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Sweep-in FD: स्वीप-इन एफडी एक ऐसा फिक्स्ड डिपॉजिट है जिसे आपके सेविंग्स अकाउंट से जोड़ा जाता है. इसमें जब आपके अकाउंट में तय सीमा से ज्यादा पैसा होता है, तो वह एडिशनल पैसा अपने आप एफडी में चला जाता है.

अब बैंक में पैसा सिर्फ पड़ा नहीं रहेगा, बल्कि FD जैसी कमाई भी करेगा. कई बैंक ग्राहकों को ऐसी सुविधा दे रहे हैं, जिससे सेविंग अकाउंट में पड़ा पैसा भी फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी ब्याज दर पर बढ़ सकता है. इसे ही कहते हैं Sweep-in FD या Auto Sweep Facility.

इस स्कीम में आपका सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आपस में लिंक रहता है. जब आपके सेविंग अकाउंट में तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा होता है, तो बैंक उस अतिरिक्त रकम को अपने आप FD में बदल देता है. इससे उस हिस्से पर सेविंग अकाउंट के 3–4% के बजाय FD जैसी 6–7% ब्याज दर मिलने लगती है.

उदाहरण के लिए, अगर आपके सेविंग अकाउंट में 1 लाख रुपये पड़े हैं और बैंक ने ऑटो स्वीप लिमिट 50,000 रुपये तय की है, तो बाकी 50,000 रुपये अपने आप FD में कन्वर्ट हो जाएंगे. जरूरत पड़ने पर जब आप पैसा निकालेंगे, तो FD का उतना हिस्सा अपने आप ब्रेक होकर अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा.
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इस सुविधा में सिर्फ उतनी ही राशि निकाली जाती है, जितनी जरूरी होती है. बाकी रकम FD में बनी रहती है और उस पर सामान्य ब्याज मिलता रहता है.

इस सुविधा में सबसे बड़ा फायदा यह है कि ब्याज का नुकसान नहीं होता और लिक्विडिटी बनी रहती है यानी पैसा भी सुरक्षित और जरूरत पड़ने पर तुरंत उपलब्ध.

कई बैंक जैसे SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank अपने ग्राहकों को Sweep-in FD की सुविधा देते हैं.

कुछ बैंकों में इस सुविधा के लिए न्यूनतम राशि (जैसे ₹25,000 या ₹50,000) तय होती है और FD की अवधि भी सीमित हो सकती है.

अलग-अलग बैंकों में स्वीप लिमिट, ब्याज दर और FD अवधि की शर्तें अलग हो सकती हैं. इसलिए अकाउंट एक्टिवेट करने से पहले बैंक की डिटेल्स जरूर देखें
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