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Bollywood Movies with Same Villain Name : वैसे तो बॉलीवुड में फिल्में में विलेन के नाम हर बार अलग ही होते हैं, फिर भी कुछ ऐसी फिल्में भी हैं जिनमें विलेन का नाम एक जैसा था. वैसे भी हीरो से ज्यादा विलेन का नाम दर्शकों के दिल-दिमाग में याद रहता है. इसलिए विलेन का नाम सबसे अनोखा रखा जाता है. शोले के गब्बर सिंह को भला कौन भुला सकता है. यह नाम अमजद खान की हमेशा के लिए पहचान बन गया. 10 साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में सिनेमाघरों में आई थीं, जिनमें विलेन का नाम एक जैसा था. पहली फिल्म जहां सुपरफ्लॉप रही, वहीं दूसरी मूवी हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमर हो गई. यह मूवी मील का पत्थर साबित हुई.

बॉलीवुड की हर फिल्म में मेकर्स की पहली कोशिश यही रहती है कि विलेन का सबसे यूनिक हो. 70-80 और 90 के दशक में मेकर्स विलेन का नाम इतना यूनिक रखते थे कि थिएटर्स से निकलने के बाद यह नाम कई दिनो-महीनों तक दर्शकों के जेहन में बना रहता था. कुछ विलेन के किरदार-नाम इतने पॉप्युलर हुए कि वो अमर हो गए. 1987 में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसके विलेन का नाम देश का बच्चा-बच्चा जानता है. अनिल कपूर-श्री देवी स्टारर इस फिल्म में अमरीश पुरी ने ‘मोगैंबो’ का किरदार निभाया था. विलेन ‘मोगैंबो’ और उसका बोला हुआ डायलॉग ‘मोगैंबो खुश हुआ’…. हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गए लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘मोगैंबो’ नाम का विलेन 1977 में आई एक फिल्म में पहली बार नजर आया था. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……..

19 सितंबर 1977 में विनोद खन्ना-नीतू सिंह की एक फिल्म ‘महा बदमाश’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म में विनोद खन्ना, नीतू सिंह लीड रोल में थे. बिंदु, पिंचू कपूर, इम्तियाज खान, ओम शिवपुरी, रजा मुराद सहायक भूमिकाओं में थे. फिल्म का डायरेक्शन आरजी ठाकेर ने किया था. प्रोड्यूसर स्वर्ण सिंह थे. यह एक एक्शन क्राइम-थ्रिलर फिल्म थी. मूवी तो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी लेकिन इस फिल्म में विलेन का नाम ‘मोगैंबो’ था. पूरी फिल्म में उसकी शक्ल नजर नहीं आती. मास्क पहना हुआ था. आवाज रजा मुराद की थी. क्लाइमैक्स में वो ओम शिवपुरी निकलता है.

फिल्म में विनोद खन्ना जब उसका परिचय पूछते हैं तो मास्क पहने शख्स कहता है, ‘तुम जैसे कीमती नगों का जौहरी, नाम मोगैंबो है और पहचान है यह छड़ी.’ फिल्म के क्लाइमैक्स में मास्क मैन कहता है, ‘मोगैंबो क्राइम की दुनिया का सबसे बड़ा दिमाग है.’ यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.
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विनोद खन्ना की ‘महा बदमाश’ फिल्म के रिलीज होने के पूरे 10 साल बाद अनिल कपूर-श्रीदेवी स्टारर फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ आई थी. सलीम-जावेद ने स्क्रिप्ट लिखी थी. शेखर कपूर ने फिल्म का डायरेक्शन किया था. फिल्म को अनिल कपूर के बड़े भाई बोनी कपूर और पिता सुरेंद्र कपूर ने प्रोड्यूस किया था. सिनेमेटोग्राफी बाबा आजमी की थी जो शबाना आजमी के भाई हैं. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीत जावेद अख्तर ने लिखे थे.

मिस्टर इंडिया फिल्म के बनने की कहानी बड़ी रोचक है. 1897 में ब्रिटिश लेखक एचजी वेल्स का एक साइंस फिक्शन उपन्यास छपा था. नाम था : द इनविजिवल मेन. इस उपन्यास के आधार पर कई फिल्में बनीं. 1936 में ‘मिस्टर एक्स’, फिर 1956 में ‘मिस्टर एक्स’ नाम से नाना भाई भट्ट की फिल्म आई. अशोक कुमार इसमें हीरो थे. फिर 1964 में एक फिल्म ‘मिस्टर एक्स इन बॉम्बे’ आई जिसमें किशोर कुमार-कुमकुम लीड रोल में थे. 1971 में एक फिल्म ‘ऐलान’ आई थी जिसमें विनोद खन्ना-विनोद मेहरा और रेखा लीड रोल में थे. इस फिल्म में इनविजिवल का कॉन्सेप्ट था.

