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श्मशान सामने बनी है चाय की रेहड़ी, नहीं बैठता कोई दुकानदार, 100 साल से चल रही है यूं ही, आते हैं ग्राहक भी!

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Tea Shop with out Vendor: श्मशान के सामने मौजूद ये चाय की दुकान 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और अब इस पर कोई दुकानदार नहीं बैठता है. दिलचस्प तो ये है कि इसके बाद भी यहां कभी चोरी नहीं हुई और ग्राहकों की संख्या…और पढ़ें

श्मशान के सामने बना चाय का ठेला, बिना दुकानदार के चल रहा है 100 साल से!

बिना दुकानदार के चलती है चाय की दुकान. (Credit- Instagram/storiesbyaradhana)

चाय को पसंद करने वालों की कमी पूरी दुनिया में नहीं है. भले ही इसे लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती हैं लेकिन कोई भी इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता है. चाय की लाख खामियां जानने के बाद भी लोग इसका स्वाद छोड़ नहीं पाते. यही वजह है कि आप सभी चाय की दुकानों पर बराबर भीड़ देख सकते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही टी स्टॉल के बारे में बताएंगे, जो 100 सालों से चल रही है.

श्मशान के सामने मौजूद ये चाय की दुकान 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और अब इस पर कोई दुकानदार नहीं बैठता है. दिलचस्प तो ये है कि इसके बाद भी यहां कभी चोरी नहीं हुई और ग्राहकों की संख्या भी अच्छी-खासी रहती है. ये टी स्टॉल पश्चिम बंगाल में मौजूद है, जिसकी शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी और ब्रू बॉन्ड कंपनी के लिए काम कर चुके नरेश चंद्रा शोम ने की थी. आज तक ये चाय की रेहड़ी इसी तरह चल रही है लेकिन इस पर कोई दुकानदार नहीं बैठता है.

बिना दुकानदार के चलती है दुकान
इंस्टाग्राम पर ट्रैवलर इन्फ्लुएंसर आराधना ने एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल में एक 100 साल पुरानी चाय की दुकान है. पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में यह टी स्टॉल चतरा काली बाबू श्मशान घाट के ठीक सामने है. सुबह दुकानदार आता है और टी-स्टॉल खोलकर चला जाता है. इसके बाद कस्टमर आते हैं, खुद ही चाय बनाते हैं और चाय की दुकान के बाहर बैठकर आराम से पीते हैं. वे चाय के पैसे भी वहां रखकर चले जाते हैं. यह एक तरह से ईमानदारी की बड़ी मिसाल कायम करता है.



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