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‘शोले’ का वो धांसू सीन अगर नहीं होता डिलीट, क्लाइमैक्स होता और भी जानदार, नहीं देखा होगा वीरू-ठाकुर का भावुक नजारा

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Sholay Unsceen Climax: ज्यादातर लोगों ने फिल्म ‘शोले’ का संपादित वर्जन देखा है. इसकी एंडिंग वैसी नहीं है, जैसा निर्देशक रमेश सिप्पी लोगों को दिखाना चाहते थे. दरअसल, सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद डायरेक्टर ने क्लाइमैक्स सीन को बदल दिया था और कुछ सीन…और पढ़ें

'शोले' का वो धांसू सीन अगर नहीं होता डिलीट, क्लाइमैक्स होता और भी जानदार

फिल्म ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी.

हाइलाइट्स

  • ‘शोले’ की एंडिंग बदली गई थी.
  • सेंसर बोर्ड ने हिंसक दृश्यों पर आपत्ति जताई थी.
  • ठाकुर ने ऑरिजिनल सीन में गब्बर सिंह को मारा था.

नई दिल्ली: फिल्म ‘शोले’ का मूल वर्जन सिनेमाघरों में कभी रिलीज नहीं हुआ, मगर लोगों की डिमांड पर इसे सैटेलाइट चैनल पर दिखाया गया. ‘शोले’ का मूल वर्जन भी लोगों को खूब भाया, जिसकी एंडिंग सेंसर बोर्ड के अड़ंगे के बाद डायरेक्टर को बदलनी पड़ी थी. रमेश सिप्पी चाहते थे कि गब्बर सिंह पुलिस के हाथों गिरफ्तार होने के बजाय ठाकुर के हाथों मारे जाएं.

सेंसर बोर्ड को ‘शोले’ की एंडिंग से आपत्ति थी, जिससे फिल्म मुश्किल में फंस गई थी. उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथों में लेना और उसके लिए दंडित न होना, अगर ऐसा करते हुए हम नायक को दिखाते हैं, तो दर्शकों में गलत मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा. नतीजतन, डायरेक्टर रमेश सिप्पी को यू सर्टिफिकेट पाने के लिए ‘शोले’ का क्लाइमैक्स सीन दोबारा शूट करना पड़ा था.

सेंसर बोर्ड को फिल्म ‘शोले’ के उन आखिरी सीन से भी आपत्ति थी, जिसमें गब्बर सिंह और ठाकुर की लड़ाई के फुटेज शामिल थे. इस सीन में ठाकुर बड़े हिंसक तरीके से गब्बर सिंह को लातों से मारता है. गब्बर सिंह का अंत करने के बाद ठाकुर (संजीव कुमार), वीरू (धर्मेंद्र) से गले लगकर रोता है. फिल्म का यह सीन इतना संवेदनशील है कि दर्शक इसे देखकर इमोशल हो सकते हैं. आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, निर्देशक को वह सीन भी हटाना पड़ा था, जहां डाकू गब्बर सिंह बड़ी क्रूरता से अहमद (सचिन पिलगांवकर) के बाल पकड़कर उस पर जुल्म ढाता नजर आ रहा है. सेंसर बोर्ड ने फिल्म के मूल वर्जन से यह सीन भी हटवा दिया था.

जब गब्बर सिंह बनना चाहते थे धर्मेंद्र
‘शोले’ की रिलीज के 5 दशक बाद भी दर्शक इसे टीवी पर देखना पसंद करते हैं. इसे कुछ वक्त पहले सिनेमाघरों में जब दोबारा रिलीज किया गया था, तब भारी संख्या में लोग थियेटर पहुंचे थे. इसका एक-एक डायलॉग दर्शकों के जेहन में चस्पा है. फिल्म 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी, जिसमें धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, संजीव कुमार, अमजद खान, अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी जैसे सितारों ने लीड रोल निभाया था. फिल्म की स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. फिल्म की दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र शुरू में ठाकुर बलदेव सिंह का रोल निभाना चाहते थे, लेकिन जब डायरेक्टर ने उन्हें बताया कि अगर वे यह रोल निभाएंगे, तो संजीव कुमार को वीरू का रोल मिल जाएगा और हीरोइन उन्हें मिल जाएंगी. धर्मेंद्र ऐसा नहीं चाहते थे. उन्होंने फिर वीरू का रोल निभाया.

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‘शोले’ का वो धांसू सीन अगर नहीं होता डिलीट, क्लाइमैक्स होता और भी जानदार

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