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Superhit Hindi Songs based on Shivranjani Raag : कर्णप्रिय म्यूजिक के बिना बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना नहीं की जा सकती. किसी भी एक्शन-पैक्ड पावरफुल मूवी हो, उसमें एक-दो सॉन्ग डायरेक्टर-प्रोड्यूसर डाल देते हैं जो फिल्म को गति देते हैं. कई बार तो किसी फिल्म के गाने इतने पॉप्युलर हो जाते हैं कि मूवी को देखने की लालसा दर्शकों के मन में तीव्र हो जाती है. ऐसी ही किसी खास राग के गाने भी दिल को भा जाते हैं. 31 साल के अंतराल में ऐसी 5 फिल्में सिनेमाघरों में आईं जिनमें शिवरंजनी राग पर बेस्ड गाने थे. पांचों फिल्में सुपरहिट निकलीं. आज भी इन गानों की वजह से याद की जाती हैं.

शिवरंजनी राग बहुत ही कर्णप्रिय होता है. इसमें करुण-शांत रस से भरे गाने होते हैं. इसमें 5 स्वर होते हैं : सा, रे, गा, प, ध. इसमें दो स्वर मा और नि वर्जित होते हैं. अगर भोपाली राग के शुद्ध गंधार को शीतल कर दिया जाए तो शिवरंजनी राग बन जाता है. शिवरंजनी राग का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल बॉलीवुड फिल्मों में किया गया है. 31 साल में पांच ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर आईं जिनमें शिवरंजनी राग से सजे गाने सुनने को मिले. ये गाने हमेशा-हमेशा के लिए दिलों में बस गए. पांचों फिल्में भी सुपरहिट निकलीं. ये फिल्में थीं : नागिन (1954), ब्रह्मचारी (1968), जंजीर (1973), मुकद्दर का सिकंदर (1978) और प्यार झुकता नहीं (1985).

सबसे पहले बात करते हैं 1954 में आई नागिन फिल्म की जिसका म्यूजिक सुपर-डुपर हिट रहा था जिसे संगीतकार हेमंत कुमार-रवि ने तैयार किया था. फिल्म में प्रदीप कुमार-वैजयंती माला और जीवन लीड रोल में थे. यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. डायरेक्टर नंदलाल जसवंतलाल थे. कहानी बिजन भट्टाचार्य ने लिखी थी और स्क्रीनप्ले गीतकार राजेंद्र कृष्ण ने लिखा था. प्रोड्यूसर एस. मुखर्जी थे. फिल्म में 13 गाने थे लेकिन इसके दो गाने बहुत पॉप्युलर हुए. ये गाने थे : मेरा दिल ये पुकारे आ जा, मेरे गम के सहारे आ जा, भीगा-भीगा है समा, ऐसे में है तू कहां…’. फिल्म का यह गाना शिवरंजनी राग पर बेस्ड था. यह गाना आज भी दिल को उतनी ही ठंडक देता है. मन यादों में खो जाता है. नागिन फिल्म ने साउथ से आईं वैजयंती माला को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में स्टार बना दिया.

