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OPINION : लाठीचार्ज का लाइसेंस मिलने से बदल गई टीम इंडिया , टी-20 की नई टैग लाइन,रोकना मना है और ठोकना जरूरी है

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टी-20 फॉर्मेट में भारतीय टीम की लगातार जीत के पीछे की बड़ी वजह है बल्लेबाजों के पास विराधियों पर लाठीचार्ज करने का लाइसेंस. लगातार टी-20 सीरीज जीतने वाली टीम इंडिया में आज शुरु से लेकर अंत तक वो बल्लेबाज है जो…और पढ़ें

मैदान पर लाठीचार्ज करने के लाइसेंस ने बदल दिया टीम का माहौल

टी-20 में भारतीय बल्लेबाजों की सोच में बदलाव के पीछे कौन ?

नई दिल्ली. 120 गेंदों का खेल और हर गेंद को सीमा पार पहुंचाने की चुनौती तब से थी जब से टी-20 फॉर्मेट क्रिकेट में आया. समय के साथ साथ हर फॉर्मेट में बदलाव देखने को मिला पर सबसे बड़ा और तेजी केसाथ  टी-20 फॉर्मेट बदला. 17 फरवरी 2005 में पहला टी-20 अतर्राष्ट्रीय मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच में खेला गया था. 20 साल बाद जब पीछे मुड़ कर देखे तो लगता है कि कि टी-20 में बल्लेबाजों की सोच में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है.

ऐसा नहीं है कि पहले बल्लेबाज तेज नही खेलते थे .पर आज जिस तरह से टी-20 में बल्लेबाज सोच लेकर मैदान पर उतरते है वो बिल्कुल अलग है. हर गेंद पर निर्मरता से प्रहार करना और बिना किसी भय के बिंदास खेलना आज की पीढी की पहचान है. आज के दौर में बड़ा स्कोर उतना मायने नहीं रखता जितना कि किस स्ट्राइक रेट से रन बनाया गया. 150 के उपर स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले की जगह पक्की है और वो चर्चा में रहता है .

लाठीचार्ज का लाइसेंस 

अभिषेक शर्मा जिस अंदाज में बल्लेबाजी करते है उससे एक बात तो साफ है कि उनके पास मैदान पर लाठीचार्ज करने का लाइसेंस है. बाएं हाथ के धाकड़ ओपनर ने 232.35 की स्ट्राइक रेट से खेलते हुए 34 गेंदों पर 79 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 5 चौके और 8 छक्के लगाए। ये तो सिर्फ एक बल्लेबाज के एक मैच की कहानी है. आज भारतीय टीम टी-20 में अपना वर्चस्व बना रही है तो इसके पीछे भी लाठीचार्ज का लाइसेंस है. बांग्लादेश के खिलाफ संजु ने दो पारियां ऐसी खेली जिसका स्ट्राइक रेट 200 से उपर रहा. कप्तान सूर्यकुमार, तिलक वर्मा ,रिंकु सिंह ,हार्दिक पांडेया और नितिश रेड्डी सभी 150 के उपर स्ट्राइक रेट से रन बनाते है  यानि जरूरत से ज्यादा खतरा मोल लेकर रन बनाने की लगातार कोशिश जिसमें भारतीय बल्लेबाजों की सफलता कौ औसत शानदार रहा है और इसीलिए टी-20 में टीम टशन के साथ खेल रही है .

2022 की हार ने बदली सोच 

टी-20 वर्ल्ड कप 2022 में टीम इंडिया इग्लैंड से सेमीफाइनल हार गई और उसके बाद उस समय के कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान ने टी-20 में सोच को बदलना शुरु किया. तब रोहित ने खुद ये जिम्मेदारी ली और टीम के बाकी बल्लेबाजों को दिखाना शुरु किया कि स्ट्राइक रेट कितना अहम है. जाहिर है जब कप्तान ने खतरा उठाकर बल्लेबाजी करना शुरु किया तो बाकी को भी करना पड़ा और इसी वजह से टीम 2024 का वर्ल्ड कप जीतने में कामयाब रही. वर्ल्ड कप के बाद कप्तानी सूर्यकुमार यादव के पास और कोच पद की जिम्मेदारी गौतम गंभीर के पास गई. इन दोनों ने मैदान पर पहली ही गेंद से लाठीचार्ज करने के सिलसिले को जारी रखा और खिलाड़ियों को लाइसेंस दिया कि वो टीम हित में लगातार फेल भी होते है तो उनकी जगह बनी रहेगी. मिसाल के तौर पर अभिषेक शर्मा और संजु सैमसन को देख लीजिए . पहले बल्लेबाजी करें तो वही सोच और रन चेज कर रहे हो तो भी वहीं एप्रोच. इतना ही नहीं खतरा मोल लेते हुए ओपनर आउट भी हो जाए तो टैंपो कम नहीं होना चाहिए इसीलिए तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, नितिश रेड्डी हार्दिक और रिंकु सिर्फ गेंदों को हिट करने में यकीन करने लगे है जो आज के टी-20 क्रिकेट की सबसे बड़ी डिमांड है .

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