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सऊदी अरब में भारतीय, पाकिस्तानियों और बांग्लादेशियों को ‘रफ़ीक़’ कहा जाता है. लेकिन क्यों, इससे जुड़ा सवाल एक यूजर ने पूछा, जिसपर कई लोगों ने जवाब दिए हैं. एक तरफ, कुछ लोगों का कहना है कि 80 के दशक में यह शब्द श्रमिकों के लिए एक अपमानजनक स्लैंग था, तो कुछ का कहना है कि इसका मतलब सिर्फ ‘दोस्त’ है.

भारत से लेकर पाकिस्तान सहित कई देशों के लोग हर साल सऊदी अरब कमाने के लिए जाते हैं. इन देशों की तुलना में इस खाड़ी देश में ज्यादा पैसे मिलते हैं. ऐसे में लोग अपने घर-परिवार से दूर सालों-साल यहां काम करते हैं और पैसे कमाकर घर लौट आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत-पाकिस्तान से जाने वाले लोगों को सऊदी अरब में क्या कहा जाता है? अगर नहीं जानते तो बता दें कि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों और भारतीयों जैसे दक्षिण एशियाई प्रवासियों को कभी-कभी ‘रफ़ीक़’ (Rafiq) शब्द से संबोधित किया जाता है. आखिर क्या है इसका मतलब? इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोरा (Qoura) पर एक यूजर ने सवाल पूछा है. यूजर का कहना है कि सऊदी अरब के लोग भारतीयों या पाकिस्तानियों को “रफ़ीक़” क्यों कहते हैं? इस सवाल पर कई लोगों ने जवाब दिए हैं.
सऊदी अरब के सबाकाह में काम करने वाले बाबर मुगल (Babar Mughal) ने लिखा है कि 80 के दशक में मेरा जन्म और पालन-पोषण जेद्दा (Jeddah) में हुआ था. मैंने सड़कों पर ‘रफ़ीक़’ शब्द बहुत सुने. अरबी में ‘रफ़ीक़’ का शाब्दिक अर्थ ‘साथी’ या ‘कंपेनियन’ होता है. हालांकि, 80 के दशक और 90 के दशक की शुरुआत में यह शब्द भारतीय उपमहाद्वीप के श्रमिकों के लिए एक ‘स्लैंग’ (अपमानजनक शब्द) बन गया था. मुगल ने बताया कि उस समय इसे ‘एन-वर्ड’ (N-word) के समान माना जाता था और भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के कई लोग इस शब्द से नफरत करते थे. हालांकि, उन्होंने यह भी नोटिस किया कि पिछले पांच सालों से शिक्षा के बढ़ते स्तर और बदलते सार्वजनिक रवैये के कारण यह शब्द अब सार्वजनिक उपयोग से धीरे-धीरे कम हो रहा है.
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