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Gurmeet Choudhary Father: गणतंत्र दिवस के मौके पर एक्टर गुरमीत चौधरी ने भारतीय सेना के साथ अपने गहरे संबंध को बयां किया है. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे सेना के अधिकारियों ने उनका नाम रखा था.
गुरमीत चौधरी टीवी की दुनिया के स्टार हैं.
हाइलाइट्स
- गुरमीत चौधरी का नाम सेना के अधिकारियों ने रखा था.
- गुरमीत के पिता सेना में अधिकारी थे.
- अभिनय में करियर बनाने के बावजूद गुरमीत का सेना के प्रति प्यार बरकरार रहा.
नई दिल्ली: गुरमीत चौधरी टीवी की दुनिया का चर्चित नाम हैं. उन्होंने टीवी शो में राम का रोल निभाकर खूब लोकप्रियता बटोरी थी. वे आर्मी फैमिली से ताल्लुक रखते हैं. गुरमीत के पिता सेना में अधिकारी थे. एक्टर का पालन-पोषण एक सैन्य परिवार में हुआ था, इसलिए गुरमीत चौधरी का जीवन काफी अनुशासित रहा है. गुरमीत चौधरी ने अपने सफर को याद करते हुए कहा, ‘सेना ने मेरे जीवन पर गहरा असर डाला है. बहुत कम लोग जानते हैं कि मेरा नाम गुरमीत असल में मेरे पिता के पंजाबी अफसर दोस्तों ने दिया था. ये सभी लोग पंजाब रेजिमेंट का हिस्सा थे. इसलिए, एक तरह से मेरा नाम सेना का सार है.’
गुरमीत ने बताया, ‘एक सेना के बच्चे के रूप में बड़ा होना शानदार अनुभवों से भरा पड़ा है. एक पोस्टिंग से दूसरी पोस्टिंग पर जाना, यह अलग ही दुनिया थी.’ सेना में भर्ती को लेकर एक्टर ने कहा, ‘कई लोगों ने मान लिया था कि मैं अपने पिता के नक्शेकदम पर चलूंगा और सेना में शामिल हो जाऊंगा, लेकिन मैं हमेशा से अभिनय की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहता था. शुरू में मेरे पिता को संदेह था. उन्हें लगता था कि अभिनय में करियर बनाना सही नहीं है. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और लोग उन्हें ‘गुरमीत के पापा’ के रूप में पहचानने लगे. इसके बाद वह मेरे सबसे मजबूत सपोर्टर बन गए.’
फिल्म ‘कमांडर करण सक्सेना’ में खास रोल
गुरमीत चौधरी ने बताया कि उन्होंने भले ही अभिनय में अपना करियर बना लिया, लेकिन सेना के लिए उनका प्यार कभी कम नहीं हुआ. अपने ‘कमांडर करण सक्सेना’ जैसे प्रोजेक्ट के साथ उन्होंने देश की सेना के साथ पिता को सम्मान देने का काम किया है. एक्टर का मानना है कि ‘कमांडर करण सक्सेना’ में एक सेना अधिकारी की भूमिका निभाना उनके उन मूल्यों के लिए सम्मान है, जो उन्हें उनके पिता से मिली है. उन्होंने कहा, ‘देश की सेना के लिए मेरा सम्मान इतना गहरा है कि मैंने एक बार देश की सेवा करने के लिए भर्ती होने के बारे में सोचा था, हालांकि मैं शामिल नहीं हो सका. मैं अपने काम के जरिये उनकी वीरता की कहानियों को जीवंत करके और दुनिया को उनकी बहादुरी दिखाकर उनके बलिदानों का सम्मान करने की कोशिश करता रहूंगा.’
January 25, 2025, 22:18 IST
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