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साल में सिर्फ 1 दिन खुलने वाला मंदिर…यहां शिवलिंग नहीं, भगवान शिव के बरगद के पेड़ की होती है पूजा!

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Agency:Local18

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Bodhu Avudaiyar Temple: तमिलनाडु का बोडू अवुदैयार मंदिर साल में सिर्फ एक दिन खुलता है, जहां भगवान शिव की पूजा शिवलिंग की बजाय बरगद के पेड़ के रूप में होती है. भक्त यहां विशेष चढ़ावा चढ़ाते हैं और आस्था रखते हैं…और पढ़ें

सिर्फ 1 दिन खुलने वाला मंदिर, यहां शिवलिंग नहीं, शिव के बरगद पेड़ को पूजते हैं

बोडू अवुदैयार मंदिर

तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित एक ऐसा मंदिर है, जो पूरे साल बंद रहता है और सिर्फ कार्तिगई महीने के सोमवार को ही खुलता है. यह मंदिर है बोडू अवुदैयार मंदिर, जो अपनी अनूठी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे और तभी से यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया.

भगवान शिव का अनोखा स्वरूप – शिवलिंग नहीं, बरगद का पेड़!
अक्सर हम शिव मंदिरों में शिवलिंग की पूजा होते हुए देखते हैं, लेकिन बोडू अवुदैयार मंदिर में भगवान शिव की पूजा किसी मूर्ति या शिवलिंग के रूप में नहीं, बल्कि एक विशाल बरगद के पेड़ के रूप में की जाती है. भक्त इस पेड़ को ही भगवान शिव का अवतार मानकर पूजा करते हैं. यहां प्रसाद के रूप में केवल बरगद के पत्ते और पवित्र जल चढ़ाया जाता है.

मंदिर के नाम की दिलचस्प कहानी
इस मंदिर का नाम बोडू अवुदैयार मंदिर कैसे पड़ा, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, दो महान ऋषि—वनगोबर और महागोबर—गहरे ध्यान में लीन थे और यह चर्चा कर रहे थे कि ईश्वर तक पहुंचने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग क्या है—गृहस्थ जीवन या संन्यास? तभी भगवान शिव श्वेत आक के वृक्ष के नीचे प्रकट हुए और उन्होंने ऋषियों को यह संदेश दिया कि सच्चे सिद्धांतों का पालन करने वाला व्यक्ति न तो किसी से श्रेष्ठ होता है और न ही निम्न. इसी वजह से इस मंदिर के भगवान को ‘पोत्तु आवुदैयार’ और ‘मथ्यपुरेश्वर’ भी कहा जाता है.

सिर्फ एक दिन खुलते हैं मंदिर के द्वार!
यह मंदिर सालभर बंद रहता है और सिर्फ कार्तिगई महीने के सोमवार को ही इसके द्वार भक्तों के लिए खोले जाते हैं. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव अपने गणों के साथ इस मंदिर के वेल्लाल वृक्ष के नीचे आए और फिर उसी वृक्ष के साथ एक हो गए. इस वजह से हर साल मध्य रात्रि को मंदिर के द्वार खुलते हैं और विशेष पूजा होती है. अन्य दिनों में यह मंदिर पूरी तरह बंद रहता है.

भक्तों का अनोखा चढ़ावा
हर साल कार्तिगई महीने के अंतिम सोमवार को यहां हजारों भक्त आते हैं और भगवान शिव को विभिन्न चीजें अर्पित करते हैं. भक्त सोना, चांदी, पीतल, पैसे, चावल, दाल, उड़द, मसूर, तिल, नारियल, आम, इमली, मिर्च, सब्जियां और यहां तक कि बकरी, गाय तथा मुर्गी जैसे पशुओं का चढ़ावा भी चढ़ाते हैं. उनका मानना है कि इस तरह से भगवान शिव की कृपा उन पर बनी रहती है और उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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