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एक आधुनिक शहर में लोग बीते 8 दशक से एक लालटेन वाले भूत की कहानी से परेशान थे. इसमें रहस्यमयी रोशनी, कांपते हुए घर और इमारतें और डरावनी आवाज के अनुभव शामिल हैं. लेकिन एक वैज्ञानिक डॉ सूज़न हॉग ने में भूकंप के क…और पढ़ें
लालटेन वाले भूत की सारी कहानियां रेलवे ट्रैक के आसपास की ही बताई जाती थीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हाइलाइट्स
- महिला वैज्ञानिक ने सुलझाया ‘लालटेन वाले भूत’ का रहस्य
- डॉ सूज़न हॉग ने भूकंप के कारणों से रहस्य को सुलझाया
- समरविले शहर में 1950 से लालटेन वाले भूत की कहानी थी
एक ऐसा शहर जहां से रेलवे लाइन गुजरती है, वहां खासे पढ़े लिखे लोग भी रहते हैं, कितना पिछड़ा होगा? क्या वहां के लोग भूत प्रेत में यकीन करते होंगे? अगर आपसे कहा जाए कि एक दो साल नहीं बल्कि सात आठ दशकों से वे एक भूत की कहानी पर यकीन कर रहे थे. लेकिन उसके रहस्य को सुलझाने का काम किया एक महिला वैज्ञानिक ने. इस साइंटिस्ट ने ना केवल घरों और उनके सामान को कंपकपा देने वाले झटकों की सही व्याख्या की, बल्कि लालटेन वाले भूत का राज भी खोल दिया जिससे लोग दशकों तक डरते रहे, लेकिन उसकी असलियत नहीं समझ पा रहे थे.
कहां की है कहानी?
ये कहानी अमेरिका के साउथ कैरोलीना के समरविले शहर की है, जहां शीप आइलैंड रोड, या
ओल्ड लाइट रोड की है जिससे 1950 के दशक से लोगों में दहशत फैला रखी थी. एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी पर लोगों को यकीन करने अलावा शायद कोई चारा नहीं था. लोग बताते हैं यहां एक भूत है जो लालटेन लेकर गुजरता है और उसके गुजरने के बाद पास के घरों को समान यहां तक कि कारें तक डोलने लगती हैं.
क्या है कहानी?
डेली स्टार के मुताबिक, इसकी कहानी कुछ यूं कही जाती है कि एक आदमी रेलरोड पर काम कर रहा था जिसकी ट्रेन से टकराने से मौत हो गई थी. इसके बाद उसकी पत्नी ने यहां के इलाके में लोगों को डराना शुरू कर दिया. कई लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार रेलवे ट्रैक के ऊपर, हवा में, अजीब से रोशनी तैरती हुई देखी है, जो तेजी से उनकी ओर दौड़ती हुई आती है.
डॉ सूज़न हॉग ने रेलवे ट्रैक पर भूकंप की जानकारी निकल कर रहस्य को सुलझाया. (तस्वीर: Seismological Society of America/ Susan Hough)
रोशनी, आवाजें और कंपन
यह रोशनी छोटी, गोलाकार, और या तो नीली या फिर हरे रंग की होती है, लेकिन कई बार यह लाल ये सफेद भी दिखती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार रेलवे लाइन के पास के घरों और इमारतों में कारों को कांपते हुए, दरवाजों को खड़खड़ाते हुए और फुसफुसाती हुई आवाजें तक सुनी हैं.
एक एक्सपर्ट ने की पड़ताल
हैरानी की बात ये है कि इस मामले में कभी अच्छे से तहकीकात की जरूरत नहीं महसूस की गई. लेकिन अर्थक्वेक हजार्ड्स प्रोग्राम की डॉ सूज़न हॉग को लगता था कि इसके पीछे जरूर कोई कुदरती कारण होंगे. 2023 में सूज़न और उनके एक सहयोगी ने साउथ कौरोलीना रेलरोड़ की पटरियों पर कुछ दरारें दिखीं जिससे लग रहा कि यहां एक फॉल्ट लाइन बनी है.
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उन्होंने और पड़ताल कर यह सुझाव दिया कि हो सकता है कि कारों के खड़खड़ाने के पीछे उथले भूकंप रहे हों जिनका असर करीब 65 किलोमीटर तक दिखा हो. उन्होंने बताया कि जो लोग देखते थे वह भूकंप के झटकों के बाद का असर हो. यहां तक कि जो रोशनी लोग देखा करते थे वे असल में भूकंप की रोशनी हो सकती हैं जो भूकंपीय गतिविधियों के दौरान पास के आसमान में देखने को मिलती हैं. और जो आवाजे लोग सुनते हैं वह भूकंप की ही आवाजें होती होंगी.
February 14, 2025, 09:16 IST
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