[ad_1]
Last Updated:
आज के समय में लोगों के लिए बर्फ कोई बड़ी चीज नहीं है. अगर आपको बर्फ चाहिए तो बस फ्रीजर में पानी डालिये और कुछ ही देर में आपको बर्फ मिल जाएगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से सैंकड़ों साल पहले जब फ्रिज का नामोनिशान नहीं था, तब बर्फ कैसे जमाई जाती थी?
भारतीयों की ट्रिक ने किया दुनिया को हैरान (इमेज- फाइल फोटो)तकनीक ने लोगों की लाइफ काफी आसान कर दी है. आज आपको बर्फ चाहिए तो फ्रिज का दरवाजा खोलो, आइस-ट्रे निकालो और बर्फ आपके सामने है. लेकिन 300 साल पहले, जब ना बिजली थी, ना फ्रिज, ना कोई मशीन, तब भी उत्तर भारत के लोग टनों बर्फ बनाते थे, वो भी खुले आसमान के नीचे! ये कोई जादू नहीं था, ये था शुद्ध भारतीय विज्ञान.
साल 1775 में इलाहाबाद (आज का प्रयागराज) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का अफसर रॉबर्ट बार्कर रात में टहल रहा था. उसने देखा कि शहर के बाहर सैकड़ों मजदूर काम कर रहे थे. खेतों में सैकड़ों छोटे-छोटे गोल गड्ढे खोदे गए थे. हर गड्ढा 2-3 फीट चौड़ा और सिर्फ 8-10 इंच गहरा था. हर गड्ढे में 2-3 इंच पानी डाला गया था. इसके चारों तरफ सूखे पुआल की मोटी दीवार बनाई गई थी. पहले तो अफसर समझ नहीं पाया. लेकिन अगली सुबह उसने जो देखा, उसने उसके होश उड़ा दिए. अफसर ने पहली बार बर्फ की परत देखी. आखिर कैसे भारतीयों ने किया था ये चमत्कार.
डायरी से खुला रहस्य
अफसर ने भारत में बर्फ जमाने की जो तकनीक देखी थी, उसका जिक्र उसने अपनी डायरी में किया. उसने लिखा- “I observed ice formed in shallow earthen pans under the open sky, though the thermometer stood many degrees above the freezing point. The natives call these ice-makers ‘barf-saaz’.” उसने इसे जादू समझा और लंदन की रॉयल सोसाइटी को पूरा पेपर भेज दिया. 1775 में वो रिपोर्ट छपी जिसमें दुनिया में पहली बार “रेडिएटिव कूलिंग” का लिखित प्रमाण मिला. अब सवाल ये था कि आखिर ये बर्फ कैसे जमती थी? इसका तरीका बेहद सरल और गजब का था. बर्फ जमाने के लिए सिर्फ साफ, बादल-रहित सर्द रातें चाहिए थी और साथ में चाहिए था पुआल.
ऐसे जमती थी बर्फ
बिना फ्रिज के बर्फ जमाने के लिए साफ़ रात में उथले मिट्टी के बर्तन या गड्ढों में बहुत कम पानी रखा जाता था.चारों तरफ सूखा पुआल बिछाया जाता था. ये इंसुलेशन का काम करता था, जमीन की गर्मी पानी तक नहीं आने देता था. रात में पृथ्वी अपनी गर्मी इन्फ्रारेड किरणों के रूप में अंतरिक्ष में फेंकती है. जब पानी खुले आसमान में रखा जाता था, तो उसकी सारी गर्मी तेजी से ऊपर निकल जाती थी. पुआल जमीन की गर्मी रोकता है. इसका नतीजा होता था पानी का तापमान हवा से 15-20 डिग्री नीचे चला जाता था और बर्फ बन जाती थी. इलाहाबाद, फिरोजपुर, लखनऊ, आगरा, पटना– पूरे गंगा के मैदान में “बरफखाने” थे. एक रात में 50 से 100 टन तक बर्फ बनाई जाती थी. बर्फ को गहरे गड्ढों में भूसा डालकर महीनों स्टोर किया जाता था. गर्मियों में नवाब, राजा-महाराजा और अमीर लोग इसे शर्बत, फालूदा, कुल्फी और दवाइयों में इस्तेमाल करते थे.
About the Author
न्यूज 18 में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. रीजनल सेक्शन के तहत राज्यों में हो रही उन घटनाओं से आपको रूबरू करवाना मकसद है, जिसे सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि कोई वायरल कंटेंट आपसे छूट ना जाए.
[ad_2]
Source link