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Sholay Trivia: बॉलीवुड के सिनेमा इतिहास में एक ऐसी महान फिल्म है, जिसकी नींव महज चार लाइन के आइडिया पर रखी गई थी. हैरानी की बात यह है कि इसकी पटकथा और किरदार पूरी तरह से पांच असली लोगों की ज़िंदगी से प्रेरित थे, जिनकी कहानियों ने इसे अमर बना दिया. इस फिल्म के लेखकों ने अपने निजी जीवन के अनुभवों को भी कथानक में पिरोया. यहां तक कि एक यादगार हास्य किरदार की प्रेरणा उन्हें अपने ही ससुराल से मिली. यह वह कालजयी कृति है, जिसने न सिर्फ भारतीय सिनेमा को पुनर्परिभाषित किया, बल्कि दर्शकों के दिलों पर भी राज किया

नई दिल्ली. ‘शोले’ एक ऐसी कालजयी फिल्म, जिसकी शुरुआत महज चार लाइनों के एक साधारण से आइडिया से हुई, लेकिन आगे चलकर वह भारतीय सिनेमा की धरोहर बन गई. इसकी कहानी किसी एक कल्पना से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन से जुड़ी पांच असल शख्सियतों से प्रेरित होकर गढ़ी गई थी. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म लिखते समय सलीम-जावेद की जोड़ी को अपने जीवन के बेहद निजी रिश्ते सास और ससुर तक याद आ गए थे. शुरुआती आइडिया जितना छोटा था, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतनी ही विराट साबित हुई. एक-दो नहीं फिल्म में सितारों की फौज थी, जिसने अपनी कहानी ही नहीं डायलॉग्स से आज तक दीवाना बना दिया है. इस फिल्म के कई किस्सों से आप वाकिफ होंगे, लेकिन आज जो किस्सा आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे.

15 अगस्त साल 1975 में फिल्म रिलीज हुई. रिलीज के बीद तीन दिनों तक फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी और फिल्म के स्टार्स की सांसें अटकी हुई थीं. क्योंकि फिल्म देखने के लिए दर्शक नहीं थे, लेकिन फिर तीन दिन बाद जब लोगों ने सिनेमाघरों का रुख किया तो रुकने का नाम नहीं लिया. फिल्म 50 साल पुरानी है, लेकिन आज भी चर्चाओं में है. आज ये फिल्म एक बार फिल्म थिएटर्स में हो गई है.

रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी ‘शोले’ अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के करियर में मील का पत्थर साबित हुई थी. यही नहीं, इस फिल्म को लिखने वाले सलीम खान और जावेद अख्तर के करियर में भी ‘शोले’ का बहुत अहम रोल रहा. क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म का कहानी सिर्फ 4 लाइन के आइडिया के साथ शुरु हुई थी. बाद में इसे सलीम-जावेद ने डेवलप किया.
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‘शोले’ की कहानी दो क्रिमिनल जय और वीरू पर आधारित थी. जहां जय का किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया, तो वहीं ‘वीरू’ धर्मेंद्र बने थे. ‘शोले’ में जय और वीरू के किरदार सलीम खान ने अपने दो दोस्तों पर लिखे थे. एक जो इंदौर के जागीरदार का बेटा था और दूसरा किसान था. एक का नाम था वीरेंद्र सिंह बायस तो दूसरे का जय सिंह राव कालेवर, दोनों सलीम खान के कॉलेज के दोस्त थे और उन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने जय-वीरू का किरदार लिखा था.

‘कितने आदमी थे?’ गब्बर का ये डायलॉग आज भी लोग बोलते हैं तो गब्बर का चेहरा लोगों के सामने आ जाता है. अमजद खान इस रोल के लिए फरवेट रहे. ‘शोले’ के डाकू गब्बर सिंह का किरदार असल जिंदगी के एक कुख्यात डकैत से प्रेरित था. बताया जाता है इस डाकू का नाम भी गब्बर था , जो खूब कुत्ते पालता था. 50 के दशक में ग्वालियर के आस-पास उसका आतंक था. सलीम खान को उनके पिता ने इस डाकू का कहानी सुनाई थी और उन्होंने इस कहानी में गड़ दी.

कहानी को पूरा करने के लिए सलीम-जावेद को अपने सास-ससुर तक याद आ गए, जो उन्होंने कहानी में उकेर दिए. शोले की ‘बसंती’ और ‘ठाकुर’ का किरदार उन्हीं से प्रेरित है. दरअसल, इसी तरह एक बार सलीम खान, हनी ईरानी की मां से मिलने गए थे और दोस्त की शादी के लिए बात की थी. वहीं, ‘ठाकुर’ के रोल में नजर आए संजीव कुमार का किरदार सलीम खान के ससुर से प्रेरित है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलीम खान ने ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव का किरदार अपने ससुर बलदेव सिंह चरक से प्रेरित होकर लिखा था. फिल्म में किरदार का नाम भी बलदेव सिंह ठाकुर रखा गया. सलीम खान के ससुर बलदेव सिंह चरक जम्मू कश्मीर के डोगरा राजपूत थे, जो अपने शासन और बहादुरी के लिए फेमस रहे.

शोले को तैयार होने में 6 साल लगे थे. क्या आप यकीन करेंगे की फिल्म का एक सीन तो 23 दिनों में और एक दूसरा सीन 3 साल में शूट हो पाया था. पहला सीन लो जिसमें गब्बर,ठाकुर के पूरे परिवार को मार देता है वो 23 दिन में शूट हो सका. वहीं, दूसरा है जय और राधा का एक सीन था, जिसको 3 साल में शूट किया जा सका. 2017 में खुद अमिताभ ने इसका खुलासा किया था. ये वो है, जिसमें जया अपने घर की पहली मंजिल के गलियारे में दीपक जला रही होती हैं और मैं बाहरी कमरे में बैठकर माउथ ऑर्गन बजाते हैं. रोशनी की गड़बड़ और रमेश सिप्पी की परफेक्ट होने की जिद्द की वजह से एक शॉट के लिए 3 साल लग गए.

आपको बता दें कि 50 साल पहले इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 35 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. कमाई का यह रिकॉर्ड 20 साल तक कोई भी फिल्म नहीं तोड़ पाई थी.
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