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भारत में कई लोग सुबह नहाने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं. इसमें पीतल या तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को जल दिया जाता है. कुछ लोग इसे पानी की बर्बादी बताते हैं. उनका कहना है कि एक लोटा जल देकर क्या सूर्य को ठंडा किया जा सकता है? लेकिन इस एक्शन का असली मतलब ज्यादातर लोग नहीं जानते. दरअसल, जब सूर्य को जल दिया जाता है तब लोगों से गिरते जल की धार से सूर्य को देखने को कहा जाता है. जब सूरज की रोशनी गिरते पानी से टकराती है, तब प्रिज्म बनता है. इसे देखने के इंसान के आंखों की रोशनी बढ़ती है. इसी वजह से सूर्य को सुबह जल दिया जाता था ताकि लोगों की आंखें तंदरुस्त रहे.
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