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8 year old Shaurya from Indore wrote book Normalise being different on his deaf father Know how child did this miracle

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Agency:News18 Madhya Pradesh

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Indore News: इंदौर के 8 वर्षीय शौर्य ने अपने बधिर पिता के लिए एक ऐसा काम किया है, जिससे सभी लोग हैरान हो गए है और इस वजह से पूरे शहर में इस छोटे से बच्चे की ही चर्चा हो रही है.

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शौर्य

शौर्य माता पिता के साथ 

इंदौर. आमतौर पर आठ साल के बच्चे खिलौनों से खेलते, शैतानियां करते और पढ़ाई से बचते नजर आते हैं, लेकिन क्या आपने कभी किसी बच्चे को इतनी कम उम्र में किताब लिखते देखा है? शायद ही देखा हो, लेकिन इन दिनों इंदौर का एक बच्चा सुर्खियों में है, जिसने अपने हुनर से यह करिश्मा कर दिखाया है. इस बच्चे ने अपने पिता पर किताब लिखी है, जो बधिर हैं. पिता पर किताब लिखना शायद मुश्किल हो, लेकिन इंदौर के आठ साल के लेखक शौर्य ने यह कर दिखाया है.

लोकल-18 के जरिए हम आपको बताते हैं कि 8 वर्षीय शौर्य पैट्रिक ने अपने पिता यश पैट्रिक पर ‘नॉर्मलाइज बीइंग डिफरेंट’ किताब लिखी है. शौर्य के पिता बधिर हैं, लेकिन शौर्य का कहना है कि वे उसके लिए हमेशा नार्मल ही हैं. इसी प्रेरणा से उसने 33 पृष्ठों की एक पुस्तक लिखी है. इस किताब में साइन लैंग्वेज की उपयोगिता को सरल तरीके से समझाया गया है.

शौर्य की मां शुचि ने बताया कि स्कूल असाइनमेंट के दौरान शौर्य ने मूक-बधिरों पर पुस्तक लिखने का निर्णय लिया. हमारे घर में साइन लैंग्वेज मातृभाषा की तरह है, क्योंकि उसके पिता साइन लैंग्वेज टीचर भी हैं. इस तरह पुस्तक लिखना आसान हो गया. कुछ जगह चुनौतियां आईं, लेकिन कहते हैं ना कि चाह है तो राह है. इस तरह रोजाना स्कूल के बाद शौर्य कुछ न कुछ पूछता और फिर हम उसे अपडेट करके लिखते. इसे करीब दस दिन में पूरा किया गया. बुक खासतौर पर कक्षा 3 से 4 के बच्चों के लिए लिखी गई है. इस किताब को पूरा करने की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इसमें किन चित्रों को शामिल किया जाए. कहां से लाएं या फिर एआई का इस्तेमाल करें. वक्त कम था और काम ज्यादा, ऐसे में सोचा नया विषय चुनते हैं, लेकिन शौर्य नहीं मान रहा था. उसने कहा कि लिखूंगा तो पापा पर ही. जैसे-तैसे रिसर्च और एडिटिंग से इसे पूरा किया.

पब्लिश हुआ किताब
शौर्य की मां कहती हैं कि शौर्य को किताबें पढ़ना पसंद है, बातों-बातों में कहानियां गढ़ता है. इसी के बाद उसके आइडिया पर काम किया. कुछ ग्रामर की गलतियां होतीं तो हम उसे सुधारते. फिर मुझसे ज्यादा शौर्य का अपने पिता से गहरा रिश्ता है, उनसे वह साइन लैंग्वेज में ही बात करता है. एक-दूसरे के साथ बहुत समय बिताते हैं. उसे कभी नहीं लगता कि उसके पापा नार्मल नहीं हैं. कभी भी अपने पिता को दूसरों की तरह अलग नहीं देखता है. टचवुड, शौर्य बहुत ही समझदार है. इस किताब को उसके स्कूल ने लिंक भेजकर पब्लिश करवाया है. अगर आप भी इसे पढ़ना चाहें तो यह ऑनलाइन मिल जाएगी.

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दिल को छू जाएगी यह कहानी, बहरे पिता के लिए मासूम शौर्य ने किया ऐसा काम

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