस्तेमाल ऊर्जा के भंडारण और या उत्पादन के लिए होता रहा हो. अब उन्हें पता चल गया है कि गीजा का पिरामिड असल में एक बहुत ही बड़ा पॉवर प्लांट हआ करता था.

एक बहुत ही बड़े पॉवर प्लांट
वैज्ञानिकों ने इस खास प्रयोग के आधार पर ना केवल यह पता लगाया है कि पिरामिड ऊर्जा भंडारण के लिए इस्तेमाल होते थे. बल्कि वे पॉवर प्लांट की तरह कैसे इस्तेमाल होते थे, यह भी पता चला है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने बहुत सारी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को पिरामिड पर डाला , जिससे उन्होंने कुछ चौंकाने वाली बातें पता चलीं.

तरंगों को सोख लिया
शोधकर्ताओ ने पाया कि पिरामिड के कुछ हिस्सों ने इन तरंगों को तो अवशोषित ही कर लिया. इसमें राजा और रानी दोनों के मकबरे शामिल थे. इसके आधार पर वे इस नतीजे पर पहुंच सके कि पिरामिड को इस तरह से बनाया गया होगा जिससे उसमें खास मकसद से ऊर्जा का भंडारण किया जा सके. रिटायर्ड एरोस्पेस इंजीनीयर क्रिस्टोफर डुन ने बताया कि यह कैसे  होता था.

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वैज्ञानिक का दावा है कि पिरामिड का इस्तेमाल ऊर्जा को जमा करने के लिए किया जाता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)

कैसे बनाई जाती थी ऊर्जा?
उन्होंने बताया कि पहली बात तो ये कि पिरामिड का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसका कोई व्यवहारिक इस्तेमाल नहीं होता था. चेम्बर में दो तरह के कैमिकल्स को मिलाया जाता था और वह मिश्रण ऊर्जा बनाने के लिए हाइड्रोजन उबालता था. मिस्रवासी ऊर्जा को पकड़ने के काम करते थे जिससे वे इसका इस्तेमाल कर सकें.

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30 साल तक पिरामिडों का विश्लेषण करने वाले क्रिस्टोफर का कहना है कि पिरामिड को केवल संयोग से ही इतना सटीक नहीं बनाया गया है . कम्प्यूटर विश्लेषण करने के बाद उनका मानना है कि मिस्र के लोगों को पास बहुत उच्च किस्म की निर्माण तकनीक और यहां तक कि भारी मशीनरी भी थी. लेकिन अभी तक इस तरह का कोई भी उपकरण खोजा नहीं जा सका है.

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