[ad_1]
Last Updated:
Damoh News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक महिला ने 10वें बच्चे को जन्म दिया है. महिला की डिलीवरी अस्पताल में हुई. जच्चा और बच्चा स्वस्थ हैं.
जच्चा और बच्चा स्वस्थ हैं.रिपोर्ट- आशीष कुमार जैन, दमोह. पिछले कुछ दशकों से ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ का नारा जोरशोर से सुनाई देता है और लोगों ने इस नारे को माना भी. ज्यादातर लोग एक या दो बच्चे पैदा करते हैं और उन्हीं की परवरिश में जुटे रहते हैं. सरकारों ने भी सरकारी मुलाजिमों के लिए दो संतानों का नियम बना दिया और दो से ज्यादा बच्चों के होने पर कई सरकारी मुलाजिमों पर कार्रवाई भी देखने को मिली. आमतौर पर देश में छोटे परिवारों की कल्पना मूर्त रूप भी ले रही है. हालांकि गाहे-बगाहे कुछ हस्तियों के बयान जरूर सामने आते हैं, जब वे ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात आम लोगों से करते हैं लेकिन ये बयान कहीं न कहीं राजनीति से प्रेरित होते हैं. इस बीच मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक अलग खबर सामने आई है, जहां एक महिला ने 10वीं संतान को जन्म दिया है. जिले के रनेह स्वास्थ्य केंद्र में आदिवासी समुदाय की महिला कुसुम आदिवासी ने 10वें बच्चे को जन्म दिया और अब महिला सुर्खियों में है.
38 साल की कुसुम की शादी 18 साल पहले हुई थी और एक साल बाद उसने बेटे को जन्म दिया. आज यह बेटा 17 साल का है. उसके बाद कुसुम ने 8 और संतान जन्मीं और अब दो दिन पहले 10वीं संतान के रूप में उसने बेटे को जन्म दिया है. इन 10 संतानों में कुसुम की अब 7 बेटियां और तीन बेटे हैं. खास बात यह है कि अब तक हुई 9 डिलीवरी नार्मल डिलीवरी थीं. कुसुम ने घर में ही सारे बच्चों को जन्म दिया लेकिन इस बार 10वीं संतान का मामला गड़बड़ा गया और महिला हाई रिस्क में आ गई. इलाके की आशा कार्यकर्ता लगातार इस महिला की मॉनिटरिंग कर रही थी. हाई रिस्क में आई कुसुम को वो रनेह के सरकारी अस्पताल लेकर आई.
अस्पताल में दिया बच्चे को जन्म
कुसुम के लिए यह पहला मौका था, जब वह अस्पताल में बच्चे को जन्म दे रही थी और यहां भी उसपर ईश्वरीय कृपा ही कहेंगे कि हाई रिस्क में होने के बाद भी उसे ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ी और उसने 10वें बच्चे को भी नार्मल डिलीवरी के जरिए ही जन्म दिया. इस डिलीवरी के बाद कुसुम और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और उन्हें कोई खतरा नहीं है. आज के युग में इस तरह के मामले बड़े अजीब लगते हैं और देखने-सुनने के बाद चर्चा भी बनते हैं. यही इस मामले में हो रहा है. लोग 10 संतानों को लेकर चर्चा कर रहे हैं.
कुसुम कोई पहली महिला नहीं
ऐसा नहीं है कि यह महिला कोई पहली महिला है, जिसकी 10 संतानें हैं बल्कि कुछ दशकों पहले तक यह संख्या इससे भी ज्यादा बड़ी होती थी लेकिन समय के साथ लोगों ने परिवार नियोजन अपनाया. सरकार और समाज की बातों को माना और ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की बात को आत्मसात किया और परिवार का स्वरूप सीमित कर लिया.
बच्चों को बताया ईश्वर का प्रसाद
कुसुम के 43 वर्षीय पति नंदराम आदिवासी मजदूर हैं और अपने भरे-पूरे परिवार को लेकर खुश हैं. वह बच्चों को ईश्वर का प्रसाद मानते हैं और गर्व से कहते हैं कि उन्हें भगवान ने इतने बच्चे दिए. हालांकि अब जब आंकड़ा 10 पर पहुंच गया, तो नंदराम कह रहे हैं कि यह सिलसिला बंद होगा और पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन कराया जाएगा. अब वे बच्चे पैदा नहीं करेंगे. 10 संतानों के बाद परिवार नियोजन का उनका प्लान जल्दी ही धरातल पर दिखेगा. वहीं 17 साल का उनका बेटा भी अपने भाई की देखरेख के साथ मां की देखभाल में जुटा है जबकि बाकी के भाई-बहन भी अपने घर में एक और भाई को पाकर खुश हैं.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
[ad_2]
Source link