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सोशल मीडिया पर शख्स ने अपने साथ हुई इस घटना के बारे में बताया है. उसने बताया है कि उसे किस तरह चलते-फिरते ही बगीचे में कुछ ऐसा मिल गया, जिसकी उसे कल्पना भी नहीं थी.
मेटल डिटेक्टर ने ढूंढा बक्सा. (Credit- Canva)
गड़े हुए या छिपे हुए धन के बारे में आपने भी सुना होगा. बुजुर्ग कहते थे कि पुराने ज़माने में लोग अपनी कीमती चीजों को चोरी होने से बचाने के लिए जमीन के नीचे दबा दिया करते थे. कई बार जमीन की खुदाई में ऐसी ही चीजें निकल भी आती हैं, जिन्हें छिपाया गया हो. इसकी तलाश में दुनिया के कई ट्रेजर हंटर्स को रहते ही है. वहीं कुछ लोग अपने ही घर-बगीचे में खज़ाने की तलाश में जुटे रहते हैं.
अगर कोई चीज़ बिना मेहनत के आपके हाथ लग जाए, तो इसे अच्छी किस्मत ही माना जाता है. इस ट्रेज़र हंटर के भी मेटल डिटेक्टर ने कमाल कर दिखाया. सोशल मीडिया पर शख्स ने अपने साथ हुई इस घटना के बारे में बताया है. उसने बताया है कि उसे किस तरह चलते-फिरते ही बगीचे में कुछ ऐसा मिल गया, जिसकी उसे कल्पना भी नहीं थी. चलिए जानते हैं कि ये उसकी अच्छी किस्मत थी या फिर बुरी.
दोस्त के बगीचे में मिला बक्सा
रेडिट पर इस घटना के बारे में बताते हुए कैलिफोर्निया के रहने वाले एक शख्स ने लिखा कि उसके साथ एक अजीब घटना हुई. वो अपने दोस्त के साथ उसके बगीचे में मेटल डिटेक्टर लेकर घूम रहा था. इसी बीच उसे बीप की आवाज़ आई, तो उन्होंने उस जगह को खोदना शुरू किया. जल्दी ही उन्हें खट-खट की आवाज़ आई और उन्हें लगा कि ये कोई ताबूत है. हालांकि इसके छोटे साइज़ की वजह से उन्हें समझ में आया कि ये एक बक्सा है. बक्सा धूल से सना हुआ था और दोनों दोस्तों को लगा कि ये पुराने मालिक का है, जिसमें उसकी ही कुछ चीज़ें रखी होंगी.
क्या था बक्से के अंदर?
वे काफी देर तक सोचते रहे कि इसके अंदर क्या होगा और आखिरकार उन्होंने इसे खोला. दोनों ही ये देखकर हैरान रह गए बक्से में कोई कीमती चीज़ नहीं होकर सिर्फ और सिर्फ धूल भरी थी और कुछ प्लास्टिक के फूल पड़े थे. बॉक्स पर SS मार्किंग भी थी. जब उन्होंने पता किया तो समझ में आया कि ये मार्किंग हिटलर के ज़माने में मौजूद ऑर्गनाइज़ेशन Schutzstaffel की थी. अब साफ हो गया था कि बक्सा द्वितीय विश्वयुद्ध के समय का है लेकिन इसमें धूल क्यों संजोई गई ये पता नहीं चला. यूज़र्स ने इस पर तमाम रिएक्शन दिए लेकिन इसे पाने वालों को ये मलाल ज़रूर था कि बक्से में कुछ कीमती नहीं निकला, हालांकि कुछ लोगों ने इस ऐतिहासिक खोज में दिलचस्पी ज़रूर दिखाई.
January 22, 2025, 13:58 IST
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