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2011 में कीपर धोनी ने जीता था वर्ल्ड कप और एक कीपर ने जीता था एवरेस्ट , जिंदगी दांव पर लगाकर वो आसमान छूने निकला था

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न्यूजीलैंड के क्रिकेटर एडम परोरे की. वो एवरेस्ट पर चढ़ने वाले इकलौते इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं. उन्होंने ये कारनामा 2011 में 40 साल की उम्र में किया था और इसके लिए अपनी जान की बाजी तक लगा दी थी. परोरे ने एक इंटरव…और पढ़ें

23 जनवरी 2011 को छोटे कद के कीपर ने किया था बड़ा कारनामा

एक विकेटकीपर जिसने की एवरेस्ट की चढ़ाई

नई दिल्ली. आसमान में भी सुराख हो सकता है एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों. ये लाइन किसी भी स्पोर्ट्समैन पर फिट बैठ सकती है क्योंकि कभी हार ना मानने का जज्बा जो एक खिलाड़ी में होता है वो किसी आम इंसान में नहीं होता. मैदान कोई भी हो अगर आप खेल से जुड़े है तो कोई भी बाधा आपको मंजिल तक पहुंचने से रोक नहीं सकती. कुछ ऐसे ही किरदार थे न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज एडम परोरे.

न्यूजीलैंड में वैसे भी कई ऐसे क्रिकेटर हुए है जो क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी महारत रखते थे कुछ खिलाड़ियों ने तो रग्बी, हॉकी और क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और समान अधिकार के साथ प्रदर्सनम भी किया. पर एडम परोरे ने जो किया वो एक मिसाल है जिसकी आज भी चर्चा होती है .न्यूजीलैंड के लिए 1990 में डेब्यू करने वाले  एडम परोरे ने जब खेल को अलविदा कहा तो वो करने का फैसला किया जिसको सुनकर आप हैरान रह जाएगें.

जान हथेली पर रखकर एवरेस्ट पर की चढ़ाई 

अक्सर कोई भी खिलाड़ी  अपने यादगार प्रदर्शन , जीती हुई ट्रॉफी या खेल में बेहतरीन योगदान के लिए जाने जाते हैं. लेकिन एक ऐसा भी क्रिकेटर है, जो अपने क्रिकेट के करियर से ज्यादा दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए मशहूर है. हम बात कर रहे हैं न्यूजीलैंड के क्रिकेटर एडम परोरे की. वो एवरेस्ट पर चढ़ने वाले इकलौते इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं. उन्होंने ये कारनामा 2011 में 40 साल की उम्र में किया था और इसके लिए अपनी जान की बाजी तक लगा दी थी. परोरे ने एक इंटरव्यू खुलासा किया था कि जब वो माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ रहे थे, तब बीच में ही उनका ऑक्सीजन खत्म हो गया था. इससे उन्हें सांस लेने में समस्या होने लगी और नौबत मौत तक आ गई थी.इसके बाद परोरे के साथ गए शेरपा ने मदद की और उनकी जान बचाई. चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने करीब 20 मिनट का समय बिताया था. लेकिन समस्या अभी खत्म नहीं हुई थी. नीचे उतरते वक्त उनकी तबीयत बुरी बिगड़ गई. इससे एडम परोरे के मुंह से आवाज तक आनी बंद हो गई थी. हालांकि, वो किसी तरह शेरपाओं की मदद से नीचे आ गए थे.एडम परोरे के मुताबिक उन्हें एडवेंचर का जुनून तो था ही. इसके जरिए उन्हें चैरिटी करने का भी अवसर मिला. इसलिए उन्होंने इस काम को किया. बता दें इससे उन्होंने बच्चों की चैरिटी के लिए करीब 79,000 डॉलर यानि करीब 68 लाख 34 हजार रुपये जुटाए थे. एवरेस्ट चढ़ने के लिए परोरे ने 3 गाइड, 10 शेरपा और 7 दूसरे पर्वतारोहियों की मदद ली थी.

कमाल के कीपर थे परोरे 

किवी टीम के लिए कई अहम योगदान करने वाले एडम परोरे ने न्यूजीलैंड के लिए 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था.  वो कीवी टीम के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर खेलते थे. समय समय पर परोरे को बतौर ओपनिंग बल्लेबाज भी इस्तेमाल किया गाय. परोरे ने  अपने करियर में 78 टेस्ट में 26.28 की औसत 2865 रन, 179 वनडे में 25.68 की औसत से 3314 रन बनाए थे. वहीं विकेटकीपर के तौर पर उन्होंने 204 शिकार किए थे. परोरे ने साल 12 साल खेलने के बाद 2002 में 31 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. बतौर कीपर उनकी तकनीक की आज भी तारीफ होती है और न्यूजीलैंड के टॉप क्लास खिलाड़ियों में उनकी गिनती होती है .

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23 जनवरी 2011 को छोटे कद के कीपर ने किया था बड़ा कारनामा

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