नागिन फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. 1954 में सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी. संगीतकार हेमंत कुमार-संगीतकार रवि ने नागिन फिल्म के लिए एक ऐसी धुन तैयार की जो आज भी करोड़ों दिल पर राज करती है. यह धुन थी ‘मेरा तन डोले..मेरा मन डोले..’. बीन की यह धुन आज भी हर प्रोग्राम में सुनाई देती है. संगीतकार रवि ने यह धुन हारमोनियम पर बजाई थी. फिर इस धुन को और खास बनाने के लिए नए म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट कल्वायलिन का इस्तेमाल किया था. कल्वायलिन को संगीतकार कल्याणजी ने बजाया था. कल्याण जी उस समय हेमंत कुमार के निर्देशन में संगीत सीख रहे थे. इसी धुन पर एक गाना ‘मेरा तन डोले, मेरा मन डोले..’. लता मंगेशकर ने इस गाने को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया. आज भी किसी महफिल-प्रोग्राम में यह धुन हारमोनियम पर समां बांधने के लिए सबसे पहले बजाई जाती है.
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इस लिस्ट में दूसरी फिल्म शम्मी कपूर-मुमताज की ब्रह्मचारी शामिल है. राज श्री और प्राण भी अहम भूमिकाओं में थे. यह फिल्म 26 अप्रैल 1968 को रिलीज हुई थी. स्टोरी सचिन भौमिक ने लिखी थी. डायलॉग आनंद रोमानी ने लिखे थे. गीतकार शैलेंद्र और संगीतकार शंकर-जयकिशन थे. फिल्म का एक पॉप्युलर सॉन्ग ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास’ शिवरंजनी राग पर बेस्ड था. यह गीत हसरत जयपुरी ने लिखा था. फिल्म का एक और गाना ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई’ भी हसरत जयपुरी ने लिखा था. वैसे यह गाना 1961 की फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ के लिए रिकॉर्ड हुआ था. देवानंद को यह गाना पसंद नहीं आया था तो फिल्म से निकाल दिया गया. फिर इस गाने को 1966 की ‘सूरज’ फिल्म में रखने की बात चली लेकिन राजेंद्र कुमार को यह सॉन्ग पसंद नहीं आया था. आगे चलकर ब्रह्मचारी में इसे रखा गया, जो कि फिल्म की पहचान बना गया. ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर’ गाने के लिए मोहम्मद रफी को बेस्ट फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था.

ब्रह्मचारी फिल्म के प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी थे. निर्देशन भप्पी सोनी ने किया था. ब्रह्मचारी फिल्म की कहानी जब शम्मी कपूर को सुनाई गई थी तो उन्होंने ठीक से जवाब नहीं दिया था. जीपी सिप्पी ने राजेंद्र कुमार को साइन कर लिया. फिर एक दिन बातों-बातों में राजेंद्र कुमार ने शम्मू कपूर को ब्रह्मचारी फिल्म के बारे में बताया तो वो हैरान रह गए. उन्होंने प्रोड्यूसर से बात की. फिर राजेंद्र कुमार को फिल्म छोड़ने के लिए मनाया. इसी फिल्म की शूटिंग शम्मी कपूर ने मुमताज को प्रपोज किया था. वह चाहते थे कि मुमताज शादी के बाद फिल्मों से दूरी बना लें लेकिन एक्ट्रेस को यह शर्त मंजूर नहीं थी. ब्रह्मचारी फिल्म में मुमताज ने जो साड़ी पहनी, वो स्टाइल बन गई. फिल्म के गाने बहुत पॉप्युलर हुए थे. ब्रह्मचारी फिल्म को कुल 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. 60 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 1.25 करोड़ की कमाई की थी. यह 1968 की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

<br />70 के दशक में एक ओर जहां अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहे थे. एक कामयाब फिल्म की तलाश में थे. वहीं दूसरी ओर एक ‘दिहाड़ी मजदूर’ भी फिल्मों में नाम कमाने की जद्दोजहद में लगा हुआ था. इस शख्स का नाम था : प्रकाश मेहरा. प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन का साथ मिलने से पहले चार हिट फिल्में ‘हसीना मान जाएगी,’ ‘मेला’, ‘समाधि’ और ‘हाथ की सफाई’ बना चुके थे. 1973 में उन्हें सलीम-जावेद का साथ मिला. अमिताभ बच्चन के साथ उन्होंने फिल्म ‘जंजीर’ बनाई. 15 करोड़ की कमाई करके जंजीर ने इतिहास रच दिया था. फिल्म ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया. उन्हें ‘एंग्रीमैन’ के नाम से जाना जाने लगा. जंजीर फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी -आनंद जी ने दिया था. फिल्म में कुल 5 गाने रखे गए थे. मूवी का एक गाना ‘बना के क्यों बिगाड़ा रे, बिगाड़ा रे नसीबा, ऊपरवाले, ऊपरवाले’ शिवरंजनी राग पर आधारित था. फिल्म के चार गाने प्रकाश मेहरा ने लिखे थे. सिर्फ एक गाना ‘यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी’ गुलशन बावरा ने लिखा था. गुलशन बावरा ने फिल्म में एक्टिंग भी की थी.

