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छतरपुर जिले के छत्रसाल कॉलोनी में पिछले 25 सालों से सतना के कई परिवार झुग्गियों में रह रहे हैं. उनके पास स्थाई जगह या जमीन खरीदने के पैसे नहीं हैं. वे सरकार से किसी भी जगह पर जमीन आवंटित करने की मांग कर रहे हैं.
सूरज लोकल 18 से बातचीत करते हुए
छतरपुर: छतरपुर जिले के छत्रसाल कॉलोनी में पिछले 25 सालों से सतना के कई परिवार झुग्गी बनाकर अस्थाई तौर पर रह रहे हैं. लेकिन शासन ने अभी तक उन्हें रहने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है. बस्ती के लोगों का कहना हैं कि सरकार उनके लिए जमीन आवंटित करे ताकि बच्चों का स्कूल में प्रवेश हो सके.
बस्ती के लोगों का कहना हैं कि सरकार हमें जिले के किसी भी कोने में जमीन आवंटित कर दे, चाहे वहां जंगल हो या पहाड़. जमीन आवंटित होने से हम स्थायी तौर पर अपना धंधा कर सकते हैं और बच्चों का भविष्य भी बना सकते हैं.
बच्चों के नहीं हो पा रहे हैं एडमिशन
लोकल 18 से सूरज बताते हैं कि हम यहां तब से झुग्गी बनाकर रह रहे हैं, जब यहां जंगल था. सतना के नागौद से आकर यहां 20 साल पहले हमनें झुग्गी बनाई थी. उस समय नगर पालिका पूरे शहर का कचड़ा यहीं डंप करती थी. हमारी सरकार से यही गुजारिश है कि हमें रहने को जमीन दी जाए, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य बन जाए. अभी स्कूल में एडमिशन ही नहीं हो पाता है, क्योंकि यहां के कागजात नहीं बने हैं.
वहीं कुसमा बताती हैं कि जब इंदिरा गांधी की मृत्यु हुई थी तब से हम यहीं रह रहे हैं. चित्रकूट से यहां आए थे, वहां हमारा धंधा नहीं चलता है. इसलिए अब यहां से जा भी नहीं सकते हैं.
जंगल या पहाड़ में रहने को हैं तैयार
मनीषा बताती हैं कि हमारी सरकार से विनती है कि हमें जिले के किसी भी कोने में जमीन आवंटित कर दे, चाहे वहां जंगल हो या पहाड़, लेकिन जिले में ही मिल जाए. क्योंकि छतरपुर में ही हमारा धंधा चलता है. यहां झाड़ू -पत्ती बेचकर अपने बाल-बच्चों का पेट पाल लेते हैं. सरकार रहने को स्थायी जगह दे देगी तो हमारे बच्चों का भविष्य बन जाएगा.
जमीन मिल जाएगी तो धंधा बदल लेंगे
संतोला बताती हैं कि मेरा पति भी नहीं हैं. जिस दिन धंधा नहीं चलता है तो उस दिन बच्चे भूखे भी सो जाते हैं. अगर स्थायी रहने को मिल जाए तो दूसरा धंधा ही कर सकते हैं. बच्चे भी स्कूल में पढ़ने लगेंगे.
Chhatarpur,Madhya Pradesh
January 17, 2025, 22:17 IST
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