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फिल्म इंडस्ट्री में सालों से चली आ रही नेपोटिज्म की बहस के बारे में बात करते हुए कावेरी कपूर कहती हैं, ‘मुझे समझ में आता है कि बाहरी लोगों को वो मौके नहीं मिलते जो फिल्मी परिवारों से आने वाले लोगों को मिलते हैं, और इससे निराशा होती है. अगर मैं उनकी जगह होती, तो मुझे भी ऐसा ही लगता. लेकिन दूसरी तरफ, जैसे एक डॉक्टर का बच्चा डॉक्टर बनता है, एक वकील का बच्चा वकील बनता है, वैसे ही हर फील्ड में नेपोटिज्म होता है.’ (फोटो साभार- इंस्टाग्राम kaverikapur)
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