[ad_1]
Agency:Local18
Last Updated:
Andhra Pradesh Banyan Tree: आंध्र प्रदेश के कादिरी गांव में स्थित थिम्मम्मा मरीमनु विश्व का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है, जिसकी छत्रछाया 19,107 वर्ग मीटर में फैली हुई है.
विश्व का सबसे बड़ा बरगद
हाइलाइट्स
- थिम्मम्मा मरीमनु विश्व का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है.
- इसकी छत्रछाया 19,107 वर्ग मीटर में फैली हुई है.
- यह पेड़ संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए प्रसिद्ध है.
World Largest Banyan Tree: आंध्र प्रदेश में एक पेड़ है जो सबसे अलग है. ये सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि अपने आप में पूरा ‘जंगल’ है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आंध्र प्रदेश के कादिरी गांव में स्थित थिमम्मा मारीमानू विश्व का सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है. बता दें कि यह कोई साधारण पेड़ नहीं, इसकी छत्रछाया पूरे 19,107 वर्ग मीटर में फैली हुई है. यह इतना विशाल है कि चार फुटबॉल के मैदान भी इसके नीचे आराम से समा जाएं. 1989 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा फैलाव वाला बरगद घोषित किया था. थिम्मम्मा मरीमनु 550 साल से अधिक पुराना है.
क्या है इस पेड़ की खासियत
अब इसकी खासियत सुनिए—यह ऊपर की ओर नहीं, बल्कि चारों दिशाओं में फैलता चला जाता है. इसकी शाखाएं नीचे उतरती हैं, हवाई जड़ें जमीन में धंसती हैं और फिर एक नया तना बन जाता है. यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और देखते ही देखते यह अकेला पेड़ पूरा वन बन जाता है. कैलिफोर्निया के जनरल शेरमन ट्री जैसा ऊंचा नहीं, लेकिन यह अपनी चौड़ाई से सबको हैरत में डाल देता है.
संतान की प्राप्ति की मन्नत
बता दें कि थिम्मम्मा मरीमनु सिर्फ वनस्पति विज्ञान का अजूबा ही नहीं, बल्कि एक आस्था का केंद्र भी है. कहा जाता है कि यह पेड़ एक महिला, थिम्मम्मा के बलिदान का प्रतीक है. लोककथाओं के अनुसार, उसने अपने पति की चिता पर सती हो जाने के बाद, इसी स्थान पर यह विशाल बरगद उगा. यही कारण है कि हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं, खासकर वे जो संतान सुख की आस रखते हैं. लोग मानते हैं कि यहां आकर मन्नत मांगने से संतान की प्राप्ति होती है.
लेकिन ठहरिए, ये सिर्फ धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है. पारिस्थितिकी यानी Ecology के लिहाज से भी यह पेड़ बेहद महत्वपूर्ण है. यह सैकड़ों पक्षियों, चमगादड़ों और छोटे जीवों का घर है. इसकी विशाल जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकने का काम करती हैं. हालांकि, यह जहाँ होता है, वहां की इमारतों और सड़कों के लिए खतरा भी बन सकता है.
महाराष्ट्र के इस गांव में आज तक किसी ने नहीं बनाया खपरैल का घर! भगवान नृसिंह से है कनेक्शन
वैसे, बरगद के पेड़ों के साथ कुछ रहस्यमयी बातें भी जुड़ी हैं. आपने सुना होगा कि इनके नीचे रात में सोना अशुभ माना जाता है. इसका वैज्ञानिक कारण भी है—रात के समय ये कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिससे दम घुटने का खतरा रहता है. कुछ लोग मानते हैं कि इनके नीचे आत्माएं भटकती हैं और सूर्यास्त के बाद इनसे दूर ही रहना चाहिए.
January 31, 2025, 10:37 IST
[ad_2]
Source link