प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन के साथ 5 सुपरहिट-ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाईं. इन्हीं में से एक थी ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जो कि 27 अक्टूबर 1978 को रिलीज हुई थी. यह एक मल्टीस्टारर एक्शन क्राइम ड्रामा फिल्म थी. निर्देशन-प्रोडक्शन प्रकाश मेहरा का था. कहानी लक्ष्मीकांत शर्मा की थी. स्क्रीनप्ले विजय कौल ने लिखा था. कादर खान ने डायलॉग लिखे थे. गीतकार अनजान -प्रकाश मेहरा थे. म्यूजिक कल्याण जी -आनंद जी का था. यह प्रकाश मेहरा की पहली सिनेमास्कोप फिल्म थी. प्रकाश मेहरा ने यह फिल्म दिलीपु कुमार की देवदास और राज कपूर की संगम फिल्म से इंस्पायर्ड होकर बनाई थी. दोनों फिल्मों की कहानी को इसमें मिक्स किया गया था. फिल्म के गाने सदाबहार थे. फिल्म का एक गाना ‘ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना’ शिवरंजनी राग पर बेस्ड था. यह गाना जब भी बजता है, दिल में हलचल पैदा कर देता है.

‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, राखी, रेखा, रंजीत, अमजद खान अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म का बजट एक करोड़ के करीब था और मूवी ने 8 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. मुकद्दर का सिकंदर फिल्म शोले और बॉबी के बाद 1970 के दशक की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है. 1978 अमिताभ बच्चन के करियर का बेस्ट साल था. इस साल सही मायने में सुपरस्टार थे. टॉप 10 में उनकी 5 फिल्में थीं.

आगे चलकर 1985 में मिथुन चक्रवर्ती की एक फिल्म आई थी जिसमें शिवरंजनी राग पर आधारित सॉन्ग था. इस गाने को सुनकर दिल आज भी भीग जाते हैं. थोड़ी देर के लिए मन खो जाता है. प्यार का एक अलग अहसास दिल में महसूस होता है. हम बात कर रहे हैं प्यार झुकता नहीं फिल्म की जिसे 15 जनवरी 1985 में रिलीज किया गया था. डायरेक्टर विजय सदाना के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, पद्मिनी कोल्हापुरे, डैनी डेन्जोंगपा और बिंदु लीड रोल में थे.<br />प्रोड्यूसर केसी बोकाड़िया थे. कहानी-गीत एचएस बिहारी ने लिखे थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने दिया था. वैसे तो फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे लेकिन मूवी का एक गाना ‘तुमसे मिलकर ना जाने क्यों’ शिवरंजनी राग पर आधारित था.

‘प्यार झुकता नहीं’ 1977 में आई पाकिस्तानी मूवी ‘आईना’ का रीमेक थी. आईना फिल्म में एक गाने की धुन को ज्यों का त्यों कॉपी किया गया था. गाने के बोल थे : ‘तुम मुझको दिल से, ना भुलाना, चाहे रोके, ये जमाना…’ इस मुखड़े को उठाकर गीतकार एसचएस बिहारी ने ‘तुमसे मिलकर, ना जाने क्यों…’ सॉन्ग लिखा था. इस गाने में ‘और भी कुछ याद आता है, याद आता है…’ ये शिवरंजनी नोट्स हैं. करीब 50 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 9 करोड़ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 1985 में बॉक्स ऑफिस पर कलेक्शन की रेस में यह फिल्म तीसरे नंबर पर थी.
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