मिस्टर इंडिया टाइटल से 1961 में भी एक फिल्म आई थी. जीपी सिप्पी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर थे. गीता बाली, आईएस जोहर, हेलेन और फिरोज खान फिल्म में लीड रोल में थे. 1987 की मिस्टर इंडिया का प्रोड्यूसर पहले जीपी सिप्पी ही होने वाले थे लेकिन उनकी शान फिल्म उतनी नहीं चली थी. रमेश सिप्पी को डायरेक्शन करना था. फिल्म की स्टोरी में स्पेशल इफेक्ट की जरूरत थी. अमिताभ बच्चन को हीरो के तौर पर लिया जाना था. ऐसे में उन्होंने फिल्म छोड़ दी.

रमेश सिप्पी ने जब फिल्म करने से इनकार कर दिया तो सलीम-जावेद ने अमिताभ के साथ इस फिल्म को बनाने का फैसला किया. अमिताभ ने इनकार किया तो राजेश खन्ना से बात की. उन्होंने भी फिल्म से इनकार कर दिया. मिस्टर इंडिया को लेकर एक और किस्सा प्रचलित है. निर्माता-निर्देशक प्रमोद चक्रवर्ती ने अमिताभ बच्चन की आवाज रिकॉर्ड कर ली थी. फिल्म के मुहुर्त के समय अमिताभ विदेश में थे. ऐसे में उनकी आवाज को टेप रिकॉर्डर के जरिये सुनवाया गया. यहीं से सलीम-जावेद को मिस्टर इंडिया फिल्म का आइडिया आया. मिस्टर इंडिया के निर्माण से एक और किस्सा भी इंडस्ट्री में प्रचलित है. उन्हीं दिनों शबाना आजमी- अमोल पालेकर की एक फिल्म ‘मिस्टर एक्स’ बन रही थी. यह फिल्म भी ‘इनविजिवल मेन’ पर थी. यह फिल्म 1984 में रिलीज भी हुई थी.

अनिल कपूर के भाई बोनी कपूर मिस्टर इंडिया को प्रोड्यूस करने के लिए तैयार हो गए लेकिन उनकी शर्त थी कि हीरो अनिल कपूर होंगे. बोनी कपूर ने श्रीदेवी को फिल्म में लिया. श्रीदेवी उन दिनों स्टार थी. 10 लाख की फीस ऑफर की. शेखर कपूर को डायरेक्टर के तौर पर लिया. फिल्म की कहानी में कई बदलाव किए गए. हीरो का रोल बढ़ाया गया.

मिस्टर इंडिया में अमरीश पुरी के अलावा, अशोक कुमार, अन्नू कपूर, शरत सक्सेना, सतीश कौशिक नजर आए थे. सतीश कौशिक का नाम कैलेंडर था. वो शेखर कपूर के असिस्टेंट डायरेक्टर थे. फिल्म जब पूरी हो गई तो विलेन मोगैंबो का किरदार लिखा गया. ‘मोगैंबो खुश हुआ’ डायलॉग से शेखर कपूर खुश नहीं थे. जावेद अख्तर ने कहा था कि यह डायलॉग बहुत पॉप्युलर होगा और लोग अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे. हुआ भी ऐसा ही.

मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी की साड़ी वाले आइकॉनिक लुक भी खास चर्चा होती है. जाबांज फिल्म में एक्ट्रेस ने इसी तरह की साड़ी पहनी थी. फिल्म के एक सॉन्ग ‘काटे नहीं कटते दिन और रात’ में श्रीदेवी के सेंसुअल डांस ने दर्शकों को दीवाना बना लिया था. किशोर कुमार और अलीश चिनॉय ने यह गाना गाया था. इस सॉन्ग की शुरुआती धुन 1961 की मूवी ‘ब्वॉयफ्रेंड’ से मिलती है. शंकर जयकिशन का म्यूजिक था. गाने के बोल थे : ‘धीरे चल-धीरे चल, ऐ भीगी हवा, मेरे बुलबुल की है नींद जवां’. यही धुन 1966 की फिल्म ‘तस्वीर’ में सुनाई दी थी. संगीतकार सी. रामचंद्रन थे. गाने के बोल थे : ‘देने वाला दो दिल देता’. श्री देवी ने यह आइकॉनिक सॉन्ग 101 डिग्री बुखार पर फिल्माया था.

मिस्टर इंडिया का बैकग्राउंड बहुत ही यूनिक था. फिल्म की शूटिंग 6 जुलाई 1985 से शुरू हुई थी. फिल्म के 25 लाख ऑडियो कैसेट बिके थे. 1987 की यह दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. पहले नंबर पर अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी धर्मेंद्र की फिल्म हुकूमत रही थी. मिस्टर इंडिया का बजट करीब 3.8 करोड़ का था. कुल कलेक्शन 10 करोड़ का रहा था. यह फिल्म कल्ट क्लासिक मूवी मानी जाती है. आगे चलकर श्री देवी ने बोनी कपूर से 2 जून 1996 को शादी कर ली. अनिल कपूर रिश्ते में उनके देवर थे. अनिल कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो श्रीदेवी के पैर छुआ करते थे.
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