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भारत बनाम इंग्लैंड टी20: हर्षित राणा का कनकशन सब्स्टीट्यूट डेब्यू विवाद

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भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पुणे टी20 में हर्षित राणा को कनकशन सब्स्टीट्यूट के रूप में उतारा, जिससे विवाद हुआ। राणा ने 3 विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

Explainer: कनकशन सब्स्टीट्यूट और इम्पैक्ट प्लेयर में क्या अंतर है?

कनकशन सब्स्टीट्यूट और इम्पैक्ट प्लेयर में क्या अंतर है?

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ पुणे टी20 मैच के दौरान हर्षित राणा को बतौर कनकशन सब्स्टीट्यूट उतारा जिसे लेकर विवाद हो गया. शिवम दुबे को मैच के दौरान बल्लेबाजी करते हुए हेलमेट पर बॉल लगी थी. इसके बाद वो गेंदबाजी करने नहीं उतरे और उनकी जगह पर हर्षित राणा को मैच खेलने का मौका मिला. इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू किया और 3 विकेट लेकर भारत की जीत में अहम मूमिका निभाई. कनकशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर उनको खेलने का मौका मिला लेकिन लोग इसे इम्पैक्ट प्लेयर बता रहे हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि दोनों में अंतर क्या है.

पुणे टी20 में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 181 रन बनाए थे. लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम 19.4 ओवर में 166 रन पर सिमट गई. हर्षित राणा ने 4 ओवर में 33 रन देकर 3 विकेट झटके. रवि बिश्नोई ने 4 ओवर में 28 रन देकर 3 विकेट अपने नाम किए. वरुण चक्रवर्ती ने 2 जबकि अक्षर पटेल और अर्शदीप सिंह ने 1 इंग्लिश बल्लेबाज को आउट किया. भारत ने 15 रन से मैच जीतकर सीरीज में 3-1 की बढ़त हासिल की. मैच खत्म होने के बाद इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर ने हर्षित राणा को कनकशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर शिवम दुबे की जगह मैच में उतारने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा यह लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट नहीं है.

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कनकशन सब्स्टीट्यूट नियम के तौर पर हर्षित ने मैच के बीच में उतरकर की गेंदबाजी.

क्या होता है कनकशन सब्स्टीट्यूट
आईसीसी ने मैच के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए खिलाड़ियों की जगह प्लेइंग इलेवन में संभावित लिस्ट में शामिल खिलाड़ियों में से किसी को मैदान पर उतारने का प्रावधान रखा है. अगर मैच के दौरान किसी खिलाड़ी को सिर पर चोट लग जाती है और वो आगे खेलने की स्थिति में नहीं होता तो उसकी जगह पर कनकशन सब्स्टीट्यूट को उतारा जा सकता है. आईसीसी के नियम के मुताबिक जो खिलाड़ी चोटिल होता है उसी की क्षमता का खिलाड़ी मैदान पर उतारा जा सकता है. गेंदबाज की जगह गेंदबाज, बल्लेबाजी की जगह बल्लेबाज, विकेटकीपर और ऑलराउंडर की जगह भी खिलाड़ी रिप्लेस किए जा सकते हैं.

हर्षित राणा ने शिवम दुबे की जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर टी20 डेब्यू किया.

हर्षित राणा ने शिवम दुबे की जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर टी20 डेब्यू किया.

क्या होता है इम्पैक्ट प्लेयर
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान इम्पैक्ट प्लेयर के नियम का प्रयोग किया जाता है. आईसीसी ने इसे अभी तक इंटरनेशनल मुकाबलों में लागू नहीं किया है. इस नियम के मुताबिक मैच के दौरान पहली पारी और दूसरी पारी के बीच में दोनों ही टीम को किसी एक खिलाड़ी के बदले दूसरे खिलाड़ी को शामिल करने का मौका दिया जाता है. जैसे पहले पारी में बल्लेबाजी कर चुके खिलाड़ी को गेंदबाज से बदला जा सकता है.

कनकशन सब्स्टीट्यूट और इम्पैक्ट प्लेयर में क्या अंतर है?
ये दोनों ही नियम एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. एक तरफ जहां कनकशन सब्स्टीट्यूट में सिर्फ समान क्षमता के खिलाड़ी ही खेल सकते हैं वहीं इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर किसी भी खिलाड़ी को उतारा जा सकता है. कनकशन में अगर कोई बल्लेबाज चोटिल होकर मैदान से बाहर जाता है तो सब्स्टीट्यूट के तौर पर आने वाली खिलाड़ी सिर्फ फील्डिंग कर पाएगा. वहीं इम्पैक्ट प्लेयर पहली पारी में बल्लेबाजी कर चुके बैटर की जगह आने वाला गेंदबाज हो सकता है जो टी20 में पूरे 4 ओवर गेंदबाजी कर सकता है.

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Explainer: कनकशन सब्स्टीट्यूट और इम्पैक्ट प्लेयर में क्या अंतर है?

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